• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • शारदीय नवरात्रि
  • होम
  • मध्य प्रदेश
  • अनूपपुर

अनूपपुर के अमरकंटक में साल बोरर का प्रकोप, प्रभावित 9535 साल के पेड़ों की कटाई को मिली मंजूरी

कीट के प्रकोप से बड़ी संख्या में यह इमरती पेड़ सूख चुके हैं। जंगल के सुरक्षित अन्य पेड़ को बचाने के खातिर इन्हें काटा जा रहा है। अमरकंटक नर्मदा नदी का...और पढ़ें

By Ganesh RajakEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
Publish Date: Sat, 17 Oct 2026 08:43:33 PM (IST)Updated Date: Sat, 17 Oct 2026 08:43:33 PM (IST)
अनूपपुर के अमरकंटक में साल बोरर का प्रकोप, प्रभावित 9535 साल के पेड़ों की कटाई को मिली मंजूरी
अमरकंटक से लगे डिंडौरी के ददर गांव में संक्रमित साल के वृक्ष की कटाई करते मजदूर। सौजन्य वन विभाग

HighLights

  1. 18 वन कक्षों में 5157 हेक्टेयर क्षेत्र का सर्वेक्षण
  2. 5157 हेक्टेयर वन क्षेत्र में कीट का प्रभाव
  3. नष्ट हो चुके 40 हजार 200 साल बोरर कीट

नईदुनिया प्रतिनिधि, अनूपपुर। अमरकंटक के वन क्षेत्रों में साल बोरर कीट का प्रकोप गंभीर रूप ले रखा है। वन विभाग द्वारा किए गए सर्वेक्षण में 9535 अत्यधिक प्रभावित एवं मृतप्राय साल वृक्ष चिह्नित किए गए हैं।

9535 साल के वर्षों की कटाई शुरू

वैज्ञानिक परीक्षण और विशेषज्ञों की अनुशंसा के बाद इन वृक्षों की कटाई को भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालय, भोपाल से निर्धारित शर्तों के अधीन स्वीकृति मिल गई है। वन विभाग अमरकंटक द्वारा साल बोरर कीट के प्रकोप से खराब हुई 9535 साल के वर्षों की कटाई शुरू कर दी है।

काटे गए सूखे और हरे पेड़ शहडोल भेजे जाएंगे

मां नर्मदा की उद्गम स्थल अमरकंटक की पहचान यहां के घने साल (सरई) के जंगलों , जैव विविधता और प्राकृतिक सौंदर्य से है। अमरकंटक का पूरा क्षेत्र इन पेड़ों से अच्छादित है। यहां का पूरा भौगोलिक क्षेत्र इन पेड़ों पर पूरी तरह निर्भर है ऐसे में साल बोररर कीट के प्रकोप से प्रभावित एवं मृतप्राय 9535 साल वृक्षों के हटाने की स्वीकृति मिलने के बाद अमरकंटक के वन पर्यावरण पर भी प्रभाव पड़ने की आशंका है।


यहां के वन वर्षा के पानी को जमीन में समाने देने, जमीन पर पानी के बहाव को नियंत्रित करने और पेड़ों की जड़े मिट्टी को बांधकर रखने में बेहद कारगर भूमिका निभाते हैं।

वैज्ञानिकों के परामर्श के आधार पर उपाय निर्धारित किए गए

वन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, अक्टूबर 2025 में अमरकंटक क्षेत्र में साल बोरर कीट के प्रकोप के लक्षण सामने आए थे। इसके बाद नवंबर 2025 में उष्णकटिबंधीय वन अनुसंधान संस्थान और राज्य वन अनुसंधान संस्थान, जबलपुर के वैज्ञानिकों ने प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण किया। वैज्ञानिकों के परामर्श के आधार पर कीट नियंत्रण के उपाय निर्धारित किए गए।

संक्रमण की तीव्रता और वृक्षों की स्थिति के आधार परवर्गीकरण

अमरकंटक परिक्षेत्र के 18 वन कक्षों में कुल 5157.34 हेक्टेयर क्षेत्र में सर्वे एवं वृक्षों का चिह्नांकन किया गया। इस दौरान 9535 साल वृक्ष अत्यधिक प्रभावित एवं मृतप्राय स्थिति में पाए गए। पेड़ों में कीट संक्रमण की तीव्रता और वृक्षों की स्थिति के आधार पर उनका वर्गीकरण किया गया। इसके बाद टी-1 से टी-6 श्रेणी के वृक्षों को जंगल से हटाने का प्रस्ताव तैयार किया गया।

वृक्षों के माध्यम से कीट के प्रसार को रोककर सुरक्षित रखना है

विभाग के अनुसार, प्रभावित वृक्षों को हटाने की प्रक्रिया वैज्ञानिक अनुशंसाओं और स्वीकृत कार्ययोजना के प्रावधानों के अनुरूप की जा रही है। इसका प्रमुख उद्देश्य संक्रमित वृक्षों के माध्यम से कीट के प्रसार को रोकना तथा शेष वन संपदा को सुरक्षित रखना है।

