
नईदुनिया प्रतिनिधि, रतलाम। मौसम में बदलाव के साथ सर्दी, खांसी, गले में खराश, नाक बहना और कफ जैसी समस्याएं बढ़ने लगी हैं। कई लोगों में ये लक्षण वायरल संक्रमण के कारण दिखाई देते हैं, जबकि कुछ लोगों को मौसम बदलने के साथ एलर्जी की समस्या बढ़ जाती है। संक्रमण और एलर्जी के लक्षण कई बार एक जैसे होने से लोग स्वयं दवा लेना शुरू कर देते हैं।
बुधवार को नईदुनिया हेलो डाॅक्टर कार्यक्रम में जीडी हास्पिटल के एमबीबीएस, एमडी मेडिसिन विजय पाटीदार ने पाठकों के सवालों के जवाब देते हुए बदलते मौसम में सावधानी, लक्षणों की पहचान और उपचार से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दी।
सर्दी-खांसी, बुखार, गले में खराश, वायरल संक्रमण, ऐसे में क्या करें क्या ना करें
सवाल और उनके जवाब
सवाल : सर्दी, खांसी और गले में खराश होने पर एलर्जी या संक्रमण का कैसे पता करें? — सौरभ ओझा, रतलाम
जवाब : एलर्जी और संक्रमण के लक्षण कुछ हद तक एक जैसे हो सकते हैं। एलर्जी में आमतौर पर बार-बार छींक आना, नाक में खुजली, पानी जैसा नाक बहना और आंखों में पानी आना जैसी समस्या अधिक होती है। वहीं वायरल संक्रमण में बुखार, शरीर में दर्द, गले में खराश, कमजोरी और खांसी जैसे लक्षण हो सकते हैं। तेज बुखार आता है, सांस लेने में परेशानी होती है या कमजोरी अधिक महसूस होती है तो चिकित्सक से जांच कराना चाहिए।
सवाल : मौसम बदलते ही मुझे खांसी और नाक बंद होने की समस्या होती है। क्या यह एलर्जी है? — अकरम शाह, रूनीजा
जवाब : मौसम में बदलाव, धूल, धुआं, परागकण और तापमान में उतार-चढ़ाव से एलर्जी के लक्षण बढ़ सकते हैं। यदि हर बार मौसम बदलने पर इसी तरह की परेशानी होती है और बुखार नहीं रहता तो एलर्जी की संभावना हो सकती है। धूल और धुएं से बचना, घर में साफ-सफाई रखना और पर्याप्त पानी पीना उपयोगी है।
सवाल : बच्चों को मौसम बदलने पर सर्दी-खांसी हो जाए तो घर पर क्या सावधानी रखें? — गोपाल सूर्यवंशी, असावती
जवाब : बच्चों को पर्याप्त आराम और तरल पदार्थ देना चाहिए। कमरे का वातावरण साफ रखें और धूल-धुएं से बचाएं। बिना चिकित्सकीय सलाह के एंटीबायोटिक या अन्य दवाएं नहीं देनी चाहिए। यदि बच्चे को तेज बुखार, सांस लेने में परेशानी, लगातार उल्टी, अत्यधिक सुस्ती या खाना-पीना कम हो जाए तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

सवाल : बुजुर्गों को संक्रमण से बचाने के लिए क्या सावधानी रखनी चाहिए? — जगदीश पाटीदार, रतलाम
जवाब : बुजुर्गों को तापमान में अचानक बदलाव से बचाना चाहिए। पर्याप्त नींद, संतुलित भोजन और पर्याप्त पानी लेना जरूरी है। भीड़भाड़ वाले स्थानों में संक्रमण से बचाव की सावधानी रखें। यदि पहले से कोई बीमारी है तो उसकी दवाएं नियमित लें और लक्षण बढ़ने पर चिकित्सक से संपर्क करें।
सवाल : कफ वाली खांसी होने पर क्या हर बार एंटीबायोटिक लेना जरूरी है? — दीपक परमार, समता परिसर
जवाब : नहीं। हर कफ वाली खांसी में एंटीबायोटिक की जरूरत नहीं होती। कई बार वायरल संक्रमण में भी कफ बन सकता है, जिसमें एंटीबायोटिक प्रभावी नहीं होती। बिना चिकित्सकीय सलाह के एंटीबायोटिक लेने से नुकसान हो सकता है और भविष्य में दवाओं के असर पर भी प्रभाव पड़ सकता है।