आलस नहीं, आपका दिमाग है जिम्मेदार... जानिए बार-बार लेट होने का वैज्ञानिक कनेक्शन
Time Blindness: एक स्टडी के मुताबिक, इससे प्रभावित 70-80% लोग समय के मैनेजमेंट में गंभीर चूक करते हैं। ऐसे लोग किसी काम में लगने वाले वास्तविक समय को ...और पढ़ें
Publish Date: Thu, 15 Jan 2026 05:16:01 PM (IST)Updated Date: Thu, 15 Jan 2026 05:16:01 PM (IST)
क्या है बार-बार लेट होने का वैज्ञानिक कनेक्शन?HighLights
- हमेशा देर होने की आदत के पीछे हमारा दिमाग भी जिम्मेदार होता है
- 70-80% लोग समय के मैनेजमेंट में गंभीर चूक करते हैं
- लोग वास्तविक समय को अक्सर 30 से 40% कम आंकते हैं
लाइफस्टाइल डेस्क। अक्सर देर से पहुंचने वाले लोगों को हम गैर-जिम्मेदार या लापरवाह मान लेते हैं, लेकिन न्यूरोसाइंस की मानें तो इसके पीछे 'टाइम-ब्लाइंडनेस' (Time-Blindness) जैसा गंभीर वैज्ञानिक कारण हो सकता है। यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति का दिमाग समय की स्पीड और किसी काम में लगने वाले समय का सही आकलन करने में विफल रहता है।
क्या कहती है रिसर्च?
येल यूनिवर्सिटी और यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया की स्टडीज के अनुसार, अटेंशन डेफिसिट हाइपर एक्टिविटी डिसऑर्डर (ADHD) से ग्रस्त 70-80% लोग समय के मैनेजमेंट में गंभीर चूक करते हैं। ऐसे लोग किसी काम में लगने वाले वास्तविक समय को अक्सर 30 से 40% कम आंकते हैं। उनके लिए समय एक सीधी रेखा न होकर बिखरे हुए टुकड़ों जैसा होता है, जिससे डेडलाइन और अलार्म का असर कम हो जाता है।
इसके अलावा भीड़ में असहज महसूस करने वाले लोग जल्दी पहुंचकर होने वाली घबराहट से बचने के लिए जानबूझकर देरी करते हैं। साथ ही लगातार नोटिफिकेशन और मल्टीटास्किंग हमारे दिमाग की समय पहचानने की क्षमता को कमजोर कर रहे हैं। इसके अलावा कुछ लोग अनजाने में अपने समय को दूसरों से अधिक मूल्यवान समझने लगते हैं।
इन तरीकों से सुधार सकते हैं आदत
डिजिटल के बजाय सूइयों वाली घड़ी पहनें, जो समय बीतने का दृश्य अहसास कराती है।
बड़े कामों को छोटे चरणों में बांटें और हर चरण के लिए समय तय करें।
फोन के बजाय कागजी चेकलिस्ट का उपयोग करें।
बार-बार फोन देखने से बचें और केवल जरूरी अलार्म का ही उपयोग करें।
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निष्कर्ष- बार-बार देर करना हमेशा आलस्य नहीं होता, यह दिमाग के काम करने का एक अलग तरीका हो सकता है जिसे सही आदतों से सुधारा जा सकता है।