
लाइफस्टाइल डेस्क: हर साल 12 जनवरी को स्वामी विवेकानंद की जयंती राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाई जाती है। यह दिन केवल एक संत और विचारक को याद करने का नहीं, बल्कि उस विचारधारा का उत्सव है जिसने भारत को वैश्विक पहचान दिलाई। स्वामी विवेकानंद का जीवन आत्मविश्वास, साहस और सेवा की मिसाल रहा है।
स्वामी विवेकानंद को विश्व स्तर पर अमर बनाने वाली घटना अमेरिका के शिकागो में आयोजित विश्व धर्म सम्मेलन में दिया गया उनका ऐतिहासिक भाषण है। इस भाषण ने भारत की आध्यात्मिक शक्ति को पूरी दुनिया के सामने स्थापित किया और युवाओं में आत्मगौरव की भावना जगाई।
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स्वामी विवेकानंद के अनुसार,
“जीवन में जोखिम लो, जीतोगे तो नेतृत्व करोगे, हारोगे तो मार्गदर्शन।”
हार भी सीख का जरिया है।
स्वामी विवेकानंद ने कहा,
“दूसरों की सेवा करना ही सबसे बड़ा धर्म है।”
सेवा से ही जीवन को सार्थकता मिलती है।
3. अनंत संभावनाओं में विश्वास
वे युवाओं को याद दिलाते हैं,
“कभी मत कहो कि मैं नहीं कर सकता, तुम अनंत हो।”
सीमाएं केवल सोच में होती हैं।
4. फोकस का महत्व
आज के मल्टीटास्किंग युग में उनका यह विचार बेहद अहम है—
“एक समय में एक काम करो और पूरी आत्मा उसमें डाल दो।”
5. डर से आगे ही जीत
वे कहते थे,
“डर ही पतन और पाप का मुख्य कारण है।”
निर्भीक होकर फैसले लेने से ही जीवन में आगे बढ़ा जा सकता है।
स्वामी विवेकानंद कहते हैं,
“उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए।”
यह विचार युवाओं को आलस छोड़कर निरंतर प्रयास करने की प्रेरणा देता है।
7. असंभव केवल भ्रम है
वे कहते हैं,
“ब्रह्मांड की सारी शक्तियां पहले से हमारी हैं।”
कमजोरी बाहर नहीं, हमारे नजरिए में होती है।
उनका मानना था,
“जिस दिन समस्या न आए, समझो रास्ता गलत है।”
संघर्ष आगे बढ़ने का प्रमाण है।
उनका मानना था,
“हम वो हैं, जो हमें हमारी सोच ने बनाया है।”
नकारात्मक सोच व्यक्ति को कमजोर बनाती है, जबकि सकारात्मक सोच असंभव को भी संभव कर देती है।
स्वामी विवेकानंद का स्पष्ट संदेश था,
“जब तक आप खुद पर विश्वास नहीं करते, तब तक आप भगवान पर भी विश्वास नहीं कर सकते।”
सफलता का पहला कदम आत्मविश्वास है।