प्रग्नेंसी के दौरान Strength Training कर रहीं सामंथा, लेकिन क्या आपके लिए यह करना सेफ? किन बातों का ध्यान रखना जरूरी
सामंथा रुथ प्रभु प्रेग्नेंसी के दौरान स्ट्रेंथ ट्रेनिंग को लेकर चर्चा में हैं। जानिए गर्भावस्था में वजन उठाना कितना सुरक्षित है। इसके क्या फायदे हैं और किन सावधानियों का ध्यान रखना जरूरी है।
By Akriti KumariEdited By: Akriti Kumari
Publish Date: Fri, 28 Aug 2026 02:20:54 PM (IST)Updated Date: Fri, 28 Aug 2026 02:20:54 PM (IST)
सामंथा रुथ प्रभु प्रेग्नेंसी में कर रहीं स्ट्रेंथ ट्रेनिंग। (सोर्स- सेशल मीडिया)HighLights
- सामंथा रुथ प्रभु एक्सपर्ट्स की सलाह पर स्ट्रेंथ ट्रेनिंग कर रहीं
- सही तकनीक से वर्कआउट करने से बैक पेन में राहत मिलती है
- प्रेग्नेंसी में भारी वजन उठाने की रूटीन को बिना सलाह कॉपी न करें
मनोरंजन डेस्क, नई दिल्ली। सामंथा रुथ प्रभु इन दिनों अपनी प्रेग्नेंसी को लेकर चर्चा में हैं। हाल ही में उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी स्ट्रेंथ ट्रेनिंग की झलक दिखाई। उन्होंने बताया कि प्रेग्नेंसी के दौरान उनकी ट्रेनिंग अब पहले से अलग है और वह अपने शरीर की जरूरतों को ध्यान में रखकर एक्सरसाइज कर रही हैं। सामंथा के मुताबिक, वह डॉक्टर की सलाह और प्री-नेटल ट्रेनिंग में सर्टिफाइड ट्रेनर की निगरानी में वर्कआउट कर रही हैं।
लेकिन एक्ट्रेस की पोस्ट देखकर अगर आपके मन में भी सवाल आया है कि क्या प्रेग्नेंसी के दौरान वजन उठाना सुरक्षित है? तो इसका जवाब है- कई महिलाओं के लिए हां, लेकिन कुछ जरूरी सावधानियों के साथ।
प्रेग्नेंसी में Strength Training के क्या फायदे हैं?
प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर में तेजी से बदलाव होते हैं। सही तरीके से की गई स्ट्रेंथ ट्रेनिंग शरीर को इन बदलावों के लिए तैयार करने में मदद कर सकती है।
- मसल्स मजबूत रखने में मदद- बढ़ते वजन और बदलते बॉडी शेप के बीच मजबूत मसल्स शरीर को बेहतर सपोर्ट देती हैं।
- कमर और शरीर के दर्द में राहत- कोर और बैक मसल्स को मजबूत करने से कमर, पेल्विक एरिया और पैरों से जुड़े दर्द को कम करने में मदद मिल सकती है।
- Stamina बेहतर हो सकता है- नियमित और नियंत्रित एक्सरसाइज रोजमर्रा के कामों के लिए endurance बनाए रखने में मदद कर सकती है।
- Gestational Diabetes का खतरा कम करने में मदद- नियमित physical activity ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में मदद कर सकती है।
- Mood बेहतर रहता है- एक्सरसाइज तनाव और बेचैनी को कम करने और मूड बेहतर करने में मदद कर सकती है।
लेकिन प्रेग्नेंसी में वेट लिफ्टिंग का मतलब Heavy Lifting नहीं
यह समझना जरूरी है कि प्रेग्नेंसी के दौरान strength training का मकसद भारी वजन उठाकर अपनी लिमिट टेस्ट करना नहीं है। इस दौरान एक्सरसाइज को शरीर में होने वाले बदलावों के हिसाब से बदलाव करना पड़ता है।
जो महिला प्रेग्नेंसी से पहले से स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करती रही है, उसकी रूटीन और किसी पहली बार एक्सरसाइज शुरू करने वाली महिला की रूटीन एक जैसी नहीं होगी। इसलिए हर प्रेग्नेंसी के लिए एक ही वर्कआउट सही नहीं माना जा सकता।
किन बातों का रखें ध्यान?
- एक्सरसाइज शुरू करने या जारी रखने से पहले डॉक्टर से सलाह लें।
- ऐसा वजन चुनें जिसे आराम से और सही technique के साथ उठाया जा सके।
- शरीर में दर्द, चक्कर, असामान्य सांस फूलना या कोई परेशानी महसूस हो तो तुरंत रुकें।
- गिरने या पेट पर चोट लगने वाली एक्सरसाइज से बचें।
- पर्याप्त पानी पीते रहें।
- प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर में बदलाव के साथ वर्कआउट भी बदलाव करें।
- संभव हो तो ऐसे ट्रेनर की मदद लें जिसे फिटनेस की जानकारी हो।
- पहली तिमाही के बाद लंबे समय तक पीठ के बल लेटकर की जाने वाली कुछ एक्सरसाइज से बचने की सलाह दी जाती है।
सबसे जरूरी बात
सामंथा रुथ प्रभु की तरह किसी celebrity को देखकर उनकी पूरी वर्कआउट रूटीन को कॉपी करना सही नहीं है। प्रेग्नेंसी में एक्सरसाइज का फायदा तभी है जब वह आपकी प्रेग्नेंसी, हेल्थ और डॉक्टर की सलाह के मुताबिक हो।
यानी प्रेग्नेंसी में strength training पूरी तरह मना नहीं है, लेकिन इसका तरीका और intensity हर महिला के लिए अलग हो सकती है। मकसद इस दौरान शरीर को मजबूत और स्वस्थ रखना होना चाहिए, न कि अपनी फिटनेस की पुरानी लिमिट्स को चुनौती देना।
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