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सफेद चीनी बढ़ा रही है बीपी, शुगर और बिगाड़ रही है डाइजेशन, अब ऑप्‍शन पर शिफ्ट होने का समय

चीनी की जगह गुड़ या शहद का उपयोग करें। इसके अलावा फिजिकल एक्टिविटी (शारीरिक व्यायाम) कम होना और स्क्रीन टाइम (मोबाइल/टीवी का उपयोग) बढ़ना भी इसके प्रम...और पढ़ें

By Sanjay AgrawalEdited By: Navodit Saktawat
Publish Date: Sat, 17 Oct 2026 11:18:53 AM (IST)Updated Date: Sat, 17 Oct 2026 11:28:04 AM (IST)
सफेद चीनी बढ़ा रही है बीपी, शुगर और बिगाड़ रही है डाइजेशन, अब ऑप्‍शन पर शिफ्ट होने का समय
सफेद चीनी।

HighLights

  1. गलत खान-पान, सफेद चीनी का उपयोग कमजोर कर रहा पाचन तंत्र
  2. शुद्ध पानी पिएं, अच्छी नींद लें और बाहर का खाना खाने से बचें।
  3. घर का सादा भोजन करें, इससे वायरल की संभवना कम होगी।

नईदुनिया प्रतिनिधि, सिवनी। बीपी और शुगर अब कम उम्र में ही देखने को मिल रहा हैं। बच्चों व युवाओं में भी पाचन और कब्ज की समस्या आ रही है। इसका मुख्य कारण गलत खान-पान व सफेद चीनी (वाइट शुगर) का अधिक उपयोग है, जो हमारे पाचन तंत्र को प्रभावित करता है।

चीनी की जगह गुड़ या शहद का उपयोग करें। इसके अलावा फिजिकल एक्टिविटी (शारीरिक व्यायाम) कम होना और स्क्रीन टाइम (मोबाइल/टीवी का उपयोग) बढ़ना भी इसके प्रमुख कारण हैं, जिससे स्ट्रेस बढ़ता है और बीपी, शुगर, डाइजेशन सब प्रभावित होता है।


नईदुनिया के 'हेलो डाक्टर' कार्यक्रम में जिला चिकित्सालय में कार्यरत जनरल फिजिशियन प्रिया खंडेलवाल (एमबीबीएस) ने पाठकों के सवालों के जवाब देते हुए आवश्यक परामर्श दिया डाॅ. खंडेलवाल ने बताया कि बारिश का दौर थमने और शीत ऋतु की शुरुआत के साथ ही मौसमी बुखार का प्रभाव तेजी से देखने को मिल रहा है।

तापमान में उतार-चढ़ाव के कारण बुखार, मलेरिया और सर्दी-जुकाम सहित अन्य बीमारियों के रोगी बढ़ रहे हैं।इससे बचने सबसे जरूरी 'हाइड्रेशन' (पानी की पर्याप्त मात्रा) है। साफ और शुद्ध पानी पिएं, अच्छी नींद लें और बाहर का खाना खाने से बचें। घर का सादा भोजन करें, इससे वायरल की संभवना कम होगी।

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सवाल: बदलते मौसम में वायरल बुखार और सर्दी-खांसी से बचाव के लिए क्या उपाय हैं?

मुकेश सक्सेना, सिवनी

जवाब: अभी वायरल बुखार और सर्दी-खांसी (विशेषकर बच्चों में) का प्रकोप ज्यादा देखने को मिल रहा है। इससे बचने सबसे जरूरी 'हाइड्रेशन' (पानी की पर्याप्त मात्रा) है। साफ और शुद्ध पानी पिएं, अच्छी नींद लें और बाहर का खाना खाने से बचें। घर का सादा भोजन करें, इससे वायरल की संभवना कम होगी।

सवाल: क्या बुखार आने पर पैरासिटामाल लेना सुरक्षित है?

सलीम खान, बरघाट

जवाब: यदि आपका वजन 50 किलो से अधिक है और वयस्क है, तो 500 एमजी की पैरासिटामाल निसंकोच दो-तीन दिन तक सुबह-शाम ले सकते हैं। हालाकि 48 घंटों के बाद भी बुखार 100°C से ऊपर रहता है, तो डाक्टर से परामर्श करना आवश्यक है। डाक्टर से बिना परामर्श मेडिकल स्टोर से सीधे दवा लेकर खाना नुकसानदेह हो सकता है। डाक्टर के परामर्श से बीमारी के हिसाब से सही दवा लें।

सवाल: बीपी (ब्लड प्रेशर) की समस्या को नियंत्रित कैसे रखा जा सकता है, क्या करना चाहिए?

उत्तम सिंह बघेल, सिवनी

जवाब: बीपी को 'स्लो पाइजन' (धीमा जहर) माना जाता है, जो हमारी खराब दिनचर्या का परिणाम है। इसे नियंत्रित करने केवल दवा ही नहीं, बल्कि लाइफ स्टाइल (दिनचर्या) में सुधार भी जरूरी है। अच्छी नींद लें, तनाव कम करने ध्यान (मेडिटेशन) करें। सुबह 5 बजे उठकर व्यायाम या वाक (पैदल चलना) करें। सुबह वाक करने से स्ट्रेस हार्मोन नियंत्रित होते हैं। डाक्टर के परामर्श पर बीपी काे नियंत्रित करने दवा उपयोगी है, साथ ही दिनचर्या में भी सुधार करना होगा।

सवाल: पाचन (डाइजेशन) की समस्या से निपटने क्या करना चाहिए?

संतोष साहू, धूमा

जवाब: पाचन की समस्या से बचने सबसे ज्यादा जरूरी यह है कि 'क्या खाएं, कब खाएं और कितना खाएं'। मैदे और पैकेटबंद (प्रिजर्वेटिव्स) चीजों से बचें। नींद पूरी करें, व्यायाम करें और खाना खाते समय पानी कम पिएं। गर्मी में छाछ लें और सर्दियों में आंवला का सेवन करें यह इम्युनिटी (रोग प्रतिरोधक क्षमता) बढ़ाता है और त्वचा व बालों के लिए भी अच्छा है।

सवाल: आजकल युवाओं व बच्चों में भी बीपी, शुगर और पाचन की समस्या बढ़ने का क्या कारण है?

सीएस ठाकुर, सिवनी

जवाब: बीपी और शुगर अब कम उम्र में ही देखने को मिल रहे हैं। छोटे बच्चों में भी पाचन और कब्ज की समस्या आ रही है। इसका मुख्य कारण गलत खान-पान व सफेद चीनी (वाइट शुगर) का अधिक उपयोग है। चीनी की जगह गुड़ या शहद का उपयोग करें। इसके अलावा, फिजिकल एक्टिविटी (शारीरिक व्यायाम) कम होना और स्क्रीन टाइम (मोबाइल/टीवी का उपयोग) बढ़ना भी इसके प्रमुख कारण हैं, जिससे स्ट्रेस बढ़ता है और बीपी, शुगर, डाइजेशन सब प्रभावित होता है।