
लाइफस्टाइल डेस्क। आज फिट रहने के लिए लोगों के पास जिम, फिटनेस ऐप, स्मार्टवॉच और कई तरह के वर्कआउट मौजूद हैं। कोई वजन घटाने के लिए जिम जाता है, तो कोई मांसपेशियां मजबूत बनाने के लिए भारी वजन उठाता है। इसके बावजूद बहुत से लोग दिनभर थकान, सुस्ती और शरीर में भारीपन महसूस करते हैं। वहीं, पहले के समय में न तो हर गली में जिम हुआ करते थे और न ही लोग अपनी फिटनेस का हिसाब रखने के लिए स्मार्टवॉच का इस्तेमाल करते थे। इसके बाद भी उनकी रोजमर्रा की जिंदगी में शारीरिक मेहनत शामिल रहती थी।
गांवों में खेतों में काम करना, बाजार तक पैदल जाना, पानी भरना, कपड़े धोना और घर की सफाई करना आम बात थी। इन कामों के लिए लोगों को अलग से समय निकालकर कसरत नहीं करनी पड़ती थी। उनकी रोज की दिनचर्या में ही शरीर को सक्रिय रखने वाली कई गतिविधियां शामिल थीं।
आज स्थिति बदल गई है। लोग फिट रहने के लिए एक घंटा जिम में बिताते हैं, लेकिन दिन के बाकी 10-12 घंटे कुर्सी, गाड़ी या मोबाइल-कंप्यूटर की स्क्रीन के सामने गुजार देते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या पहले लोगों की अच्छी सेहत का एक कारण उनकी मेहनत भरी दिनचर्या थी? और क्या आज जिम जाने के बाद भी हमारी जिंदगी पहले से ज्यादा सुस्त हो गई है?
पहले के समय में लोगों की दिनचर्या आज के मुकाबले काफी अलग थी। गांवों में कई लोग सुबह उठकर खेतों में काम करने जाते थे। घरों में पानी भरना, कपड़े धोना, झाड़ू-पोछा लगाना और खाना बनाना जैसे काम भी शारीरिक मेहनत से जुड़े थे। बाजार या आसपास की जगहों पर जाने के लिए पैदल चलना आम बात थी।
यानी लोगों को फिट रहने के लिए अलग से वर्कआउट का समय तय करने की जरूरत नहीं पड़ती थी। उनके रोज के कामों में चलना, झुकना, सामान उठाना और लंबे समय तक सक्रिय रहना शामिल था। इस तरह शरीर दिनभर किसी न किसी गतिविधि में लगा रहता था।
स्वास्थ्य से जुड़ी भाषा में रोजमर्रा के ऐसे कामों को ‘नीट’ (NEAT) कहा जाता है। इसका पूरा नाम नॉन-एक्सरसाइज एक्टिविटी थर्मोजेनेसिस है। आसान शब्दों में समझें तो जिम या तय कसरत के अलावा दिनभर किए जाने वाले वे काम, जिनमें शरीर की ऊर्जा खर्च होती है, इसी में आते हैं।
उदाहरण के लिए पैदल चलना, सीढ़ियां चढ़ना, घर की सफाई करना, बाजार जाना और कुछ देर खड़े होकर काम करना। ये छोटी-छोटी गतिविधियां भी पूरे दिन शरीर को सक्रिय रखने में मदद करती हैं।
आज हमारी जीवनशैली पहले से काफी बदल गई है। ऑफिस में घंटों कुर्सी पर बैठकर काम करना, घर से ऑफिस जाने के लिए गाड़ी या कैब का इस्तेमाल करना, थोड़ी दूरी के लिए भी वाहन लेना और खाली समय में मोबाइल या टीवी देखना आम हो गया है।
कई लोग सुबह या शाम एक घंटा जिम में वर्कआउट करते हैं, लेकिन इसके बाद उनका ज्यादातर समय बैठकर ही गुजरता है। ऐसे में सिर्फ जिम जाना पूरे दिन की कम शारीरिक गतिविधि की भरपाई नहीं कर पाता।
लंबे समय तक एक जगह बैठे रहने से शरीर की रोजमर्रा की गतिविधियां कम हो जाती हैं। इसका असर वजन, मांसपेशियों की सक्रियता और सेहत पर पड़ सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी नियमित शारीरिक गतिविधि करने और लंबे समय तक बैठे रहने का समय कम करने की सलाह देता है।
इसका मतलब यह नहीं है कि जिम जाना बेकार है। जिम में की जाने वाली कसरत मांसपेशियों को मजबूत बनाने और शरीर की क्षमता बढ़ाने में मदद करती है। लेकिन इसके साथ पूरे दिन थोड़ा-थोड़ा चलते रहना भी जरूरी है।
आज फिटनेस के नाम पर कई लोग शुरुआत में ही भारी कसरत करने लगते हैं। बिना तैयारी के ज्यादा वजन उठाना, जरूरत से ज्यादा व्यायाम करना और शरीर को आराम न देना थकान की वजह बन सकता है।
इसके अलावा नींद पूरी न होना, तनाव, सही खानपान की कमी और पर्याप्त पानी न पीना भी शरीर को थका हुआ महसूस करा सकते हैं। कई बार लगातार कमजोरी के पीछे आयरन की कमी, थायरॉइड या दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं भी हो सकती हैं। इसलिए हर समय महसूस होने वाली थकान को सिर्फ आलस समझना सही नहीं है।
फिट रहने के लिए सिर्फ भारी वजन उठाना जरूरी नहीं है। अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार कसरत करना, सही खानपान लेना, पर्याप्त नींद लेना और शरीर को आराम देना भी उतना ही जरूरी है।
अगर कोई व्यक्ति रोज जिम जाता है, तो इसका मतलब यह नहीं कि उसे बाकी दिन चलने-फिरने की जरूरत नहीं है। लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का इस्तेमाल करना, थोड़ी दूरी पैदल तय करना, काम के बीच कुर्सी से उठकर कुछ देर चलना और घर के छोटे-मोटे काम खुद करना अच्छी आदतें हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, वयस्कों को सप्ताह में 150 से 300 मिनट तक सामान्य से तेज गति वाली शारीरिक गतिविधि करनी चाहिए। इसके अलावा सप्ताह में कम से कम दो दिन मांसपेशियों को मजबूत बनाने वाली कसरत भी करनी चाहिए। जो लोग तेज गति वाली गतिविधि करते हैं, उनके लिए सप्ताह में 75 से 150 मिनट का लक्ष्य बताया गया है।
इसलिए फिटनेस का मतलब सिर्फ जिम में पसीना बहाना नहीं है। दिनभर शरीर को सक्रिय रखना भी उतना ही जरूरी है। पहले कई लोगों की दिनचर्या में खेती, पैदल चलना और घर के काम जैसी गतिविधियां अपने आप शामिल रहती थीं। आज की बदली हुई जीवनशैली में इन गतिविधियों के लिए हमें खुद समय निकालना पड़ता है।
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