• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • दिवाली पूजन 2026
  • होम
  • लाइफस्टाइल

अपनी तस्वीर बार-बार देखने की आदत के पीछे क्या है साइकोलॉजी? यह self-confidence या validation की जरूरत

अपनी तस्वीर बार-बार देखना खुद को समझने का तरीका हो सकता है। लेकिन जब मूड लाइक-कमेंट और दूसरों से तुलना पर निर्भर होने लगे, तो आत्मविश्वास और मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है। लगातार चिंता रहे तो विशेषज्ञ से सलाह लें।

By Akriti kumariEdited By: Akriti kumari
Publish Date: Tue, 03 Nov 2026 02:22:43 PM (IST)Updated Date: Tue, 03 Nov 2026 02:22:43 PM (IST)
अपनी तस्वीर बार-बार देखने की आदत के पीछे क्या है साइकोलॉजी? यह self-confidence या validation की जरूरत
सेल्फी देखना सामान्य, पर संतुलन जरूरी

HighLights

  1. सेल्फी देखना सामान्य, पर संतुलन जरूरी
  2. लाइक-कमेंट से जुड़ता है मूड
  3. तुलना से घट सकता है आत्मविश्वास

लाइफस्टाइल डेस्क। आज के दौर में स्मार्टफोन ने तस्वीरें लेना और उन्हें देखना बेहद आसान बना दिया है। कहीं घूमने जाएं, किसी पार्टी में हों या घर पर ही तैयार हों, लोग कई तस्वीरें खींचते हैं और फिर उनमें से सबसे अच्छी तस्वीर चुनने में काफी समय बिताते हैं। कई लोग अपनी सेल्फी बार-बार देखते हैं, कभी जूम करके चेहरा चेक करते हैं तो कभी पुरानी तस्वीरों से अपनी तुलना करते हैं। कुछ लोग तस्वीर पोस्ट करने के बाद भी बार-बार चेक करते हैं कि कितने लाइक और कमेंट आए। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि अपनी तस्वीर बार-बार देखने की इस आदत के पीछे क्या वजह होती है? क्या यह सिर्फ खुद को अच्छा देखने की इच्छा है या इसके पीछे कोई मनोवैज्ञानिक कारण भी है?

मनोविज्ञान के अनुसार, अपनी तस्वीर देखना अपने बारे में धारणा बनाने और खुद को समझने का एक तरीका भी हो सकता है। हालांकि, जब यह आदत जरूरत से ज्यादा बढ़ने लगे और व्यक्ति का मूड दूसरों की प्रतिक्रिया पर निर्भर होने लगे, तो यह आत्मविश्वास और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है।


खुद को पसंद करने और पहचानने की इच्छा

अपनी तस्वीर बार-बार देखने की एक वजह खुद को पसंद करना और अपनी पहचान को समझना हो सकती है। मनोविज्ञान में इसे सेल्फ-इमेज यानी अपनी छवि से जोड़कर देखा जाता है। लोग तस्वीरों में यह देखना चाहते हैं कि वे कैसे दिख रहे हैं, उनका लुक कैसा है और क्या वे अपनी पसंद के मुताबिक नजर आ रहे हैं।

कई बार व्यक्ति अपनी अच्छी तस्वीर देखकर खुश महसूस करता है। इससे उसे अपने रूप-रंग और व्यक्तित्व को लेकर सकारात्मक अनुभव मिल सकता है। इसमें कुछ गलत नहीं है। खुद को पसंद करना और अपनी तस्वीरों की तारीफ करना सामान्य व्यवहार है।

लाइक और कमेंट से मिलने वाला डोपामिन

सोशल मीडिया पर अपनी तस्वीर पोस्ट करने के बाद मिलने वाले लाइक, कमेंट और तारीफ भी इस आदत को बढ़ा सकते हैं। जब किसी पोस्ट पर सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलती है, तो व्यक्ति को खुशी और संतुष्टि महसूस होती है। दिमाग का रिवॉर्ड सिस्टम इस अनुभव में भूमिका निभाता है।

