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पोहे के साथ जलेबी ही क्यों खाते हैं इंदौर के लोग? मीठे और नमकीन स्वाद के इस मेल के पीछे है दिलचस्प वजह

इंदौर में सुबह के नाश्ते में पोहे के साथ जलेबी खाने का चलन आम है। मीठे और नमकीन स्वाद का मेल खाने को दिलचस्प बनाता है और यह मालवा की खानपान संस्कृति से भी जुड़ा है। इस परंपरा की शुरुआत का कोई प्रमाणित जवाब नहीं है।

By Digital DeskEdited By: Akriti kumari
Publish Date: Tue, 03 Nov 2026 03:36:05 PM (IST)Updated Date: Tue, 03 Nov 2026 03:36:05 PM (IST)
पोहे के साथ जलेबी ही क्यों खाते हैं इंदौर के लोग? मीठे और नमकीन स्वाद के इस मेल के पीछे है दिलचस्प वजह

HighLights

  1. इंदौर का खास नाश्ता पोहा-जलेबी
  2. मीठे-नमकीन स्वाद का दिलचस्प मेल
  3. शुरुआत का कोई प्रमाणित जवाब नहीं

लाइफस्टाइल डेस्क। सुबह का नाश्ता हो और सामने गरमागरम पोहा रखा हो, ऊपर से सेव, प्याज, हरा धनिया और नींबू का स्वाद भी मिल जाए, तो मजा आ जाता है। लेकिन अगर आप इंदौर में हैं, तो इस नाश्ते के साथ एक चीज और जरूर मिलेगी-गरमागरम जलेबी। अब सवाल यह है कि नमकीन और चटपटे पोहे के साथ मीठी जलेबी खाने का चलन आखिर शुरू कैसे हुआ? दोनों के स्वाद एक-दूसरे से बिल्कुल अलग हैं, फिर भी इंदौर के लोग इस जोड़ी को इतना पसंद क्यों करते हैं? इसके पीछे सिर्फ शहर की खानपान परंपरा ही नहीं, बल्कि स्वाद का एक दिलचस्प मेल भी है।

पोहा-जलेबी सिर्फ नाश्ता नहीं, इंदौर की पहचान है

मध्य प्रदेश के इंदौर में पोहा-जलेबी सुबह के नाश्ते का अहम हिस्सा है। यहां सुबह होते ही सड़क किनारे दुकानों और ठेलों पर पोहा बनना शुरू हो जाता है। लोग ऑफिस जाने से पहले, स्कूल-कॉलेज जाते समय या दोस्तों के साथ नाश्ता करने के लिए इन दुकानों पर पहुंचते हैं।


इंदौर का पोहा भी दूसरे शहरों में मिलने वाले पोहे से थोड़ा अलग होता है। इसे हल्का और मुलायम रखा जाता है। इसमें राई, करी पत्ता, प्याज, हरी मिर्च और मसालों का इस्तेमाल होता है। इसके ऊपर सेव, हरा धनिया, नींबू और खास तरह का जीरावन मसाला डाला जाता है। यही जीरावन पोहे को अलग स्वाद देता है। मध्य प्रदेश पर्यटन और इंदौर जिला प्रशासन की वेबसाइट पर भी पोहा-जलेबी को शहर के खास खानपान में शामिल किया गया है। 

वहीं, जलेबी को गरम तेल में तलकर चीनी की चाशनी में डुबोया जाता है। बाहर से कुरकुरी और अंदर से चाशनी से भरी जलेबी पोहे के साथ परोसी जाती है। यही वजह है कि इंदौर में यह जोड़ी सिर्फ किसी खास मौके पर नहीं, बल्कि रोजमर्रा के नाश्ते में भी दिखाई देती है।

मीठे और नमकीन का मेल दिमाग को क्यों पसंद आता है?

अब इस कॉम्बिनेशन के पीछे स्वाद का विज्ञान समझिए। पोहे में नमक, मसाले, नींबू की खटास और जीरावन का चटपटा स्वाद होता है। दूसरी तरफ जलेबी में चीनी की तेज मिठास और कुरकुरापन मिलता है। जब एक ही नाश्ते में अलग-अलग स्वाद मिलते हैं, तो खाने का अनुभव ज्यादा दिलचस्प हो जाता है।

खाने के स्वाद को समझने में सिर्फ जीभ ही काम नहीं करती, बल्कि उसकी खुशबू, बनावट और तापमान भी अहम भूमिका निभाते हैं। पोहा मुलायम और हल्का होता है, जबकि सेव और जलेबी कुरकुरापन देते हैं। नींबू की खटास, मसालों की खुशबू और जलेबी की मिठास मिलकर स्वाद का अलग अनुभव बनाते हैं।

खाने में मीठे और नमकीन का मेल दुनिया के कई व्यंजनों में देखने को मिलता है। जैसे नमकीन पॉपकॉर्न के साथ मीठा कैरेमल, चीज के साथ जैम या चटपटे खाने के साथ मीठी चटनी। इसकी एक वजह यह है कि अलग-अलग स्वाद और बनावट खाने को कम एक जैसा और ज्यादा दिलचस्प बनाते हैं। हालांकि, पोहा-जलेबी की जोड़ी को किसी खास वैज्ञानिक फॉर्मूले से बनाया गया था, ऐसा कहने का कोई पुख्ता आधार नहीं है।

इस जोड़ी के पीछे मध्य प्रदेश की खानपान संस्कृति भी है

इंदौर मालवा क्षेत्र का हिस्सा है और यहां के खानपान में कई अलग-अलग सांस्कृतिक प्रभाव देखने को मिलते हैं। यहां का खाना मीठे, नमकीन, खट्टे और मसालेदार स्वादों के मेल के लिए जाना जाता है। पोहा और जलेबी का साथ भी इसी खानपान संस्कृति का हिस्सा बन गया है।

पोहा महाराष्ट्र में भी लोकप्रिय है। इतिहासकारों और खानपान से जुड़े लेखों में मालवा क्षेत्र में मराठा प्रभाव के साथ पोहे के पहुंचने की चर्चा मिलती है। वहीं, जलेबी का इतिहास भारत के बाहर तक जाता है। माना जाता है कि इसका संबंध पश्चिम एशिया में बनने वाली 'जुलाबिया' नाम की मिठाई से रहा है, जो समय के साथ भारतीय खानपान का हिस्सा बन गई। हालांकि, इंदौर में पोहे के साथ जलेबी खाने की परंपरा कब और किसने शुरू की, इसका कोई एक प्रमाणित जवाब उपलब्ध नहीं है।

आज इंदौर की पहचान सिर्फ पोहा-जलेबी तक सीमित नहीं है। यहां की सराफा बाजार और छप्पन दुकान जैसी जगहें भी अपने खानपान के लिए मशहूर हैं। लेकिन सुबह के नाश्ते में पोहा-जलेबी की जोड़ी आज भी शहर की खास पहचान बनी हुई है।

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