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थैलेसीमिया और हीमोफीलिया दोनों ही बीमारियां मां-बाप से बच्‍चों को मिलती हैं, क्‍या है स्‍थायी इलाज

थैलेसीमिया और हीमोफीलिया से पीड़ित बच्चों के माता-पिता के लिए सही देखभाल, नियमित उपचार और सकारात्मक सोच से बच्चों का जीवन बेहतर बनाया जा सकता है। थैले...और पढ़ें

By Alok BanerjeeEdited By: Navodit Saktawat
Publish Date: Thu, 10 Sep 2026 02:56:59 PM (IST)Updated Date: Thu, 10 Sep 2026 03:08:38 PM (IST)
थैलेसीमिया और हीमोफीलिया दोनों ही बीमारियां मां-बाप से बच्‍चों को मिलती हैं, क्‍या है स्‍थायी इलाज
थैलेसीमिया और हीमोफीलिया रोग।

HighLights

  1. थैलेसीमिया-हीमोफीलिया में सही देखभाल, नियमित उपचार
  2. सकारात्मक सोच से बच्चों का जीवन बेहतर बनाना संभव
  3. शिशु रोग विशेषज्ञ केके वर्मा ने पाठकों से जानकारी की साझा

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। थैलेसीमिया और हीमोफीलिया दोनों ही आनुवंशिक यानी माता-पिता से बच्चों में, जीन के जरिए फैलने वाली रक्त से जुड़ी बीमारियां हैं। थैलेसीमिया हीमोग्लोबिन बनाने वाले जींस में म्यूटेशन या खराबी के कारण होती है। जबकि हीमोफीलिया रक्त का थक्का जमाने वाले प्रोटीनों—खासतौर पर फैक्टर 8 या 9—की कमी या अनुपस्थिति के कारण होती है।

थैलेसीमिया और हीमोफीलिया से पीड़ित बच्चों के माता-पिता के लिए सही देखभाल, नियमित उपचार और सकारात्मक सोच से बच्चों का जीवन बेहतर बनाया जा सकता है। थैलेसीमिया मेजर से पीड़ित बच्चों को हर 2 से 4 सप्ताह में डॉक्टर की सलाह पर सुरक्षित रक्त चढ़ाने की आवश्यकता होती है।


बार-बार रक्त चढ़ाने से शरीर में आयरन की मात्रा बढ़ सकती है, जिसे नियंत्रित करने के लिए दवाइयां दी जाती हैं। योग्य बच्चों के लिए कम उम्र में बोन मैरो या स्टेम सेल ट्रांसप्लांट इस बीमारी का स्थायी इलाज साबित हो सकता है। माता-पिता तनाव न लें, बल्कि मरीज सहायता समूहों से जुड़कर अन्य परिवारों के अनुभवों से सीख लें।

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बेहतर डाइट प्लान करें बच्चा स्वस्थ रहेगा, साथ ही उसे एक्टिव रखें। यह बात बुधवार को नईदुनिया के हेलो डाक्टर कार्यक्रम में जिला अस्पताल विक्टोरिया के शिशु रोग विशेषज्ञ डाॅक्टर केके वर्मा ने पाठकों से जानकारी साझा करते हुए कही।

-- थैलेसीमिया हो गया तो जीवनभर रहेगा, लेकिन इसे लेकर चिंतित बिल्कुल न हों --

naidunia_image

सवाल : डाॅक्टर साहब मैं जानना चाहता हूं कि थैलेसीमिया से बचाव संभव है क्या और यदि होगा गया तो क्या ठीक हो सकता है।

प्रशांत पांडे, जबलपुर

जवाब : एक बार यह जान लीजिए जो कि कटु सत्य है कि थैलेसीमिया जेनेटिक यानी माता-पिता से बच्चों में, जीन के जरिए फैलने वाली रक्त से जुड़ी बीमारियां है। एक बार हो गई तो यह जीवनभर साथ चलेगी, लेकिन इसे लेकर चिंतित होने की बिल्कुल जरूरत नहीं। उपचार व अच्छी डाइट सेहत के लिए श्रेष्ठतम है। प्रोटीनरिच डाइट बच्चे को दें, आंवला, मैंगो, अमरूद फायदेमंद। यह एक्टिव रखने में मददगार है।

सवाल : थैलेसीमिया और हीमोफीलिया से पीड़ित बच्चों के लिए क्या कोई विशेष उपचार सुविधा होती है क्या, इनका खानपान कैसा होना चाहिए।

किशाेर बेन, दमोह

जवाब : इसमें प्रत्येक माह पालक को बच्चे के लिए ब्लड का इंतजाम रखना होता है। चिकित्सक अपनी ड्यूटी तो करते ही हैं, स्वास्थ्य सेवा प्रदाता आमतौर पर बचपन में ही मध्यम और गंभीर थैलेसीमिया का निदान करते हैं। इसके लक्षण अक्सर बच्चे की 2 साल की उम्र तक दिखाई देने लगते हैं। खानपान कोई विशेष नहीं हां लेकिन अच्छा आहार सेहत के लिए अतिउत्तम होता है।

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सवाल : थैलेसीमिया से बचाव के लिए क्या इसकी पहचान पहले संभव है क्या, कृपया मार्गदर्शन करें।

अजय चौहान, जबलपुर

जवाब : निश्चित रूप से गर्भवती महिला के शुरूआती तीन माह में जांच से यह पता लगाना आसान हो जाता है कि आने वाले बच्चे की सेहत कैसी होगी।

सवाल : साहब मैं यह जानना चाहूंगा कि मेरा बच्चा पिछले कुछ समय से चिड़चिड़ा और एक्टिव कम रहने लगा है। कोई विशेष चिंता की बात तो नहीं।

विनोद वाजपेयी, कटनी

जवाब : बच्चे के स्वभाव में आ रहे अचानक बदलाव को लेकर आप चिंतित हैं। परेशान न हों, एचपीएलसी जांच कराएं उससे विकार का पता लगाना आसान होगा।