अनूपपुर EVM वेयरहाउस में 24 मशीनें कम मिलीं, मार्च में टूटी थी दीवार; सुरक्षा और रिकॉर्ड को लेकर जांच शुरू
अनूपपुर ईवीएम वेयरहाउस में भौतिक सत्यापन के दौरान 8 बैलेट यूनिट और 16 कंट्रोल यूनिट समेत 24 मशीनें कम मिलीं। पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ जांच शुरू की।
Publish Date: Fri, 02 Oct 2026 12:30:47 PM (IST)Updated Date: Fri, 02 Oct 2026 12:30:47 PM (IST)
अनूपपुर EVM वेयरहाउस में 24 मशीनें कम मिलीं। (एआई जनरेटेड)HighLights
- अनूपपुर ईवीएम वेयरहाउस में 24 मशीनें कम मिलने से हड़कंप मचा।
- सत्यापन में आठ बैलेट यूनिट और 16 कंट्रोल यूनिट कम मिलीं।
- 16 मार्च को वेयरहाउस की दीवार क्षतिग्रस्त मिली थी।
नईदुनिया प्रतिनिधि, अनूपपुर। जिला मुख्यालय के पुराने तहसील कार्यालय के पीछे बने ईवीएम वेयरहाउस से 24 मशीनों के गायब मिलने का मामला अब केवल कथित चोरी की जांच तक सीमित नहीं रह गया है।
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब 16 मार्च को ही ईवीएम वेयरहाउस की दीवार क्षतिग्रस्त मिल गई थी, तो मशीनों की सुरक्षा और रिकार्ड का तत्काल पूर्ण सत्यापन क्यों नहीं कराया गया? इसके बाद करीब छह महीने तक प्रक्रिया चलती रही और सितंबर के अंतिम सप्ताह में भौतिक सत्यापन के दौरान 8 बैलेट यूनिट और 16 कंट्रोल यूनिट कम मिलीं।
दीवार क्षतिग्रस्त मिलने के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
- मामले में 30 सितंबर को प्राथमिक विद्यालय सीतापुर के सहायक शिक्षक फूल सिंह पिता धना सिंह निवासी कर्राटोला ने तहसीलदार अनूपपुर वेद प्रकाश सिंह तथा प्राथमिक विद्यालय बस्ती के सहायक शिक्षक संजय निगम के साथ कोतवाली पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई।
जानकारी अनुसार पुराना तहसील भवन क्षतिग्रस्त होने के कारण उसे डिसमेंटल कराने की प्रक्रिया चल रही थी। इसी दौरान 16 मार्च को ईवीएम वेयरहाउस के पीछे की दीवार क्षतिग्रस्त मिली। दीवार की हालत सामने आने के बाद यह स्पष्ट था कि वहां रखी संवेदनशील निर्वाचन सामग्री की सुरक्षा को लेकर तत्काल गंभीरता जरूरी थी। लेकिन उपलब्ध शिकायत के अनुसार ईवीएम की वास्तविक संख्या और रिकार्ड का विस्तृत भौतिक मिलान बाद में कराया गया। यही अंतर अब जांच का महत्वपूर्ण बिंदु बन गया है।
सवाल उठ रहा है कि दीवार क्षतिग्रस्त मिलने और भवन को डिसमेंटल किए जाने की प्रक्रिया शुरू होने के बाद भी ईवीएम को तत्काल सुरक्षित स्थान पर क्यों नहीं पहुंचाया गया? सत्यापन में सामने आया 24 मशीनों का अंतर
- ईवीएम मशीनों को अंततः पुराने तहसील परिसर से हटाकर पॉलीटेक्निक महाविद्यालय में संचालित तहसील कार्यालय के भूतल स्थित कक्ष क्रमांक-6 में 21 सितंबर को रखा गया। इसके बाद 24 से 28 सितंबर के बीच मशीनों का भौतिक सत्यापन कराया गया। यहीं रिकार्ड और मौके पर उपलब्ध मशीनों की संख्या में अंतर सामने आया। कुल 24 ईवीएम मशीनें कम मिलीं, जिनमें 8 बैलेट यूनिट और 16 कंट्रोल यूनिट शामिल हैं। इन मशीनों के सीरियल नंबर भी शिकायत में दर्ज किए गए हैं।
शिकायत के मुताबिक वर्ष 2014 में पंचायत चुनाव के लिए पुराने तहसील कार्यालय के पीछे बने वेयरहाउस में 620 कंट्रोल यूनिट और 1670 बैलेट यूनिट रखी गई थीं। लंबे समय तक ये मशीनें उसी परिसर में रखी रहीं। ऐसे में जांच का दायरा यह पता लगाने तक सीमित नहीं रह सकता कि 24 मशीनें कब गायब हुईं। यह भी जांच का विषय होगा कि 2014 से लेकर 2026 तक इन मशीनों का कितनी बार भौतिक सत्यापन हुआ, किसने किया और प्रत्येक सत्यापन में रिकॉर्ड तथा मौके पर उपलब्ध मशीनों की स्थिति क्या थी। सुरक्षा व्यवस्था और रिकॉर्ड पर उठे गंभीर सवाल
- ईवीएम निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़ी संवेदनशील सरकारी सामग्री है। ऐसे में पुराने भवन में इनके सुरक्षित भंडारण को लेकर कई सवाल अब सामने आ रहे है।वेयरहाउस की नियमित निगरानी किसके जिम्मे थी।प्रवेश और निकासी का रिकॉर्ड रखा जाता था या नहीं। दीवार क्षतिग्रस्त मिलने के बाद तत्काल मशीनों का सत्यापन क्यों नहीं हुआ?
- पुराने भवन को डिसमेंटल करने की प्रक्रिया शुरू होने के बावजूद ईवीएम को पहले सुरक्षित स्थान पर क्यों नहीं हटाया गया? वर्ष 2014 से रखी मशीनों की सुरक्षा और रिकार्ड का जिम्मेदार अधिकारी/कर्मचारी कौन था?
- पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इसलिए फिलहाल यह निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी कि मशीनें चोरी ही हुई हैं। जांच में यह भी सामने आना है कि मशीनें वास्तव में वेयरहाउस से बाहर ले जाई गईं या किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित हुईं और रिकार्ड में उसका समुचित उल्लेख नहीं हुआ।
- सबसे बड़ा सवाल यही है कि मार्च में खतरा सामने आने के बावजूद सितंबर तक ईवीएम की सुरक्षा और भौतिक सत्यापन की प्रक्रिया क्यों पूरी नहीं हो सकी? यदि समय रहते मशीनों को सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित कर दिया जाता और तत्काल रिकार्ड का मिलान होता, तो 24 मशीनों की कमी का पता भी पहले चल सकता था।