
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। साल 2025 की शुरुआत में दो माह के भीतर दो और अगस्त में एक ग्रीन कॉरिडोर नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज से बने। तीन लोगों ने अपनी असमय मौत के बाद भी छह लोगों को अंगदान कर नया जीवन दिया था।
अंगदान को लेकर समाज में विभिन्न तरह की भ्रांतियां को दूर करने के लिए मेडिकल कॉलेज की चिकित्सा टीम शहर व ग्रामीण परिवेश से ताल्लुक रखने वाले लोगों को जागरूक करने का प्रयास कर रही है। इस वर्ष की थीम भी लोगों को जागरूक करने पर केंद्रित है।
आमजन के बीच अंगदान को लेकर जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से साधु संत और विभिन्न समाजों से जुड़े धर्म गुरुओं की भी मदद इस महत्वपूर्ण अभियान में ली जा रही है। ताकि समाज के लोग उनसे प्रेरित होकर अंगदान को लेकर बढ़ चढ़कर हिस्सेदारी करें।
विश्व अंगदान दिवस 2026 ..हर साल की तरह इस बार (गुरुवार) को मनाया जा रहा है। इस विश्व अंगदान दिवस 2026 का मुख्य उद्देश्य लोगों को अंगों और ऊतकों के दान के प्रति जागरूक करना तथा अंगदान करने के लिए प्रेरित करना है ताकि गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों की जान बचाई जा सके।
नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल काॅलेज और सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में अंगदान और त्वरित परिवहन के लिए वर्ष 2025 में कुल तीन बार ग्रीन कॉरिडोर बनाए गए।
आज के समय में जब अंतिम संस्कार के लिए सदियों से चली आ रही परंपराओं और रीति-रिवाजों का पालन किया जाता है, वहीं जिले के पोंडा गांव तहसील मझौली निवासी कैलाश दास चौधरी ने समाज के सामने एक अलग और प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया। इन्होंने अपने जीवनकाल में ही देहदान का संकल्प लिया था। उनके निधन के बाद उनके परिवार ने भी उनकी इच्छा का सम्मान करते हुए उनके संकल्प को पूरा किया।
उनका देहदान नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कालेज में किया गया। उनके बड़े बेटे अनिल दास सहित चारों बेटों और उनकी पत्नी की सहमति से देहदान की प्रक्रिया संपन्न हुई। परिवार ने भावुक क्षणों के बीच उनके अंतिम संकल्प को पूरा करते हुए उनकी इच्छा का सम्मान किया।
इस अवसर पर मेडिकल कालेज के डीन डा. नवनीत सक्सेना और डा. राजेंद्र कुशवाहा, डा एनएल अग्रवाल ने कैलाश दास चौधरी के देहदान की सराहना की। उन्होंने इसे समाज में जागरूकता बढ़ाने वाला सराहनीय और मानवहितकारी कदम बताया। देहदान के माध्यम से चिकित्सा शिक्षा और शोध के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है।
कैलाश दास चौधरी के इस सेवाभावी निर्णय को सम्मान दिया गया। उनके पार्थिव शरीर को गार्ड ऑफ ऑनर से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके सामाजिक योगदान और देहदान के प्रेरणादायक संकल्प के प्रति सम्मान का प्रतीक रहा।