
लाइफस्टाइल डेस्क। किसी का इंतजार क्यों करना, जब खुद के साथ भी अच्छा वक्त बिताया जा सकता है? भोपाल की किसी कॉफी शॉप में अकेले बैठकर किताब पढ़ना, इंदौर में अपनी पसंद का खाना खाना, सिनेमा हॉल में अकेले फिल्म देखना या वीकेंड पर खुद के साथ घूमने निकल जाना। अब युवाओं के लिए ये सिर्फ मजबूरी में किए जाने वाले काम नहीं, बल्कि अपनी पसंद से चुने गए अनुभव बन रहे हैं। इसी सोच को आजकल Solo Date कहा जा रहा है।
मध्य प्रदेश के भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर जैसे शहरों में भी इस विषय को युवा लाइफस्टाइल के बदलते नजरिए से समझा जा सकता है। हालांकि, राज्य में Solo Date करने वाले युवाओं की संख्या बताने वाला कोई आधिकारिक सर्वे उपलब्ध नहीं है, लेकिन राष्ट्रीय स्तर के आंकड़े इस बदलती सोच की ओर इशारा करते हैं।
Booking.com की ओर से जारी 2025 के ट्रैवल ट्रेंड्स से जुड़े आंकड़ों के मुताबिक, भारत के 68% Gen Z युवा अकेले यात्रा करने की योजना बना रहे हैं। इसका प्रमुख उद्देश्य आराम करना और खुद को तरोताजा महसूस करना है। वहीं, 66% Gen Z यात्रियों ने यात्रा की जगह चुनते समय सुरक्षा को अहम माना। यह सर्वे बताता है कि युवा अब अपने अनुभवों और निजी पसंद को भी महत्व दे रहे हैं। हालांकि, ये आंकड़े Solo Travel के हैं, Solo Date के सीधे आंकड़े नहीं।
दूसरी ओर, Match Group-Ipsos के सितंबर 2026 में जारी Human Connection Survey में 18 से 45 वर्ष के 1,000 भारतीय सिंगल्स को शामिल किया गया। सर्वे के मुताबिक, 35% सिंगल्स अक्सर या हमेशा अकेलापन महसूस करते हैं, जबकि 70% नए सामाजिक संबंध बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इसके अलावा, 72% लोगों ने कम लेकिन गहरे रिश्तों को प्राथमिकता दी। इससे पता चलता है कि अकेले समय बिताने की इच्छा और दूसरों से जुड़ने की जरूरत, दोनों एक साथ मौजूद हो सकती हैं।
इस ट्रेंड के पीछे सबसे बड़ी वजह अपनी पसंद और समय पर नियंत्रण की इच्छा है। दोस्तों के साथ बाहर जाने पर जगह, बजट और समय को लेकर सहमति बनानी पड़ती है। लेकिन अकेले जाने पर युवा अपनी पसंद से कैफे चुन सकते हैं, अपनी पसंद की फिल्म देख सकते हैं और बिना किसी जल्दबाजी के समय बिता सकते हैं।
मनोवैज्ञानिक नजरिए से देखें तो खुद के साथ समय बिताना आत्म-जागरूकता और अपनी जरूरतों को समझने का अवसर हो सकता है। इससे व्यक्ति अपनी पसंद, भावनाओं और रुचियों पर ध्यान दे पाता है। हालांकि, अकेले समय बिताना और सामाजिक रूप से कट जाना दो अलग बातें हैं। अगर कोई व्यक्ति लगातार लोगों से दूरी बनाने लगे या अकेलेपन से परेशान रहने लगे, तो इसे सिर्फ Solo Date का ट्रेंड मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
Solo Date का मतलब किसी पार्टनर के बिना रोमांटिक डेट पर जाना नहीं, बल्कि खुद को प्राथमिकता देना है। कोई युवा अकेले रेस्तरां में खाना खा सकता है, म्यूजियम घूम सकता है, शॉपिंग कर सकता है या पार्क में बैठकर अपनी पसंद की किताब पढ़ सकता है।
Aisle की 2025 की रिपोर्ट ‘The Commitment Decade’ में 3,400 शहरी भारतीय सिंगल्स को शामिल किया गया था। इनमें 24% प्रतिभागी टियर-2 और टियर-3 शहरों से थे। रिपोर्ट में डेटिंग और रिश्तों को लेकर बदलती प्राथमिकताओं का अध्ययन किया गया। यह मध्य प्रदेश के लिए कोई राज्य-विशेष आंकड़ा नहीं है, लेकिन छोटे शहरों में भी सिंगल युवाओं की बदलती पसंद को समझने के लिए एक उपयोगी संदर्भ है।
आखिरकार, Solo Date का असली मतलब अकेले रहना नहीं, बल्कि अपने साथ सहज होना है। जरूरी नहीं कि हर अच्छी याद बनाने के लिए साथ में कोई दूसरा व्यक्ति हो। कभी-कभी अपनी पसंद की कॉफी, एक अच्छी किताब और खुद के साथ बिताया गया एक घंटा भी दिन को खास बना सकता है।
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