इसी वजह से कुछ लोग बार-बार अपनी पोस्ट खोलकर देखते हैं कि कितने लोगों ने तस्वीर पसंद की, किसने कमेंट किया और किसने स्टोरी देखी। अगर हर बार तारीफ मिलने की उम्मीद बढ़ने लगे, तो व्यक्ति धीरे-धीरे अपनी खुशी को दूसरों की प्रतिक्रिया से जोड़ सकता है।

दूसरों से तुलना करने की आदत

कई बार लोग अपनी तस्वीर सिर्फ खुद को देखने के लिए नहीं, बल्कि दूसरों से तुलना करने के लिए भी देखते हैं। वे सोचते हैं कि उनकी तस्वीर दूसरों से बेहतर है या नहीं, उनका चेहरा, कपड़े और लुक सोशल मीडिया के ट्रेंड के मुताबिक हैं या नहीं।

लगातार तुलना करने से व्यक्ति अपनी कमियों पर ज्यादा ध्यान देने लगता है। उसे अपनी सामान्य तस्वीर भी खराब लग सकती है। इससे असंतोष और आत्मविश्वास में कमी महसूस हो सकती है। खासकर तब, जब सोशल मीडिया पर दिखने वाली एडिटेड और फिल्टर वाली तस्वीरों को असली सुंदरता का पैमाना मान लिया जाए।

क्या बार-बार सेल्फी देखना गलत है?

नहीं, अपनी तस्वीरें बार-बार देखना अपने आप में कोई मानसिक समस्या नहीं है। कभी-कभार सेल्फी लेना, अच्छी तस्वीर चुनना या अपने लुक को लेकर उत्साहित होना सामान्य है। परेशानी तब शुरू होती है जब व्यक्ति अपनी तस्वीरों को लेकर जरूरत से ज्यादा चिंतित रहने लगे।

उदाहरण के लिए, अगर कोई व्यक्ति एक तस्वीर को बार-बार देखकर अपनी छोटी-छोटी कमियां खोजता है, तस्वीर अच्छी न आने पर परेशान हो जाता है या बिना फोटो और सोशल मीडिया की तारीफ के खुद को अच्छा महसूस नहीं कर पाता, तो इस व्यवहार पर ध्यान देने की जरूरत है।

कुछ मामलों में अपने रूप-रंग को लेकर लगातार चिंता बॉडी डिस्मॉर्फिक डिसऑर्डर (Body Dysmorphic Disorder) से भी जुड़ी हो सकती है। इसमें व्यक्ति अपने शरीर या चेहरे की किसी कथित कमी को लेकर अत्यधिक परेशान रहता है, भले ही वह कमी दूसरों को दिखाई न दे। हालांकि, सिर्फ सेल्फी बार-बार देखने से इस डिसऑर्डर का पता नहीं लगाया जा सकता।

इस आदत को संतुलित कैसे रखें?

  • अपनी तस्वीरों को दूसरों की तस्वीरों से तुलना करने का जरिया न बनाएं।
  • सोशल मीडिया पर लाइक और कमेंट को अपनी खूबसूरती या योग्यता का पैमाना न मानें।
  • बार-बार कैमरा खोलकर अपना चेहरा चेक करने की आदत कम करें।
  • फिल्टर और एडिटिंग वाली तस्वीरों को वास्तविक रूप से अलग समझें।
  • अपनी खूबसूरती के साथ-साथ अपनी क्षमताओं और व्यक्तित्व पर भी ध्यान दें।

अगर अपने रूप-रंग को लेकर चिंता लगातार बनी रहती है, रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होती है या तस्वीरों को लेकर बेचैनी बढ़ती है, तो मनोवैज्ञानिक या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।

यह भी पढ़ें- पहाड़ों पर चढ़ाई के लिए अच्छा माना जाता है यह मौसम, आप भी जाना चाहते हैं तो इन 8 बातों का रखें ध्यान

एक क्लिक पर पढ़ें मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की लेटेस्ट खबरें। Hindi News पढ़ें। MP News, Chhattisgarh news, आज का राशिफल और आज का मौसम से जुड़ी ताजा जानकारी पढ़ें।