
लाइफस्टाइल डेस्क। तकनीक हमारे जीवन का अहम हिस्सा बन गई है। इसने हमारे लिए सुविधाएं बढ़ाई हैं, लेकिन शारीरिक सक्रियता कम कर दी है। घंटों मोबाइल और लैपटॉप पर बैठना, लगातार ड्राइविंग, गलत पोश्चर, अनियमित खान-पान, नींद की कमी और तनाव अब आम दिनचर्या का हिस्सा बन चुके हैं।
इसी वजह से गर्दन, कमर, कंधे और घुटनों का दर्द केवल बढ़ती उम्र की समस्या नहीं रहीं, बल्कि युवाओं में भी तेजी से बढ़ रही है। लंबे समय तक बैठे रहने से मांसपेशियों की ताकत और लचीलापन प्रभावित हो सकता है, जबकि गलत पोश्चर गर्दन और कमर पर अतिरिक्त दबाव डालता है।
बढ़ती उम्र के साथ भी सेहतमंद बने रहना बेहद अहम है। इसके लिए सही दिनचर्या का पालन जरूरी है। नियमित शारीरिक गतिविधि जिसमें वॉकिंग, जॉगिंग, साइकिलिंग या कोई पसंदीदा आउटडोर एक्टिविटी शामिल की जा सकती है।
स्ट्रेंथ ट्रेनिंग को भी दिनचर्या का हिस्सा बनाना चाहिए। आप अगर लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहते हैं तो कई शारीरिक समस्याएं पैदा हो सकती हैं। इसीलिए का के बीच में उठकर थोड़ा चलना या हल्की स्ट्रेचिंग करना फायदेमंद रहेगा। अच्छी सेहत का राज़ संतुलित भोजन और पर्याप्त नींद में छिपा हुआ है।

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इसका खास ध्यान रखना चाहिए। मेडिटेशन, ब्रीथ एक्सरसाइज़ की मदद से तनाव को नियंत्रित किया जा सकता है। इन सबसे बीच फिजियोथेरेपिस्ट की भूमिका भी महत्वपूूर्ण हो जाती है।
फिजियोथेरेपिस्ट व्यक्ति के पोश्चर, मांसपेशियों की क्षमता, लचीलापन, मूवमेंट पैटर्न और रोजाना की गतिविधियों का आंकलन कर यह पता लगा सकता है कि भविष्य में शरीर के किस हिस्से में समस्या होने का जोखिम है।
ऐसे में हमें अपनी उम्र बढ़ने का इंतजार नहीं करना चाहिए कि बल्कि कम उम्र से ही सेहत पर खास ध्यान देना चाहिए।
(डॉ. प्रीति मानधन्या (सोमानी) - फिजियोथेरेपी विशेषज्ञ)