
लाइफस्टाइल डेस्क। ऑफिस में काम का दबाव बढ़ रहा है तो दीवाली पार्टी रख लो… इन दिनों कई कंपनियां कर्मचारियों का तनाव कम करने, टीम बॉन्डिंग बढ़ाने और काम के बीच खुशनुमा माहौल बनाने के लिए दीवाली पार्टी, गेम्स और दूसरे आयोजन कर रही हैं। रोज की मीटिंग, टारगेट और डेडलाइन के बीच कर्मचारियों को कुछ घंटे हंसने-बोलने और साथ वक्त बिताने का मौका मिलता है।
लेकिन सवाल यह है कि क्या कुछ घंटों की मस्ती से सच में काम का तनाव कम हो जाता है? पार्टी खत्म होने के अगले दिन जब वही काम, वही डेडलाइन और नई जिम्मेदारियां सामने होती हैं, तब क्या कर्मचारी पहले से बेहतर महसूस करते हैं? इसका एक दूसरा पहलू भी है। लगातार अच्छा प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों पर अक्सर ज्यादा काम डाल दिया जाता है। ऐसे में पार्टी उनके लिए राहत के बजाय एक और औपचारिक जिम्मेदारी बन सकती है।
ऑफिस पार्टी का अपना महत्व है। इससे अलग-अलग विभागों के कर्मचारियों को मिलने, बातचीत करने और एक-दूसरे को बेहतर समझने का मौका मिलता है। इससे टीम के बीच तालमेल और अपनापन बढ़ सकता है।
2017 में International Journal of Environmental Research and Public Health में प्रकाशित एक समीक्षा में कार्यस्थल पर सामाजिक गतिविधियों से जुड़े आठ अध्ययनों का विश्लेषण किया गया। इनमें से छह अध्ययनों में कर्मचारियों के कल्याण पर सकारात्मक असर के संकेत मिले। वहीं, 2025 के एक IZA अध्ययन में पाया गया कि नियमित सामाजिक आयोजनों से कर्मचारियों के बीच दोस्ती और तालमेल बढ़ सकता है, लेकिन व्यक्तिगत उत्पादकता में स्पष्ट सुधार नहीं मिला।
इसका मतलब है कि पार्टी से ऑफिस का माहौल बेहतर हो सकता है, लेकिन काम का बोझ कम होना जरूरी नहीं है। अगर किसी कर्मचारी के पास तय समय में पूरा न हो सकने वाला काम है, तो एक शाम की पार्टी उसकी परेशानी का स्थायी समाधान नहीं बन सकती।
ऑफिस में जो कर्मचारी समय पर काम पूरा करते हैं और लगातार अच्छा प्रदर्शन करते हैं, उन पर मैनेजर का भरोसा बढ़ जाता है। धीरे-धीरे उन्हें नए काम, अतिरिक्त जिम्मेदारियां और मुश्किल डेडलाइन भी मिलने लगती हैं। ऐसे में उनकी मेहनत को पहचान तो मिलती है, लेकिन काम का बोझ भी बढ़ता जाता है।
कई बार ऐसे कर्मचारियों से ऑफिस की पार्टी में शामिल होने और उत्साह दिखाने की भी उम्मीद की जाती है। अगर आयोजन ऑफिस के समय के बाद रखा गया है, तो यह उनके निजी समय पर भी असर डाल सकता है।
अक्टूबर 2025 में Personnel Psychology में प्रकाशित एक अध्ययन में सामने आया कि सहकर्मियों के सामाजिक आयोजनों के निमंत्रण से अपनापन बढ़ सकता है, लेकिन कुछ कर्मचारियों के लिए यह सामाजिक दबाव और तनाव का कारण भी बन सकता है। यानी हर कर्मचारी के लिए पार्टी में शामिल होना खुशी की बात नहीं होती। किसी को टीम के साथ समय बिताना पसंद हो सकता है, तो कोई काम के बाद घर जाकर आराम करना चाहता है।
कर्मचारियों को खुश रखने के लिए सिर्फ त्योहारों पर आयोजन करना काफी नहीं है। कंपनियों को काम का सही बंटवारा करना चाहिए, अतिरिक्त जिम्मेदारियों को पहचानना चाहिए और कर्मचारियों को समय पर छुट्टी और ब्रेक देना चाहिए। पार्टी में शामिल होने को अनिवार्य बनाने के बजाय इसे उनकी पसंद पर छोड़ना चाहिए।
दीवाली पार्टी खुशियां बांटने और टीम को करीब लाने का अच्छा तरीका हो सकती है, लेकिन असली राहत तब मिलेगी जब कर्मचारियों को काम के लिए पर्याप्त समय, उचित जिम्मेदारी और निजी जीवन के लिए भी जगह मिलेगी।
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