
लाइफस्टाइल डेस्क। दीवाली का त्योहार आते ही सोशल मीडिया रंग-बिरंगी तस्वीरों और वीडियो से भर जाता है। कहीं दोस्तों की शानदार पार्टी, कहीं डिजाइनर कपड़ों में फेस्टिव फोटोशूट, तो कहीं खूबसूरत घर की सजावट और महंगे गिफ्ट्स दिखाई देते हैं। इन तस्वीरों को देखकर जहां कुछ लोगों को खुशी मिलती है, वहीं कुछ लोग अपनी जिंदगी की तुलना दूसरों से करने लगते हैं। उन्हें लगने लगता है कि उनकी दीवाली इतनी खास नहीं है या वे त्योहार को दूसरों की तरह एंजॉय नहीं कर पा रहे हैं। सवाल है कि दूसरों की परफेक्ट दीवाली देखकर क्या सच में अपनी खुशी कम होने लगती है?
सोशल मीडिया पर लोग आमतौर पर अपनी जिंदगी के खास और खूबसूरत पल शेयर करते हैं। दीवाली पर नई ड्रेस, घर की सजावट, दोस्तों के साथ पार्टी और परिवार के साथ बिताए अच्छे पलों की तस्वीरें ज्यादा दिखाई देती हैं। लेकिन इन तस्वीरों में अक्सर रोजमर्रा की परेशानियां, थकान, अकेलापन या त्योहार की तैयारियों में होने वाली भागदौड़ नजर नहीं आती।
जब कोई व्यक्ति लगातार दूसरों के ऐसे पल देखता है, तो उसे लग सकता है कि बाकी सभी लोग उससे ज्यादा खुश हैं। मनोविज्ञान में इसे सोशल कंपैरिजन यानी सामाजिक तुलना कहा जाता है। इसमें व्यक्ति अपनी जिंदगी, उपलब्धियों या अनुभवों को दूसरों के साथ तुलना करके देखता है।
यह तुलना हमेशा नुकसानदायक नहीं होती। कभी-कभी इससे प्रेरणा भी मिलती है, लेकिन जब व्यक्ति अपनी खुशी और जिंदगी की गुणवत्ता को दूसरों की तस्वीरों से आंकने लगता है, तो असंतोष बढ़ सकता है।
FOMO यानी Fear of Missing Out का मतलब है किसी खास अनुभव या मौके से पीछे छूट जाने का डर। दीवाली के दौरान दोस्तों की पार्टियां, घूमने की तस्वीरें और फेस्टिव सेलिब्रेशन देखकर कुछ युवाओं को लग सकता है कि वे कुछ खास मिस कर रहे हैं।
उदाहरण के लिए, कोई युवा घर पर परिवार के साथ साधारण तरीके से दीवाली मना रहा है। सोशल मीडिया पर दोस्तों की पार्टी और शानदार सजावट देखकर उसे अपना सेलिब्रेशन कम खास लगने लगता है। जबकि संभव है कि वह अपने परिवार के साथ अच्छा समय बिता रहा हो, लेकिन दूसरों की तस्वीरों से तुलना करने के कारण उसे अपनी खुशी कम महसूस होने लगे।
इसके साथ ही त्योहार पर अच्छा दिखने, नई ड्रेस खरीदने, घर सजाने और शानदार तस्वीरें पोस्ट करने का दबाव भी महसूस हो सकता है। ऐसे में त्योहार का आनंद लेने के बजाय व्यक्ति इस बात को लेकर ज्यादा सोचने लगता है कि उसकी दीवाली दूसरों को कैसी दिखाई देगी।
सोशल मीडिया पूरी तरह छोड़ना जरूरी नहीं है, लेकिन इसका इस्तेमाल करने के तरीके में बदलाव मददगार हो सकता है। अगर दूसरों की तस्वीरें देखने के बाद बार-बार अपनी जिंदगी को लेकर निराशा महसूस होती है, तो कुछ समय के लिए स्क्रीन से दूरी बनाना अच्छा विकल्प हो सकता है।
इसके अलावा, दीवाली मनाने के लिए महंगी शॉपिंग या बड़ी पार्टी जरूरी नहीं है। परिवार के साथ खाना बनाना, घर में दीये जलाना, दोस्तों से बातचीत करना या अपनी पसंद की कोई छोटी गतिविधि करना भी त्योहार को खास बना सकता है।
अपनी खुशी को सोशल मीडिया पर मिलने वाले लाइक्स और कमेंट्स से जोड़ने के बजाय यह देखना ज्यादा जरूरी है कि आप खुद कैसा महसूस कर रहे हैं। हर व्यक्ति की आर्थिक स्थिति, पारिवारिक परिस्थितियां और त्योहार मनाने का तरीका अलग होता है।
दीवाली की खूबसूरती इस बात में नहीं है कि आपका सेलिब्रेशन दूसरों की तस्वीरों जितना शानदार दिखता है या नहीं। असली बात यह है कि आप अपने समय और रिश्तों का कितना आनंद ले पा रहे हैं। सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाली तस्वीरें किसी की जिंदगी का सिर्फ एक हिस्सा होती हैं, पूरी कहानी नहीं।
यह भी पढ़ें- Buy Now, Pay Later से फेस्टिव शॉपिंग कर रहे GenZ, क्या यह ऑफर के चक्कर में कर्ज का जाल है?