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बाली में हादसे के बाद नुसरत भरूचा को स्पाइनल फ्रैक्चर, जानिए रीढ़ की चोट के 6 ऐसे लंबे असर जो उड़ा देंगे आपके होश

एक्ट्रेस नुसरत भरूचा बाली में एक हादसे के दौरान स्पाइनल फ्रैक्चर का शिकार हो गई हैं, जिसके बाद उन्हें मुंबई लाकर अस्पताल में भर्ती कराया गया है। रीढ़ ...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Akriti kumari
Publish Date: Sun, 04 Oct 2026 01:28:38 PM (IST)Updated Date: Sun, 04 Oct 2026 01:39:23 PM (IST)
बाली में हादसे के बाद नुसरत भरूचा को स्पाइनल फ्रैक्चर, जानिए रीढ़ की चोट के 6 ऐसे लंबे असर जो उड़ा देंगे आपके होश
नुसरत भरूचा को स्पाइनल फ्रैक्चर। (file photo)

हेल्थ डेस्क। एक्ट्रेस नुसरत भरूचा को बाली में हादसे के बाद स्पाइनल फ्रैक्चर हुआ है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्हें पहले बाली के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां मेडिकल ऑब्जर्वेशन में रखा गया। आगे की जांच के बाद उनकी टीम ने बताया कि उन्हें स्पाइन सर्जरी की जरूरत होगी। इसके बाद उन्हें एयर एंबुलेंस के जरिए मुंबई लाया गया।

मुंबई पहुंचने के बाद नुसरत को स्ट्रेचर पर अस्पताल ले जाते हुए वीडियो भी सामने आए हैं। उनकी टीम के मुताबिक, सर्जरी के बाद उन्हें पर्याप्त आराम और रिकवरी के लिए समय की जरूरत होगी।

नुसरत की चोट किस हिस्से में है और फ्रैक्चर कितना गंभीर है, इसकी मेडिकल जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। इसलिए उनकी व्यक्तिगत रिकवरी को लेकर कोई अनुमान लगाना सही नहीं होगा। हालांकि, स्पाइनल फ्रैक्चर की गंभीरता और उसके लंबे असर को समझना जरूरी है।


हर स्पाइनल फ्रैक्चर से स्थायी नुकसान नहीं होता

रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर होने का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति को हमेशा के लिए चलने-फिरने में परेशानी होगी। कई मामलों में सही इलाज, आराम और रिहैबिलिटेशन के बाद व्यक्ति सामान्य गतिविधियों में वापस लौट सकता है।

रीढ़ की चोट का असर मुख्य रूप से इस बात पर निर्भर करता है कि फ्रैक्चर कहां हुआ है, हड्डी कितनी प्रभावित हुई है और क्या आसपास की नसों या स्पाइनल कॉर्ड को नुकसान पहुंचा है। इसी वजह से दो लोगों में एक जैसी दिखने वाली चोट का रिकवरी टाइम और असर अलग-अलग हो सकता है।

लंबे समय तक रह सकता है कमर या पीठ का दर्द

फ्रैक्चर ठीक होने के बाद भी कुछ लोगों को पीठ में दर्द या असहजता बनी रह सकती है। अगर फ्रैक्चर के कारण रीढ़ की हड्डियों की सामान्य स्थिति या alignment में बदलाव आता है, तो आसपास की मांसपेशियों, जोड़ों और ligaments पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। ऐसे में लंबे समय तक बैठने, खड़े रहने या कुछ खास गतिविधियों के दौरान दर्द महसूस हो सकता है।

नसों से जुड़ी परेशानी

कुछ स्पाइनल फ्रैक्चर आसपास की नसों पर दबाव या इरिटेशन पैदा कर सकते हैं। इस स्थिति में चोट की जगह के आधार पर झनझनाहट, सुन्नपन, तेज या शूटिंग पेन और कमजोरी जैसे लक्षण हो सकते हैं। अगर स्पाइनल कॉर्ड प्रभावित हुआ हो तो लक्षण ज्यादा गंभीर हो सकते हैं।

