
हेल्थ डेस्क। कभी आपने गौर किया है कि रोज एक ही समय पर नींद आने लगती है और सुबह अलार्म बजने से पहले ही आंख खुल जाती है? वहीं, रात में देर तक जागने या लगातार बदलती शिफ्ट में काम करने से अगले दिन थकान, चिड़चिड़ापन और ध्यान लगाने में परेशानी होने लगती है। इसके पीछे शरीर की एक खास व्यवस्था काम करती है, जिसे बायोलॉजिकल क्लॉक यानी शरीर की जैविक घड़ी कहा जाता है। यह घड़ी बिना किसी मशीन या अलार्म के शरीर को बताती है कि कब सोना है, कब जागना है और कब ज्यादा एक्टिव रहना है।
बायोलॉजिकल क्लॉक शरीर के अंदर मौजूद एक प्राकृतिक व्यवस्था है, जो दिन और रात के हिसाब से कई शारीरिक गतिविधियों को नियंत्रित करती है। इसे सर्केडियन रिदम भी कहा जाता है। यह लगभग 24 घंटे के चक्र पर काम करती है और नींद, जागने, शरीर के तापमान, हार्मोन और पाचन जैसी प्रक्रियाओं को प्रभावित करती है।
दिमाग में हाइपोथैलेमस नाम का एक हिस्सा होता है। इसमें मौजूद सुप्राकायस्मैटिक न्यूक्लियस (SCN) शरीर की मुख्य जैविक घड़ी की तरह काम करता है। यह आंखों से मिलने वाली रोशनी की जानकारी के आधार पर शरीर को संकेत देता है कि दिन है या रात। इसी के अनुसार शरीर अपनी गतिविधियों का समय तय करने में मदद पाता है।
शरीर की जैविक घड़ी को चलाने में रोशनी की अहम भूमिका होती है। सुबह प्राकृतिक रोशनी मिलने पर दिमाग को दिन शुरू होने का संकेत मिलता है। इससे शरीर धीरे-धीरे जागने और एक्टिव होने की स्थिति में आता है।
इसके उलट, शाम और रात में अंधेरा बढ़ने पर शरीर में मेलाटोनिन हार्मोन का स्तर बढ़ने लगता है। इसे नींद से जुड़ा हार्मोन कहा जाता है, क्योंकि यह शरीर को आराम की तैयारी करने का संकेत देता है। हालांकि, इसकी मात्रा पर कृत्रिम रोशनी, खासकर रात में तेज रोशनी, का असर पड़ सकता है।
यही वजह है कि देर रात तक मोबाइल चलाने, अनियमित समय पर सोने और सुबह देर तक अंधेरे कमरे में रहने से नींद का प्राकृतिक चक्र प्रभावित हो सकता है।
जब सोने-जागने का समय बार-बार बदलता है, तो शरीर की जैविक घड़ी और हमारी दिनचर्या के बीच तालमेल बिगड़ सकता है। इसका असर नींद की गुणवत्ता, एकाग्रता और दिनभर की ऊर्जा पर पड़ सकता है। कुछ लोगों को दिन में ज्यादा नींद, चिड़चिड़ापन और काम में ध्यान लगाने में परेशानी भी हो सकती है।
लंबे समय तक शिफ्ट में काम करना, रातभर जागना और बार-बार समय क्षेत्र बदलकर यात्रा करना भी इस तालमेल को प्रभावित कर सकता है। लगातार बिगड़ी नींद का संबंध कई स्वास्थ्य समस्याओं से पाया गया है, हालांकि हर व्यक्ति पर इसका असर एक जैसा नहीं होता।
बायोलॉजिकल क्लॉक को संतुलित रखने के लिए रोज लगभग एक ही समय पर सोने और जागने की आदत डालें। सुबह कुछ समय प्राकृतिक रोशनी में बिताएं और रात में सोने से पहले मोबाइल या लैपटॉप की तेज रोशनी कम करें। दिन में नियमित शारीरिक गतिविधि करें और शाम के बाद कैफीन लेने से बचें, खासकर अगर इससे आपकी नींद प्रभावित होती है।
अगर पर्याप्त नींद लेने के बाद भी लगातार थकान रहती है, रात में नींद नहीं आती या दिन में बहुत ज्यादा नींद आती है, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है। शरीर की जैविक घड़ी को समझना और उसकी जरूरतों के अनुसार दिनचर्या बनाना अच्छी नींद और बेहतर दिनचर्या बनाए रखने में मदद कर सकता है।