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लाइफस्टाइल डेस्क। हमारे साथ अक्सर ऐसा होता है कि जब बैचेनी होती है, अकेलापन घेर लेता है या किसी बैठे- बैठे किसी की याद आने लगती है, तो हाथ अपने-आप पुराने चैट्स खोलने लगते हैं? डिजिटल दौर में यह आदत बेहद आम हो चुकी है। हालांकि, मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यह सिर्फ एक आदत नहीं बल्कि हमारे दिमाग और भावनाओं से जुड़ा गहरा मनोवैज्ञानिक व्यवहार है।
क्यों होता है ऐसा
मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट्स बताते हैं कि जब इंसान भावनात्मक रूप से कमजोर महसूस करता है, तो दिमाग उन चीजों की ओर लौटता है जहां उसे कभी अपनापन, प्यार और सुरक्षा महसूस हुई थी। पुराने मैसेज पढ़ना उसी भावनात्मक सहारे को दोबारा पाने की कोशिश होती है।
राहत महसूस होती है
एशियन हॉस्पिटल की कंसल्टेंट और क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. दीपिका शर्मा के मुताबिक, हमारी कई चीजें आपस में एक-दूसरे से गहराई से जुड़ी होती हैं। ऐसे में जब कोई व्यक्ति पुराने चैट्स पढ़ता है, तो उसका दिमाग उन मैसेज से जुड़ी भावनाओं को फिर से महसूस करने लगता है। इससे दिमाग के ‘रिवॉर्ड सिस्टम’ पर असर पड़ता है और डोपामाइन जैसे ‘फील गुड’ हार्मोन एक्टिव हो सकते हैं, जिससे थोड़ी देर के लिए सुकून महसूस होता है।
कौन लोग पढ़ते हैं सबसे ज्यादा पुराने मैसेज?
विशेषज्ञों बताते हैं कि ब्रेकअप या रिश्तों में एक दूसरे से अलग होने वाले लोग सबसे ज्यादा पुराने मैसेज पढ़ते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि दिमाग अचानक टूटे हुए इमोशनल कनेक्शन को आसानी से स्वीकार नहीं कर पाता। कई लोग पुराने चैट्स के जरिए यह समझने की कोशिश करते हैं कि रिश्ते में आखिर क्या गलत हुआ, जबकि कुछ लोग उन यादों को दोबारा जीना चाहते हैं।
डॉ. शर्मा कहती हैं कि जब कोई इंसान पुराने चैट्स पढ़ता है, तो वह पुराने पलों और इमोशन को एक बार दोबारा महसूस कर रहा होता है। हालांकि, यह कुछ समय के लिए राहत देता है, लेकिन जरूरत से ज्यादा ऐसा करना इंसान को अतीत में बांधे रख सकता है और आगे बढ़ने से रोक सकता है।
कैसे निकल सकते हैं इससे
इस स्थिति से बाहर निकलने के लिए विशेषज्ञ दोस्तों और परिवार के साथ समय बिताने, फिजिकल एक्टिविटी करने, डायरी लिखने और जरूरत पड़ने पर काउंसलिंग लेने की सलाह देते हैं। उनका कहना है कि पुरानी यादों को याद करना गलत नहीं है, लेकिन जीवन में आगे बढ़ने के लिए वर्तमान को अपनाना भी उतना ही जरूरी है।
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