
नईदुनिया प्रतिनिधि, अनूपपुर। कलेक्ट्रेट परिसर में प्रतिबंधात्मक आदेश के बावजूद बिना अनुमति ज्ञापन सौंपने के मामले में पटवारी संघ के तीन पदाधिकारियों समेत अन्य पटवारियों के खिलाफ कोतवाली पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 223(ए) के तहत मामला दर्ज किया है।
अनुविभागीय दंडाधिकारी (एसडीएम) के निर्देश पर कार्यपालिक मजिस्ट्रेट एवं नायब तहसीलदार ज्ञानदास पनिका ने तहसीलदार वेदप्रकाश सिंह के साथ थाने में शिकायत दर्ज कराई। वहीं, पटवारी संघ ने कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे दबाव बनाने की कोशिश बताया है।
प्रशासन के अनुसार, कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट अनूपपुर ने एक अक्टूबर को आदेश जारी कर कलेक्ट्रेट सहित सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग, खनिज विभाग और जिला पंचायत कार्यालय परिसर के सामने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत प्रतिबंधात्मक व्यवस्था लागू की थी।
आठ अक्टूबर को पटवारी संघ के बैनर तले सुधीर तिवारी, मिथलेश तिवारी, रामबदन चौधरी सहित अन्य पटवारी बिना सक्षम अनुमति कलेक्ट्रेट परिसर में पहुंचे। आरोप है कि वहां एकत्र होकर नारेबाजी की गई और ज्ञापन सौंपा गया, जिससे शासकीय कार्य प्रभावित होने तथा परिसर की शांति भंग होने की स्थिति बनी।
एसडीएम ने कोतवाली थाना प्रभारी को भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 223 के तहत कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद पुलिस ने प्रशासनिक शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है।
दूसरी ओर, मध्य प्रदेश पटवारी संघ की जिला इकाई के अध्यक्ष चेतन सिंह मरावी ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि ज्ञापन सौंपने से पहले एडीएम अनूपपुर बलवीर रमन को व्हाट्सऐप के माध्यम से सूचना दी गई थी।
संघ अध्यक्ष ने यह भी सवाल उठाया कि यदि कलेक्ट्रेट परिसर में ज्ञापन सौंपने पर प्रतिबंध था, तो 15 सितंबर को भी संघ ने इसी परिसर में ज्ञापन दिया था। उनके अनुसार, 8 अक्टूबर को ज्ञापन लेते समय भी किसी अधिकारी ने आपत्ति नहीं जताई और न ही संघ को परिसर से बाहर जाने के लिए कहा गया।
संघ अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई पटवारियों पर दबाव बनाने के उद्देश्य से की गई है। हालांकि, एडीएम की ओर से व्हाट्सऐप पर दी गई कथित सहमति और प्रतिबंधात्मक आदेश के दायरे को लेकर प्रशासन का पक्ष स्पष्ट होना बाकी है। पटवारी संघ का कहना है कि दंडात्मक कार्रवाई वापस लिए जाने तक यह विरोध जारी रहेगा।
इस घटनाक्रम के बाद प्रशासन और पटवारी संघ के बीच टकराव बढ़ने के संकेत हैं।