
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। चिप्स, कुरकुरे, बिस्कुट और ड्राईफ्रूट्स जैसे पैक्ड फूड खाते समय स्वाद के साथ पैकेट पर दी गई पोषण संबंधी जानकारी पढ़ना भी जरूरी है। खासकर नंबर आफ सर्व्स को अनदेखा करने से खाने की मात्रा और कैलोरी का आकलन गलत हो सकता है।
पैकेट पर कैलोरी और पोषक तत्वों की जानकारी अक्सर प्रति सर्विंग के आधार पर होती है, जबकि लोग एक बार में पूरा पैकेट खा लेते हैं। इससे वास्तविक खपत का अंदाजा नहीं लग पाता। बच्चों के खानपान में यह लापरवाही और भी अहम है।
खाद्य सुरक्षा अधिकारी राजेश कुमार गुप्ता ने नईदुनिया विमर्श में बताया कि नंबर ऑफ सर्व्स से पता चलता है कि पैकेट में निर्धारित सर्विंग साइज के अनुसार कितनी सर्विंग हैं।
सर्विंग साइज एक बार में खाए जाने वाले खाद्य पदार्थ की तय मात्रा है। उदाहरण के लिए, किसी पैकेट में पांच सर्विंग हों और एक सर्विंग में 100 कैलोरी हों, तो पूरा पैकेट खाने पर कुल 500 कैलोरी मिलेंगी।
इसलिए पैकेट खरीदते और खाते समय उसकी कुल मात्रा, सर्विंग साइज और पोषण संबंधी जानकारी देखें। उन्होंने कहा कि ग्वालियर में अनसेफ दूध नहीं है
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गुप्ता ने कहा कि बच्चों को पैक्ड स्नैक्स देने से पहले उनकी पोषण संबंधी जानकारी देखनी चाहिए। केवल स्वाद या विज्ञापन के आधार पर किसी खाद्य पदार्थ को सेहतमंद न मानें। ग्लूटेन गेहूं, जौ और राई जैसे अनाजों में पाया जाने वाला प्रोटीन है। यह अधिकांश लोगों के सामान्य आहार का हिस्सा हो सकता है, लेकिन सीलिएक रोग या ग्लूटेन से जुड़ी कुछ समस्याओं वाले लोगों को इससे परहेज करना पड़ता है। डायबिटीज के मरीजों के लिए भी ग्लूटेन पर सामान्य प्रतिबंध नहीं है। उन्हें कुल कार्बोहाइड्रेट, चीनी, फाइबर और भोजन की मात्रा पर ध्यान देना चाहिए।
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) की ईट राइट इंडिया पहल सुरक्षित, स्वस्थ और टिकाऊ भोजन को बढ़ावा देती है। इसके तीन स्तंभ हैं