
लाइफस्टाइल डेस्क। आजकल 90 प्रतिशत बच्चे टीवी-मोबाइल देखते हुए खाना खाते हैं, यह आदत तुरंत रोकनी होगी। बच्चों को बिना स्क्रीन के खाना खाने की आदत डालें। जिन बच्चों को माइनस नंबर है, उन्हें लगातार चश्मा लगाना चाहिए। इससे एंब्लियोपिया यानी सुस्त आंख की समस्या से बचा जा सकता है। स्क्रीन से दूरी, सही रोशनी और समय पर जांच ही आंखों को बचा सकती है।
आंखों से कम दिखने पर आंख टेढ़ी हो सकती है, जिसे स्क्विंट कहते हैं। समय पर इलाज से विजन बचा रहता है। बच्चों में नंबर है तो चश्मा लगातार लगवाएं। लेसिक सबके लिए नहीं है, जांच के बाद ही तय होता है। आंखों की कोई भी समस्या हो तो खुद इलाज न करें, समय पर विशेषज्ञ को दिखाएं।
आंखों में अचानक चमक दिखाई देना, खांसने या छींकने पर तारे नजर आना, लगातार पानी आना और रात में वाहनों की रोशनी का फैलकर दिखना सामान्य परेशानी मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
इन लक्षणों के पीछे चश्मे का नंबर, आंखों में सूखापन, आंसू निकलने के रास्ते में रुकावट या आंखों से जुड़ी दूसरी समस्याएं हो सकती हैं। डायबिटीज के मरीजों को साल में कम से कम एक बार आंखों के पर्दे (रेटिना) की जांच करानी चाहिए। वहीं, बच्चों की आंखों को स्वस्थ रखने के लिए रोज बाहरी गतिविधियां जरूरी हैं।
लंबे समय तक मोबाइल और कंप्यूटर पर काम करने वालों को भी नियमित अंतराल पर आंखों को आराम देना चाहिए। गांधी मेडिकल काॅलेज की प्रोफेसर डाॅ. अदिति दुबे ने बताया कि आंखों में परेशानी होने पर बिना जांच के आई ड्राप डालना उचित नहीं है।
स्क्रीन टाइम कम करें, अच्छी और पूरी नींद लें, हरी पत्तेदार सब्जियां-देसी घी आंखों के लिए फायदेमंद

- खांसने पर आंखों में तारे जैसे दिखते हैं। - शैलेंद्र सिंह, अवधपुरी
जवाब: इसे फोटोप्सिया कहते हैं। माइनस नंबर वालों में विट्रियस यानी आंख के अंदर का जेल रेटिना से खिंचता है, तब ऐसा लगता है। खांसने, छींकने, जोर लगाने या जिम में भारी वजन उठाने पर विट्रियस पर दबाव पड़ता है। ब्लड प्रेशर बदलने और डिहाइड्रेशन से भी यह बढ़ सकता है। अगर यह बार-बार हो, साथ में पर्दा गिरने जैसा लगे या काले धब्बे दिखें तो तुरंत रेटिना की जांच कराएं।
- दाईं आंख से आंसू आते हैं, बिना चश्मे के रात में धुंधला दिखता है। - ओमप्रकाश सोनी, 70, श्यामपुर
जवाब: उम्र के साथ आंसू की नली में रुकावट और आंखों की सतह का सूखापन बढ़ जाता है। गर्म कपड़े से दिन में दो बार सिकाई करें। विटामिन बी-12 और मल्टीविटामिन की कमी की जांच कराएं। रात में धुंधलापन मोतियाबिंद का शुरुआती लक्षण हो सकता है, इसलिए दवा डालकर पूरी जांच कराएं।
- आठ से 10 घंटे स्क्रीन पर रहता हूं, आंखों की सुरक्षा के लिए कौन सा चश्मा लगाऊं। - राहुल सिंह, कोलार
