दिन में तेज धूप है शाम को हल्की ठंड, देर रात तक घूमने वाले संभल जाएं, सेहत पर पड़ेगा बुरा असर
गले में खराश, सर्दी-जुकाम, नाक बंद होने, सिर में भारीपन और हल्की हरारत जैसी शिकायतें सामने आ रही हैं। छोटे बच्चों में गले में दर्द के साथ कान में दर्द...और पढ़ें
Publish Date: Sat, 17 Oct 2026 01:22:44 PM (IST)Updated Date: Sat, 17 Oct 2026 01:22:44 PM (IST)
बदलते मौसम का सेहत पर असर।HighLights
- छोटे बच्चों में गले में दर्द के साथ कान में दर्द की समस्या भी देखी जा रही है।
- बच्चों में सर्दी-जुकाम के साथ कान में दर्द होने पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।
- ऐसे में बदलते मौसम के दौरान थोड़ी सी लापरवाही परेशानी बढ़ा सकती है।
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। शहर के मौसम में कुछ दिनों से बदलाव महसूस होने लगा है। दिन में धूप और रात में हल्की ठंडक के बीच देर रात तक घूमने निकलने वाले लोगों की सेहत पर इसका असर दिखने लगा है।
गले में खराश, सर्दी-जुकाम, नाक बंद होने, सिर में भारीपन और हल्की हरारत जैसी शिकायतें सामने आ रही हैं। छोटे बच्चों में गले में दर्द के साथ कान में दर्द की समस्या भी देखी जा रही है।
ऐसे में बदलते मौसम के दौरान थोड़ी सी लापरवाही परेशानी बढ़ा सकती है। नाक, कान एवं गला रोग विशेषज्ञ कविता सचदेवा के अनुसार, मौसम में उतार-चढ़ाव के दौरान वायरल संक्रमण और एलर्जी से जुड़ी शिकायतें बढ़ सकती हैं।
धूल, धुआं, प्रदूषण और ठंडी हवा के संपर्क में आने से संवेदनशील लोगों को अधिक परेशानी होती है। नाक बहना, बार-बार छींक आना, गले में सूजन, निगलने में दर्द और कभी-कभी टांसिल में सूजन जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं। बच्चों में सर्दी-जुकाम के साथ कान में दर्द होने पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।
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ठंडी हवा से बचें, लेकिन संक्रमण को न समझें मामूली
- रात में तापमान गिरने के दौरान अब पंखे या एसी की सीधी हवा से बचना चाहिए।
- हालांकि, सर्दी-जुकाम और गले के संक्रमण का कारण केवल ठंडी हवा नहीं है।
- बल्कि वायरस, एलर्जी और अन्य संक्रमण भी इसकी वजह हो सकते हैं।
- इसलिए लक्षणों को नजरअंदाज करने के बजाय समय पर देखभाल करना जरूरी है।
- देर रात बाहर निकलते समय मौसम के अनुसार कपड़े पहनें और बच्चों की सुरक्षा को सावधानी रखें।
गरारे, पर्याप्त पानी और संतुलित आहार से मिलेगी राहत
- गले में हल्की खराश होने पर गुनगुने नमक-पानी से दिन में दो से तीन बार गरारे किए जा सकते हैं।
- पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं और आराम करें।
- अदरक की चाय आराम दे सकती है, लेकिन इन्हें संक्रमण का इलाज न समझें।
- नियमित और संतुलित भोजन, पर्याप्त नींद और हाथों की साफ-सफाई भी जरूरी है।
- धूल-धुएं और प्रदूषित स्थानों से बचें।
- नाक बंद होने पर सलाइन नेजल स्प्रे उपयोगी हो सकता है।
- भाप लेते समय गर्म पानी से जलने का खतरा रहता है, इसलिए विशेषकर बच्चों के मामले में सावधानी बरतें।
बच्चों के कान दर्द को न करें नजरअंदाज
- बच्चों में सर्दी-जुकाम के बाद कान में संक्रमण व दबाव के कारण दर्द हो सकता है।
- कान में तेल, ईयरबड या बिना चिकित्सकीय सलाह के कोई दवा न डालें।
- तेज बुखार, सांस लेने में परेशानी, निगलने में कठिनाई, कान से पानी व मवाद निकलने और लगातार बढ़ते दर्द की स्थिति में डाक्टर से संपर्क करें।
- लक्षण बने रहने एवं बार-बार लौटने पर ईएनटी विशेषज्ञ से जांच कराना जरूरी है।
- जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है, उनके माैसम परिवर्तन पर जल्दी बीमार पड़ने की आशंका रहती है। इसलिए स्वस्थ्य दिनचर्या एवं संतुलित आहार आवश्यक है।