न खेत, न बड़ा बगीचा... सिर्फ छत पर खिल रहे हैं पोलैंड के फूल! जानिए राजनांदगांव की इस महिला ने छत पर कैसे बनाया बगीचा
छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव की रहने वाली नलीनी साहू ने कंक्रीट के शहरों में हरियाली बचाने की एक अनूठी मिसाल पेश की है। उन्होंने अपनी छत को 500 से अधिक गमलों वाले भव्य टैरेस गार्डन में तब्दील कर दिया है, जिसमें एडेनियम (डेजर्ट रोज) की 100 से अधिक किस्में, पोलैंड के दुर्लभ फूल और मियाजाकी आम, सफेद जामुन और आड़ू जैसे फलदार पौधे शामिल हैं।
Publish Date: Mon, 26 Oct 2026 03:03:10 PM (IST)Updated Date: Mon, 26 Oct 2026 03:03:10 PM (IST)

लाइफस्टाइल डेस्क। शहरीकरण की अंधी दौड़ में जहां कंक्रीट के मकानों के बीच बगीचों और खुली जमीन का दायरा सिमटता जा रहा है, वहीं छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव की नलीनी साहू ने पर्यावरण संरक्षण और बागवानी की एक अनोखी इबारत लिखी है। उन्होंने अपने घर की छत को ही एक सघन और विविधतापूर्ण 'प्राकृतिक उद्यान' (टैरेस गार्डन) में बदल दिया है।
वर्तमान में उनकी छत पर 500 से अधिक गमलों में देशी और दुर्लभ विदेशी प्रजातियों के आकर्षक फूल तथा फलदार पौधे लहलहा रहे हैं। यह बगिया केवल शौक भर नहीं, बल्कि यह साबित करती है कि हरियाली के लिए बड़े भूखंड की नहीं, बल्कि सही सोच, प्रकृति प्रेम और निरंतर देखभाल की आवश्यकता होती है।
दुर्लभ फूलों से लेकर महंगे विदेशी फलों तक का अनोखा संग्रह
नलीनी के टैरेस गार्डन में जैव-विविधता का अद्भुत संगम देखने को मिलता है-
- 100 से अधिक एडेनियम की किस्में: बगिया में 'डेजर्ट रोज' कहे जाने वाले एडेनियम की 100 से ज्यादा प्रजातियां मौजूद हैं, जिनमें 'एडेनियम अरेबिकम' प्रमुख आकर्षण का केंद्र है।
- विदेशी प्रजातियों के फूल: पोलैंड से लाई गई प्रजातियों के साथ-साथ कैलालीली और कई प्रकार के ट्रॉपिकल वैरायटी के मनमोहक फूल यहां खिलते हैं।
- गमलों में तैयार किए फलदार पेड़: आमतौर पर खेतों और बड़े बगीचों में उगने वाले फलों को उन्होंने गमलों में सफलतापूर्वक उगाया है। इनमें दुनिया का सबसे महंगा मियाजाकी आम, अल्फांसो आम, सफेद जामुन, मीठी इमली, ब्लैकबेरी और आड़ू जैसे फल शामिल हैं।
एक दशक पुराना शौक, जो बना मानसिक सुकून का जरिया
नलीनी साहू का बागवानी का यह सफर करीब 10 साल पूर्व शुरू हुआ था-
- शुरुआत में उन्होंने सामान्य शौक के तौर पर कुछ पौधे लगाए थे, जो धीरे-धीरे उनके दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बन गया।
- एक-एक पौधा जोड़ते हुए उन्होंने पूरी छत को एक प्राकृतिक पुष्प वाटिका का रूप दे दिया।
- नलीनी का मानना है कि शहरों में खुली जमीन की कमी के कारण छत और बालकनी का उपयोग बागवानी के लिए सबसे बेहतरीन विकल्प है। भागदौड़ भरी दिनचर्या के बीच पौधों की देखभाल करना उनके लिए मानसिक शांति और सुकून का सबसे बड़ा जरिया है।
50 से अधिक महिलाओं को जोड़कर शुरू किया 'हरित अभियान'
नलीनी साहू की यह सकारात्मक पहल अब उनके घर की दहलीज तक सीमित नहीं है-
- प्रेरणा और मार्गदर्शन: वे अब तक 50 से अधिक महिलाओं को अपने घरों की छत और बालकनी में बागवानी शुरू करने के लिए प्रेरित कर चुकी हैं।
- बागवानी के गुर: वे महिलाओं को गमलों के लिए मिट्टी तैयार करने, सही पौधों के चयन, जैविक खाद (Organic Fertilizer) के उपयोग, कीट नियंत्रण और मौसम के अनुसार पौधों के रखरखाव की विस्तृत तकनीकी जानकारी साझा करती हैं।
'ग्रीन लिविंग' और पर्यावरण संरक्षण का व्यावहारिक संदेश
आज के दौर में जब घरों में 'ग्रीन इंटीरियर' और 'ग्रीन एक्सटीरियर' की मांग बढ़ रही है, नलीनी का टैरेस गार्डन इसका सबसे सटीक और व्यावहारिक उदाहरण बनकर उभरा है। उनका यह प्रयास शहरी समाज को स्पष्ट संदेश देता है कि जगह का अभाव कभी भी प्रकृति से दूर होने का कारण नहीं बन सकता। छत, खिड़की या बालकनी में रखे कुछ गमलें भी हरियाली और स्वच्छ वातावरण की शुरुआत कर सकते हैं।
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