
लाइफस्टाइल डेस्क। आजकल फैशन के साथ कदमताल करने के चक्कर में लोग ऐसे फुटवियर चुन लेते हैं, जो पैरों के लिए परेशानी का कारण बन सकते हैं। ऊंची एड़ी के सैंडल, टाइट जूते, कठोर सोल और पैरों को पर्याप्त सपोर्ट नहीं देने वाले फुटवियर लंबे समय तक पहनने से एड़ी में दर्द, तलवों में जलन और टखने में मोच जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कई बार इसका असर चलने के तरीके और घुटनों पर पड़ने वाले दबाव पर भी दिखाई देता है।
ऊंची एड़ी के सैंडल पहनने से शरीर का भार पैरों के अगले हिस्से पर अधिक पड़ सकता है, जिससे दर्द और उंगलियों में विकृति की आशंका बढ़ती है। वहीं, टाइट जूते कॉर्न और कैलस यानी त्वचा की मोटी परत बनने की समस्या पैदा कर सकते हैं। कठोर सोल या पर्याप्त सपोर्ट की कमी से तलवों में दर्द और मांसपेशियों में खिंचाव हो सकता है। गलत फुटवियर के कारण टखने का संतुलन बिगड़ने और मोच आने का खतरा भी बढ़ सकता है।
फिजियोथेरेपी ऐसी समस्याओं में राहत देने और पैरों की कार्यक्षमता सुधारने में मदद कर सकती है। समस्या के अनुसार स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज से पिंडली की मांसपेशियों और तलवों के ऊतकों में लचक बढ़ाई जाती है। पैरों और टखनों की मांसपेशियों को मजबूत करने वाले व्यायाम के साथ बैलेंस ट्रेनिंग भी कराई जा सकती है।
चोट के बाद चलने के तरीके में सुधार के लिए गेट ट्रेनिंग उपयोगी हो सकती है। फिजियोथेरेपिस्ट जरूरत के अनुसार सही जूते, इनसोल और आर्च सपोर्ट चुनने की सलाह भी दे सकते हैं।
फुटवियर खरीदते समय सही साइज, आराम और पर्याप्त सपोर्ट को प्राथमिकता देना जरूरी है। लगातार दर्द, सूजन या चलने में परेशानी होने पर विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।
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