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World Organ Donation Day 2026 : जबलपुर में दो माह में तीन ग्रीन कॉरिडोर, तीन लोगों के अंगदान से छह को मिला नया जीवन

अपनी स्थापना के 70 साल के इतिहास में पहली बार नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कालेज अंगदान के बाद ग्रीन कॉरिडोर का साक्षी बना।

By Alok BanerjeeEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
Publish Date: Thu, 13 Aug 2026 09:54:34 AM (IST)Updated Date: Thu, 13 Aug 2026 12:05:28 PM (IST)
World Organ Donation Day 2026 : जबलपुर में दो माह में तीन ग्रीन कॉरिडोर, तीन लोगों के अंगदान से छह को मिला नया जीवन
कैलाश दास चौधरी की देह दान के बाद पार्थिव शरीर को गार्ड आफ ऑनर देते परिवार के सदस्य व चिकित्सक सहित अन्य। नईदुनिया

HighLights

  1. इस वर्ष की थीम भी लोगों को जागरूक करने पर केंद्रित
  2. मेडिकल काॅलेज के अंगदान की मुहिम को लगे पंख
  3. अंगदान को लेकर बढ़ चढ़कर हिस्सेदारी करें समाज के लोग

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। साल 2025 की शुरुआत में दो माह के भीतर दो और अगस्त में एक ग्रीन कॉरिडोर नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज से बने। तीन लोगों ने अपनी असमय मौत के बाद भी छह लोगों को अंगदान कर नया जीवन दिया था।

समाज में जागरूकता को लेकर मेडिकल टीम कर रही काम

अंगदान को लेकर समाज में विभिन्न तरह की भ्रांतियां को दूर करने के लिए मेडिकल कॉलेज की चिकित्सा टीम शहर व ग्रामीण परिवेश से ताल्लुक रखने वाले लोगों को जागरूक करने का प्रयास कर रही है। इस वर्ष की थीम भी लोगों को जागरूक करने पर केंद्रित है।


साधु संत और धर्म गुरुओं की मदद ली जा रही :

आमजन के बीच अंगदान को लेकर जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से साधु संत और विभिन्न समाजों से जुड़े धर्म गुरुओं की भी मदद इस महत्वपूर्ण अभियान में ली जा रही है। ताकि समाज के लोग उनसे प्रेरित होकर अंगदान को लेकर बढ़ चढ़कर हिस्सेदारी करें।

इस बार की थीम है :

विश्व अंगदान दिवस 2026 ..हर साल की तरह इस बार (गुरुवार) को मनाया जा रहा है। इस विश्व अंगदान दिवस 2026 का मुख्य उद्देश्य लोगों को अंगों और ऊतकों के दान के प्रति जागरूक करना तथा अंगदान करने के लिए प्रेरित करना है ताकि गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों की जान बचाई जा सके।

अंगदान : 2025 में मेडिकल काॅलेज में तीन बार ग्रीन कारिडोर बने

नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल काॅलेज और सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में अंगदान और त्वरित परिवहन के लिए वर्ष 2025 में कुल तीन बार ग्रीन कॉरिडोर बनाए गए।

  • जनवरी 2025 : 61 साल के ब्रेनडेड बलिराम कुशवाहा सड़क हादसे में मारे गए थे। उनके अंगों को अन्य मरीजों को जीवनदान देने के लिए भेजा गया। हृदय को विमान से एम्स भोपाल भेजा गया और लिवर को हेलीकॉप्टर के माध्यम से इंदौर के चोइथराम अस्पताल भेजा गया था। मूलत: सागर निवासी बलिराम भेड़ाघाट के पास एक मंदिर में पुजारी बन गए थे, जिसके बाद यही बस गए थे। एक दिन सड़क पर करते समय वे असमय मारे गए थे।
  • मार्च 2025: 56 साल के पूरन चौधरी के ब्रेन डेड होने के बाद उनकी दोनों किडनियों को दो मरीजों को लगाया जा रहा है। एक किडनी इंदौर भेजी गई और एक किडनी जबलपुर के ही एक निजी अस्पताल में ट्रांसफर की गई। पूरन एक राजमिस्त्री थे और काम के दौरान ही दीवार गिरने के बाद उनकी मृत्यु हो गई थी। जीते जी पूरन लोगों के लिए मकान बनाते रहे और मरने के बाद भी दो लोगों को जीवन दे कर चले गए।
  • अगस्त 2025: सिवनी के युवक सत्येंद्र यादव को ब्रेनडेड घोषित किए जाने के बाद, उनके अंगों को सुरक्षित रूप से भोपाल और इंदौर भेजने के लिए अगस्त 2025 में यह कारिडोर बनाया गया था। सड़क हादसे में जान गंवाने वाले युवक के स्वजनों ने अंगदान की सहमति दी। हार्ट अहमदाबाद, लीवर भोपाल और एक किडनी जबलपुर के मरीज को ट्रांसप्लांट किया गया।

जीवनकाल में ही देहदान का संकल्प लिया और निधन के बाद परिवार ने किया इच्छा का सम्मान

आज के समय में जब अंतिम संस्कार के लिए सदियों से चली आ रही परंपराओं और रीति-रिवाजों का पालन किया जाता है, वहीं जिले के पोंडा गांव तहसील मझौली निवासी कैलाश दास चौधरी ने समाज के सामने एक अलग और प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया। इन्होंने अपने जीवनकाल में ही देहदान का संकल्प लिया था। उनके निधन के बाद उनके परिवार ने भी उनकी इच्छा का सम्मान करते हुए उनके संकल्प को पूरा किया।

भावुक क्षणों के बीच अंतिम संकल्प

उनका देहदान नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कालेज में किया गया। उनके बड़े बेटे अनिल दास सहित चारों बेटों और उनकी पत्नी की सहमति से देहदान की प्रक्रिया संपन्न हुई। परिवार ने भावुक क्षणों के बीच उनके अंतिम संकल्प को पूरा करते हुए उनकी इच्छा का सम्मान किया।

शिक्षा और शोध के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान

इस अवसर पर मेडिकल कालेज के डीन डा. नवनीत सक्सेना और डा. राजेंद्र कुशवाहा, डा एनएल अग्रवाल ने कैलाश दास चौधरी के देहदान की सराहना की। उन्होंने इसे समाज में जागरूकता बढ़ाने वाला सराहनीय और मानवहितकारी कदम बताया। देहदान के माध्यम से चिकित्सा शिक्षा और शोध के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है।

सेवाभावी निर्णय को सम्मान दिया गया

कैलाश दास चौधरी के इस सेवाभावी निर्णय को सम्मान दिया गया। उनके पार्थिव शरीर को गार्ड ऑफ ऑनर से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके सामाजिक योगदान और देहदान के प्रेरणादायक संकल्प के प्रति सम्मान का प्रतीक रहा।

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