हालांकि, हर स्पाइनल फ्रैक्चर में नर्व डैमेज नहीं होता।

चलने-फिरने और शरीर मोड़ने में परेशानी

स्पाइनल फ्रैक्चर के बाद कुछ समय तक झुकना, मुड़ना, वजन उठाना या लंबे समय तक एक ही position में बैठना मुश्किल हो सकता है।

रिकवरी के दौरान डॉक्टर की सलाह के अनुसार physiotherapy और धीरे-धीरे strengthening exercises शुरू कराई जा सकती हैं। इनका उद्देश्य मांसपेशियों की ताकत, flexibility और शरीर की सामान्य मूवमेंट को वापस लाना होता है।

रीढ़ की बनावट और पोस्चर में बदलाव

कुछ कमप्रेशन फ्रैक्चर में vertebra का एक हिस्सा दब सकता है। ऐसी स्थिति में रीढ़ की सामान्य बनावट प्रभावित हो सकती है। गंभीर या एक से ज्यादा कमप्रेशन फ्रैक्चर होने पर कुछ लोगों में हाइट कम होने या पीठ के ऊपरी हिस्से में ज्यादा झुकाव जैसी समस्या दिखाई दे सकती है।

लंबे आराम से मांसपेशियां कमजोर हो सकती हैं

चोट के बाद लंबे समय तक शारीरिक गतिविधि कम रहने से सिर्फ रीढ़ ही नहीं, बल्कि शरीर की दूसरी मांसपेशियां भी कमजोर हो सकती हैं।

Physical activity कम होने से stamina भी घट सकता है। डॉक्टर की अनुमति मिलने के बाद rehabilitation programme के जरिए धीरे-धीरे muscle strength और endurance वापस लाने की कोशिश की जाती है।

रोजमर्रा के काम प्रभावित हो सकते हैं

रिकवरी के दौरान कुछ सामान्य गतिविधियां भी मुश्किल लग सकती हैं। लंबे समय तक बैठना, सीढ़ियां चढ़ना, वजन उठाना, यात्रा करना या exercise करना परेशानी या थकान पैदा कर सकता है।

यह असर कितना होगा, यह चोट की जगह, गंभीरता और इलाज के प्रति शरीर की प्रतिक्रिया पर निर्भर करता है।

गंभीर चोट में स्पाइनल कॉर्ड को नुकसान का खतरा

यह समझना जरूरी है कि स्पाइनल फ्रैक्चर और spinal cord injury एक ही चीज नहीं हैं। लेकिन गंभीर मामलों में फ्रैक्चरd या displaced vertebra स्पाइनल कॉर्ड पर दबाव डाल सकता है या उसे नुकसान पहुंचा सकता है। ऐसी स्थिति में चोट के नीचे के हिस्से में सेनसेशन, muscle control या मूवमेंट प्रभावित हो सकता है।

इसी वजह से गंभीर spinal injuries में शुरुआती medical assessment और उचित treatment बेहद महत्वपूर्ण होता है।

स्पाइनल फ्रैक्चर को ठीक होने में कितना समय लगता है?

हर व्यक्ति की recovery अलग होती है। कुछ स्पाइनल फ्रैक्चरs दवाओं, activity modification और rehabilitation से ठीक हो सकते हैं, जबकि कुछ मामलों में सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है।

कई स्पाइनल फ्रैक्चरs को करीब 6 से 12 सप्ताह में शुरुआती तौर पर हील होने में समय लग सकता है, लेकिन दर्द, मांसपेशियों की कमजोरी और सामान्य गतिविधियों में पूरी तरह लौटने में इससे ज्यादा समय लग सकता है।

इसलिए फ्रैक्चर का ठीक होना और व्यक्ति का पूरी तरह अपनी सामान्य फिजिकल एक्टिविटी में लौटना हमेशा एक ही समय पर नहीं होता।

नुसरत भरूचा की चोट के मामले में फिलहाल उनकी स्पाइनल फ्रैक्चर की exact location, severity और सर्जरी की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं है। ऐसे में उनकी व्यक्तिगत recovery को लेकर अनुमान लगाने के बजाय इतना समझना जरूरी है कि रीढ़ की चोट का असर हर मरीज में अलग हो सकता है और सही इलाज के साथ rehabilitation recovery का अहम हिस्सा होता है।

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