
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण को 14 प्रतिशत ही रखे जाने के हाई कोर्ट के निर्णय के बाद कानून में संशोधन करने वाली कांग्रेस ने इसका विरोध किया है और इसके लिए भाजपा को जिम्मेदार बताया है।
कांग्रेस ने इसका विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट में अपील करने की बात कही है। वहीं भाजपा ने इसे चुनावी लाभ के लिए ओबीसी युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ बताते हुए आरक्षण दिलाने पर अडिग रहने की बात कही है।
कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव से पहले राजनीतिक लाभ लेने की जल्दबाजी में ओबीसी आरक्षण बढ़ाने का अध्यादेश जारी किया था लेकिन उसे मजबूत संवैधानिक एवं कानूनी आधार देने में गंभीर चूक की। अब कांग्रेस अपनी सरकार की गलतियों की जिम्मेदारी लेने के बजाय भाजपा सरकार पर आरोप लगाकर जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में भाजपा सरकार ओबीसी के सशक्तीकरण के लिए प्रतिबद्ध है। ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण दिलाने के लिए प्रदेश सरकार सभी आवश्यक कानूनी विकल्पों पर विचार करेगी और संवैधानिक प्रक्रिया के अनुरूप आगे बढ़ेगी।
वर्ष 2019 में कमलनाथ सरकार ने जल्दबाजी में ओबीसी आरक्षण को लेकर राजनीतिक कारणों से जो कदम उठाया, वह केवल लोगों को बरगलाने की कोशिश थी, लेकिन भाजपा ओबीसी को आरक्षण देने के लिए वचनबद्ध है। सरकार इसके लिए सभी जरूरी कदम उठाएगी। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ता सरकार की योजनाओं का प्रचार-प्रसार करने और हितग्राहियों तक लाभ पहुंचाने का काम करें। जनता को यह भी बताएं कि वर्ष 2003 से पहले कांग्रेस के कुशासन में न सड़कें थीं, न बिजली और न पानी।
वर्ष 2019 में मेरे मुख्यमंत्री कार्यकाल में अन्य राज्यों की तरह मध्य प्रदेश में भी ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण दिया गया था लेकिन भाजपा की सरकारें शुरू से ही इस आरक्षण को समाप्त करने का षड्यंत्र करती रही। सरकार की कमजोर पैरवी और आधी-अधूरी सूचनाएं देने से हाई कोर्ट ने ओबीसी के 27 प्रतिशत आरक्षण को रद कर दिया है।
कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट जाएगी। ओबीसी महासभा के राष्ट्रीय कोर कमेटी सदस्य व याचिकाकर्ता लोकेंद्र गुर्जर ने कहा कि अब ओबीसी वर्ग को केवल आश्वासनों के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। हमें किसी भी सरकार के आश्वासन पर भरोसा नहीं है। ओबीसी वर्ग अपने अधिकारों की लड़ाई स्वयं लड़ेगा।
कमल नाथ सरकार ने अध्यादेश में संवैधानिक प्रावधानों की अनदेखी की और कोई भी ऐसा ठोस कारण नहीं बताया, जिससे 50 प्रतिशत की सीमा को पार किया जाए। जबकि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसको लेकर सर्वदलीय बैठक बुलाई थी। सबकी सहमति के साथ हम न्यायालय गए। मंत्री पटेल ने कहा कि मप्र सरकार उच्चतम न्यायालय में जाएगी और अपना पक्ष रखेगी। कांग्रेस किसी वर्ग की हितैषी नहीं है, यह बात नौजवानों को समझनी होगी।