
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। आंखों की बढ़ती ड्रायनेस को लेकर समय रहते सचेत हो जाना जरूरी है। आजकल इलेक्ट्रानिक गैजेट के अधिक उपयोग से ड्राई आई की समस्या तेजी से बढ़ रही है। इससे बचाव के लिए स्क्रीन टाइम कम करना बेहद जरूरी है। हर 20 मिनट में 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर देखना आंखों को आराम देता है। अच्छी और पूरी नींद लेना आंखों के स्वास्थ्य के लिए अनिवार्य है।
साथ ही प्रत्येक स्वस्थ व्यक्ति के लिए हरी पत्तेदार सब्जियां, आंवला और देसी घी का सेवन आंखों की ज्योति बढ़ाता है। नहाते समय सीधे सिर पर बहुत गर्म पानी डालने से बचें, क्योंकि यह आंखों की रोशनी को प्रभावित करता है। हमेशा गुनगुने या सामान्य पानी से स्नान करें।
आयुर्वेद के अनुसार नियमित रूप से अणु तेल का नस्य करने से आंखों में स्निग्धता बनी रहती है और दृष्टि दोष कम होता है। साथ ही रात में सोने से पहले पैरों के तलवों में देसी घी की मालिश करना भी नेत्र ज्योति के लिए लाभदायक माना गया है।
आंखों में जलन, खुजली, बार-बार पानी आना या धुंधला दिखने पर लापरवाही न बरतें और नियमित नेत्र जांच कराएं। समय पर जांच से कई गंभीर रोगों से बचा जा सकता है।
यह बात बुधवार को नईदुनिया के हेलो डाॅक्टर कार्यक्रम में शासकीय स्वशासी आयुर्वेद महाविद्यालय-चिकित्सालय गौरीघाट के नेत्र रोग विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डाॅ. दुर्गेश गुप्ता ने पाठकों से कही।
सवाल : मेरी उम्र 45 साल है। मैं यह जानना चाहता हूं कि आंखों के सूखेपन का कारण क्या है। क्या बचाव संभव है। 50 शब्द
रमेश प्रजापति, दमोह
जवाब : इसके अनेक कारण संभव हैं, वैसे मुख्यत: 45 की उम्र में आंखों का सूखापन स्क्रीन टाइम ज्यादा होने, एसी में लंबे समय तक रहने, नींद कम होने, हार्मोनल बदलाव और गर्म पानी से सिर धोने से हो सकता है। बचाव के लिए स्क्रीन टाइम कम करें, पूरी नींद लें, हरी सब्जियां खाएं और नियमित नेत्र जांच कराएं। आयुर्वेद के अनुरूप किसी भी उपाय को अपनाने से पहले अपने विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।
सवाल : मेरा बेटा अभी 14 साल का है, लेकिन अधिक रिडिंग के कारण चश्मे का प्रयाेग करता है। यही नहीं पास की नजर कमजोर हो रही है। क्या करना चाहिए कि नंबर बढ़े नहीं।
गणेश सेन, कटनी
जवाब : आपके बेटे की उम्र में अधिक पढ़ाई, मोबाइल-लैपटाप का लगातार उपयोग और कम रोशनी में पढ़ने से मायोपिया यानी निकट दृष्टि दोष का नंबर बढ़ना सामान्य है। नंबर न बढ़े, इसके लिए कुछ जरूरी है स्क्रीन टाइम कम करें, सही रोशनी में पढ़ें, लेटकर या अंधेरे में पढ़ने से बचें, आउटडोर एक्टिविटी आंखों के लिए बहुत फायदेमंद है। पोषण का भी ध्यान रखना होगा। आयुर्वेद नेत्र रोग विभाग से परामर्श जरूर लें।
सवाल : मैं अभी 38 साल की हूं, आंखों में अक्सर गुहेरी हो जाती है। जिसके कारण दो से तीन दिन काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है और आंखों से पानी भी आता है।
छवि पटेल, जबलपुर
जवाब : आंखों में बार-बार गुहेरी होना पलकों में तेल ग्रंथियों के बंद होने और हाथों की गंदगी से संक्रमण के कारण होता है। बार बार आंखों को अंगुलियों रगड़ने से बचना चाहिए। आंखों को साफ रखना, गर्म सिकाई, त्रिफला के पानी से आंखें धोना और खानपान में तला-भुना कम करना फायदेमंद होगा। बार-बार होने पर नेत्र रोग विशेषज्ञ से जांच कराएं।
सवाल : आंखों से मुझ़े कीचड़ बहुत आता है। खासकर शीतकाल में। क्या कोई चिंता की बात तो नहीं।
राजेश कोरी, नरसिंहपुर
जवाब : आंखों से कीचड़ या चिपचिपा पानी आना अक्सर एलर्जी, पलकों की सूजन, ड्रायनेस या पुराने सर्दी-जुकाम के कारण होता है। शीतकाल में ठंडी हवा और धूल से यह बढ़ जाता है। यदि कीचड़ के साथ लाली, खुजली, सूजन या धुंधलापन है तो यह संक्रमण का संकेत हो सकता है। आंखों को गंदे हाथों से न रगड़ें, साफ पानी से धोएं और ठंडी हवा में चश्मा पहनें। बार-बार होने पर जांच करा लें, चिंता की बात नहीं है पर जांच जरूरी है।