40,200 वयस्क साल बोरर कीट नष्ट

साल बोरर कीट के नियंत्रण के लिए वैज्ञानिकों के परामर्श पर ट्रैप-ट्री आपरेशन भी चलाया गया। अनूपपुर वनमंडल के अमरकंटक परिक्षेत्र में इस प्रक्रिया के माध्यम से 40,200 वयस्क साल बोरर कीटों को पकड़कर नष्ट भी किया जा चुका है।

डिंडौरी में भी 1. 46 लाख अधिक पेड़ संक्रमित

वर्तमान में वन विभाग द्वारा स्थानीय मजदूरों के माध्यम से विभागीय स्तर पर डिंडोरी जिले की सीमा क्षेत्र से लगे जंगल में साल के वृक्षों की कटाई करानी शुरू कर दी है। डिंडौरी जिले में भी 1 लाख 46 हजार से अधिक पेड़ साल बोरर कीट से संक्रमित हैं, यह भी पेड़ों की कटाई चल रही है।

अमरकंटक एरिया में साल बोरर कीट का प्रकोप अधिक

बताया गया अमरकंटक वन पर क्षेत्र के भुंडाकोना और अमरकंटक एरिया में साल बोरर कीट का प्रकोप अधिक रहा है।भुंडाकोना अंतर्गत दमगढ़, जालेश्वर, उमरगोहान जबकि अमरकंटक के अंतर्गत सोनमुड़ा,कपिलधारा और स्थानीय अमरकंटक क्षेत्र शामिल हैं जहां पेड़ की कटाई सुनिश्चित की गई है।

निर्धारित शर्तों के अधीन स्वीकृति प्रदान की

वन विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (विकास) के प्रतिवेदन के आधार पर 21 अगस्त को क्षेत्रीय सशक्त समिति की बैठक में इस विषय पर विचार किया गया। इसके बाद पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालय, भोपाल ने 1 सितंबर को जारी पत्र के माध्यम से प्रभावित वृक्षों के आवश्यक विदोहन के प्रस्ताव को निर्धारित शर्तों के अधीन स्वीकृति प्रदान की।

प्राकृतिक पुनरुत्पादन के संरक्षण के उपाय भी प्रस्तावित

विभाग ने स्पष्ट किया है कि वृक्षों को हटाने की कार्रवाई वैज्ञानिक अनुशंसाओं, स्वीकृत कार्ययोजना और केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित शर्तों के अनुसार ही की जाएगी। प्रभावित वन क्षेत्रों में उपचार के साथ प्राकृतिक पुनरुत्पादन के संरक्षण के उपाय भी प्रस्तावित किए गए हैं।

निष्कासन के बाद भी वन क्षेत्र में नई पौध विकसित हो सके

साल के प्राकृतिक रूप से उगने वाले नवपौधों को चराई और मानवीय हस्तक्षेप से बचाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि प्रभावित वृक्षों के निष्कासन के बाद भी वन क्षेत्र में नई पौध विकसित हो सके और साल के जंगलों का प्राकृतिक स्वरूप बना रहे।

साल बोरर कीट के प्रकोप की वजह से अमरकंटक क्षेत्र के 9535 पेड़ की कटाई हेतु भारत सरकार से अनुमति मिली है जिस पर कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। काटी गई लड़कियां शहडोल वन डिपो भेजी जाएंगी। इस कार्य को जल्द से जल्द करने का प्रयास किया जाएगा।

डेविड वेंकटेश चिनाब,वन मंडलाधिकारी अनूपपुर।

डिंडौरी में पिछले माह जलाए गए थे साढ़े 19 लाख कीट

गत 24 सितंबर को मध्य प्रदेश के डिंडौरी जिले के जंगल में साल के डेढ़ लाख साल के पेड़ों को खोखला करने वाले साढ़े 19 लाख कीटों को जलाया गया था। इसकी प्रक्रिया में ग्रामीणों की मदद से कीटों की मालाएं बनाई गईं, उनको लकड़ियों की चिता पर रखकर आग लगा दी गई।

प्रभावित साल के डेढ़ लाख पेड़ों को काटा जा रहा

अब डिंडौरी में इन कीटों से प्रभावित साल के डेढ़ लाख पेड़ों को काटा जा रहा है। अब तक 18 हजार पेड़ काटे जा चुके हैं। इससे वन विभाग ने चार अरब आय के नुकसान का अनुमान लगाया है। वहीं, अमरकंटक में पेड़ काटे जाने से 35 करोड़ के नुकसान का अनुमान है।

यह भी पढ़ें- 2016 में परीक्षा, 2017 में निरस्तीकरण; जस्टिस विवेक अग्रवाल ने पूछा- किस कानूनी प्रविधान के तहत रद की गई भर्ती