
लाइफस्टाइल डेस्क। क्या आप भी इस धारणा में जीते हैं कि रोजाना एक छोटा पेग या वीकेंड पर रेड वाइन पीना सेहत को नुकसान नहीं पहुंचाता? अगर हां, तो आपको अपनी इस सोच को तुरंत बदलने की जरूरत है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) यह साफ कर चुका है कि शराब (Alcohol) की कोई भी मात्रा सुरक्षित नहीं है। इसकी मामूली घूंट भी शरीर के भीतर गंभीर बीमारियों के बीज बो सकती है।
चिकित्सकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, शराब छोड़ने का फैसला सिर्फ आपकी लाइफस्टाइल में बदलाव नहीं, बल्कि आपके शरीर को मिलने वाला एक 'पुनर्जन्म' है। आइए जानते हैं कि जब आप पूरी तरह शराब से दूरी बना लेते हैं, तो आपके शरीर के भीतर कौन से चमत्कारी और सकारात्मक बदलाव (Benefits of Quitting Alcohol) होने शुरू होते हैं:
शरीर के भीतर पहुंचने के बाद शराब एक धीमे जहर की तरह काम करती है। लिवर का मुख्य काम शरीर से टॉक्सिन्स (जहरीले तत्वों) को फिल्टर करना है, लेकिन लगातार शराब मिलने से इसकी कोशिकाएं डैमेज होने लगती हैं, जो आगे चलकर फैटी लिवर और लिवर सिरोसिस जैसी जानलेवा बीमारियों का रूप ले लेती हैं।
शराब में केवल 'एम्प्टी कैलोरीज' (ऐसी कैलोरी जिससे कोई पोषण नहीं मिलता) होती हैं, जो सीधे मोटापे को बढ़ाती हैं। इसके अलावा, अल्कोहल दिमाग के उस हिस्से को उत्तेजित करता है जो भूख को नियंत्रित करता है। यही वजह है कि शराब पीने के बाद लोग भारी मात्रा में तला-भुना, चखना या जंक फूड (Overeating) खा जाते हैं।
अध्ययनों में यह साबित हो चुका है कि अल्कोहल एक प्रमाणित कार्सिनोजेन (कैंसर पैदा करने वाला तत्व) है। नियमित शराब के सेवन से फूड पाइप (भोजन नली), मुंह, गले, लिवर और महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। शराब छोड़ने के कुछ ही हफ्तों के भीतर शरीर में कैंसर कोशिकाओं के पनपने की आशंका न्यूनतम स्तर पर आ जाती है।
अक्सर लोग मानते हैं कि रात में एक पेग लगाने से नींद अच्छी आती है, लेकिन मेडिकल साइंस इसे पूरी तरह खारिज करता है। शराब पीने के बाद शरीर गहरी नींद (REM Sleep) के चक्र में प्रवेश नहीं कर पाता, जिससे नींद बार-बार टूटती है और सुबह उठने पर सिरदर्द व थकान महसूस होती है।
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रेड वाइन को दिल के लिए अच्छा बताने वाली तमाम थ्योरीज को डॉक्टर्स ने कोरी अफवाह करार दिया है। हकीकत यह है कि शराब छोड़ने से आपका ब्लड प्रेशर (रक्तचाप) नियंत्रित होता है, खून में बैड कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स का लेवल घटता है, जिससे भविष्य में कार्डियक अरेस्ट (हार्ट अटैक) और किडनी फेलियर की संभावना न के बराबर रह जाती है।