
लाइफस्टाइल डेस्क। ऑफिस में हर किसी का व्यवहार एक जैसा नहीं होता। कुछ लोग बेहद कंपटेटिव होते हैं, कुछ अपनी बात मनवाने के लिए दबाव बनाते हैं। तो कुछ लोग अपने फायदे के लिए दूसरों को मेनिप्यूलेट करने की कोशिश करते हैं। कभी-कभी ऐसे व्यवहार इतने ज्यादा नजर आने लगते हैं कि सवाल उठता है- क्या यह सिर्फ खराब व्यवहार है या इसके पीछे पर्सनैलिटी से जुड़े कुछ गंभीर ट्रेट्स भी हो सकते हैं?
साइकोपैथी को सिर्फ गुस्सा, झूठ बोलना या दूसरों से रूखा व्यवहार करने से नहीं समझा जा सकता। यह एक जटिल personality construct है और किसी व्यक्ति को देखकर खुद से इसका diagnosis करना सही नहीं है।
फिर भी कुछ लगातार दिखाई देने वाले व्यवहारों को समझकर यह पहचाना जा सकता है कि ऑफिस में किसी व्यक्ति का व्यवहार अनहेल्दी या मैनिपुलेटिव पैटर्न की तरफ जा रहा है।
ऐसा व्यक्ति अक्सर रिश्तों और प्रोफेश्नल कनेक्शन को इस नजर से देख सकता है कि उनसे उसे क्या फायदा मिलेगा। वह जरूरत पड़ने पर बहुत फ्रेंडली हो सकता है, लेकिन जैसे ही उसका काम निकल जाता है, उसका व्यवहार बदल सकता है। दूसरों की मदद करने के पीछे भी उसका मकसद व्यक्तिगत फायदा हो सकता है।
हालांकि, सिर्फ लालची होना इसका संकेत नहीं है। फर्क बार-बार दोहराए जाने वाले पैटर्न से समझ आता है।
बहकाने का मतलब हमेशा खुलकर किसी को धोखा देना नहीं होता। ऑफिस में यह कई तरह से दिखाई दे सकता है- किसी को guilt feel कराना, आधी-अधूरी जानकारी देना, लोगों को एक-दूसरे के खिलाफ करना या किसी स्थिति को अपने पक्ष में मोड़ने के लिए दूसरों की भावनाओं का इस्तेमाल करना।
अगर कोई व्यक्ति लगातार ऐसा करता है और उसे अपने व्यवहार में कोई समस्या नजर नहीं आती, तो यह एक चिंताजनक पैटर्न हो सकता है।
हर व्यक्ति से गलती हो सकती है। लेकिन healthy workplace behaviour में व्यक्ति अपनी गलती स्वीकार कर सकता है और उसे सुधारने की कोशिश करता है।
इसके उलट अगर कोई व्यक्ति हर गलती का जिम्मेदार किसी और को बताता है, अपनी भूमिका से लगातार इनकार करता है। दूसरों पर दोष डालकर खुद को बचाता है, तो यह अनहेल्दी बिहेवियर का संकेत हो सकता है।
Empathy का मतलब है दूसरे व्यक्ति की भावनाओं और स्थिति को समझने की कोशिश करना। अगर कोई व्यक्ति लगातार दूसरों की परेशानी को नजरअंदाज करता है, किसी को नुकसान पहुंचाने के बाद भी अफसोस नहीं दिखाता या लोगों को केवल अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करता है, तो यह कम empathy वाला behaviour हो सकता है।
कुछ लोग बेहद charming और confident होते हैं। यह अपने आप में कोई समस्या नहीं है। समस्या तब हो सकती है जब कोई व्यक्ति charm और confidence का इस्तेमाल लगातार लोगों को प्रभावित करने, उनका भरोसा जीतने और फिर अपने फायदे के लिए उनका इस्तेमाल करने में करे।
यानी सवाल यह नहीं है कि व्यक्ति कितना charismatic है, बल्कि यह है कि वह अपनी social skills का इस्तेमाल किस तरह करता है।
वर्कप्लेस में किसी से मतभेद होना सामान्य है। लेकिन अगर कोई व्यक्ति लगातार लोगों से रिश्ते बनाता है, उनका भरोसा जीतता है और फिर उन्हें इस्तेमाल या नुकसान पहुंचाकर आगे बढ़ जाता है, तो यह ध्यान देने वाली बात हो सकती है।
किसी व्यक्ति का झूठ बोलना,अपने बारे में सोचना, ambitious होना या कभी-कभी गलत व्यवहार करना उसे साइकोपैथ नहीं बनाता। फर्क behavior के पैटर्न, उसकी intensity और लंबे समय तक बने रहने से समझा जाता है।
साइकोपैथी से जुड़े traits में आम तौर पर manipulation, exploitation, lack of remorse और कम empathy जैसे कई पहलू शामिल होते हैं। किसी व्यक्ति में इनमें से कुछ traits दिखाई देना और clinical condition होना दो अलग बातें हैं।
इसलिए ऑफिस में किसी colleague को खुद से ‘साइकोपैथ’ label करना सही नहीं है।
अगर किसी कलीग आपको लगातार परेशान कर रहा है, तो पता करने के बजाय प्रैक्टिकल टेस्ट ज्यादा जरूरी हैं। जैसे करें-
यह भी पढ़ें- Millennials से लेकर Gen Z तक... आखिर जनरेशन के नाम कैसे होते हैं तय? जानिए 1900 से अब तक दिलचस्प कहानी