
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। मध्य प्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय, भोपाल की भर्ती प्रक्रिया को लेकर हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। वर्ष 2014 में विभिन्न पदों पर नियुक्ति के लिए जारी विज्ञापन के तहत मार्च 2016 में आयोजित भर्ती परीक्षा को सितंबर 2017 में निरस्त किए जाने के मामले में हाई कोर्ट ने विश्वविद्यालय से जवाब तलब किया है।
न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल की एकलपीठ ने विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार को मूल रिकाॅर्ड और संपूर्ण नस्ती के साथ व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर यह स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं कि परीक्षा आयोजित होने के बाद उसे किस कानूनी प्रविधान के तहत निरस्त किया गया।
मामला भोपाल निवासी अनिल कुमार सोनी विरुद्ध मध्य प्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय एवं अन्य से संबंधित है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता राहुल सिंह ठाकुर ने पक्ष रखते हुए कोर्ट को बताया कि विश्वविद्यालय ने वर्ष 2014 में विभिन्न पदों पर नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी किया था।
27 मार्च 2016 को भर्ती परीक्षा आयोजित की गई, लेकिन एक सितंबर 2017 के प्रकाशन के माध्यम से विज्ञापन और भर्ती परीक्षा निरस्त कर दी गई।
न्यायालय ने विश्वविद्यालय के अधिवक्ता कृष्ण केशव सिंह को निर्देश दिया कि मामले की मूल फाइल उपलब्ध कराई जाए, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि परीक्षा आयोजित किए जाने के बाद उसे निरस्त करने का निर्णय किस आधार और किस वैधानिक प्रविधान के तहत लिया गया था।
कोर्ट ने संपूर्ण मूल नोटिंग सहित पूरी नस्ती प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। हाई कोर्ट ने विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार को भी व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर विश्वविद्यालय की कार्रवाई के संबंध में स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 18 नवंबर 2026 को निर्धारित की गई है।
उस दिन रजिस्ट्रार को मूल अभिलेखों के साथ न्यायालय में उपस्थित रहना होगा। अब सुनवाई में यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि भर्ती परीक्षा निरस्त करने के निर्णय के पीछे क्या प्रशासनिक और कानूनी आधार था तथा विश्वविद्यालय की मूल नस्ती में इस संबंध में क्या तथ्य दर्ज हैं।
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