
लाइफस्टाइल डेस्क। न्यूरोपैथी तंत्रिका तंत्र से जुड़ी एक गंभीर और आम समस्या है, जिसमें मुख्य रूप से हाथ और पैरों की नसों में सूजन, क्षति या दबाव के कारण सुन्नपन, झनझनाहट, चुभन और असहनीय दर्द महसूस होता है। इस समस्या का सबसे प्रमुख कारण अनियंत्रित डायबिटीज है, इसलिए नियमित रूप से ब्लड शुगर की जांच कराना बेहद जरूरी है।
इसके अलावा महिलाओं में थायराइड विकार भी न्यूरोपैथी को ट्रिगर कर सकता है। आजकल डेस्क जॉब, लंबे समय तक कंप्यूटर के सामने गलत पोस्चर में बैठने और कलाई एवं कोहनी पर लगातार दबाव पड़ने से युवाओं में भी नसों की बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं।

कम उम्र में इसका मुख्य कारण विटामिन बी 12 की भारी कमी, असंतुलित खान-पान, खराब लाइफस्टाइल और शराब एवं धूम्रपान की लत है। हालांकि समय रहते संतुलित आहार और चिकित्सकीय परामर्श से विटामिन बी 12 की पूर्ति कर इसे रिवर्स किया जा सकता है।
मध्यम उम्र के लोगों में रात को सोते समय पैरों में अत्यधिक बेचैनी और खिंचाव की शिकायत देखी जाती है, जिसे ''रेस्टलेस लेग्स सिंड्रोम'' कहते हैं, जिससे नींद बाधित होती है।
Paralysis Sign: कम उम्र में लोग होने लगे लकवे का शिकार, लक्षण पहचानकर समय पर करवाएं उपचार

वहीं बुजुर्गों में उम्र बढ़ने के साथ रीढ़ और कमर की हड्डियों में घिसाव होने से नसें दबने लगती हैं, जिसे मेडिकल भाषा में ''रेडिकुलोपैथी'' कहा जाता है। नसों की कार्यप्रणाली और क्षति की सटीक पहचान के लिए ''नर्व कंडक्शन स्टडी'' टेस्ट कराया जाता है।
इसके बचाव और प्रबंधन के लिए ब्लड प्रेशर व शुगर को पूरी तरह नियंत्रित रखना, सादा व पौष्टिक भोजन लेना और अल्कोहल से दूर रहना आवश्यक है। नियमित रूप से स्ट्रेचिंग, कंधे, हाथ और पैरों का व्यायाम करें एवं पंजों और एड़ियों के बल चलने का अभ्यास नसों में रक्त प्रवाह को बेहतर बनाता है।
इसके साथ ही अचानक भारी वजन उठाने से बचना चाहिए और बिस्तर से झटके से उठने के बजाय हमेशा पहले करवट लेकर, हाथ का सहारा देकर बैठना और फिर धीरे से उठना चाहिए।
(Dr ओम प्रकाश लेखरा, न्यूरोलॉजिस्ट)