जवाब: फैंसी या ब्लू-कट ग्लास से ज्यादा जरूरी है सही आदत। स्क्रीन को आंखों के स्तर पर रखें। पीठ और गर्दन को सपोर्ट दें। 20-20-20 नियम अपनाएं, हर 20 मिनट बाद 20 फीट दूर देखें और 20 सेकंड का ब्रेक लें। सामान्य रूप से हम एक मिनट में आठ-10 बार पलकें झपकाते हैं, स्क्रीन पर यह घट जाता है, इसलिए जानबूझकर ब्लिंक करें। पर्याप्त पानी पिएं, इससे आंसू अच्छे बनेंगे। एसी या पंखें की हवा सीधे चेहरे पर न आने दें। आंखों में खिंचाव हो तो हाथ से न मलें, इससे संक्रमण का खतरा है।
- पिताजी की आंख से चार महीने से आंसू आते हैं, आराम नहीं मिला। - जितेंद्र सिंह दांगी, गंजबासौदा
जवाब: 60 साल की उम्र के बाद आंख के आसपास की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं, जिससे आंसू ठीक से ड्रेन नहीं हो पाते। इसे एपिफोरा कहते हैं। आंख के नीचे की मांसपेशी को दिन में कई बार हल्के हाथ से 30-40 बार दबाएं। 15-20 दिन में फर्क दिखेगा, लेकिन इसे लंबे समय तक करना होगा। अगर नली पूरी तरह बंद है तो जांच के बाद ही आगे का इलाज तय होगा।
- शुगर के मरीज को दवा से आंखों पर क्या असर पड़ता है? - देवेंद्र चौबे, टीलाजमालपुरा
जवाब: शुगर की दवा से आंख खराब नहीं होती, बल्कि अनियंत्रित शुगर से रेटिना खराब होता है। इसे डायबिटिक रेटिनोपैथी कहते हैं। हर साल एक बार पुतली फैलाकर पर्दे की जांच कराएं। तीन महीने का औसत शुगर टेस्ट एचबीए1सी कराते रहें। शुगर जितने लंबे समय तक बढ़ा रहेगा, रेटिना और किडनी खराब होने का खतरा उतना ही ज्यादा रहेगा।
- 70 साल की उम्र, आंखों में कीचड़ आता है, धुंधलापन रहता है। - मनमोहन विश्वकर्मा, 1100 क्वार्टर
जवाब: कीचड़ आना, लाल रहना और दर्द होना संक्रमण का संकेत हो सकता है। बिना देखे कोई आईड्राप न डालें। मोतियाबिंद में भी धुंधलापन रहता है, लेकिन कीचड़ के साथ है तो डाॅक्टर को दिखाना जरूरी है।
- पास का देखने में परेशानी है, चश्मे का नंबर बदल गया है, उम्र 38 साल। - देविका कुमारी, न्यू मार्केट
जवाब: 38-40 साल के बाद पास देखने की क्षमता कम होने लगती है, इसे प्रेसबायोपिया कहते हैं। यह उम्र के साथ होने वाला सामान्य बदलाव है। जांच के बाद रीडिंग ग्लास लगाएं। इससे कोई नुकसान नहीं होता। बिना जांच के ड्राप न डालें। माइनस नंबर 40 के बाद थोड़ा कम हो सकता है, लेकिन चश्मा जांच के बाद ही बदलें।
- रात में वाहनों की लाइट चमकती और फैली हुई दिखती है, मोतियाबिंद का आपरेशन हो चुका है। - स्वाति चौबे, अवधपुरी
जवाब: ऑपरेशन के बाद लेंस के पीछे झिल्ली आ जाती है, इसे पोस्टीरियर कैप्सुलर ओपेसिफिकेशन कहते हैं। इससे रोशनी फैली हुई दिखती है। इसका इलाज लेजर से होता है, जिसे याग लेजर कैप्सुलोटामी कहते हैं। इसके अलावा धूल से एलर्जी और ड्राइनेस भी चकाचौंध बढ़ाते हैं। एक बार नेत्र रोग विशेषज्ञ को दिखा लें। ड्राइनेस के लिए लुब्रिकेंट ड्राप ले सकते हैं।