
नईदुनिया प्रतिनिधि, बालाघाट। जिले में जिस बिरसा ब्लाॅक के वनांचलों में महामारी ने 32 बैगा बच्चों की जिंदगी छीनी है, उस ब्लाॅक का स्वास्थ्य दायित्व एक फर्जी डाॅक्टर संभाल रहा था। जालसाजी से वह ब्लाॅक मेडिलक आफिसर (बीएमओ) के पद पर चार वर्षाें तक काम करता रहा।
विभागीय अधिकारी भी मानते हैं कि अगर समय रहते सुनील सिंह का फर्जीवाड़ा सामने आ जाता, तो उस क्षेत्र में हालात नहीं बिगड़ते। सुनील सिंह पर सालों तक जिम्मेदारों की कृपा बरसती रही और वह एमबीबीएस की फर्जी डिग्री पर डाॅक्टरी करता रहा।
बिरसा बीएमओ रहते हुए उसने टीकाकरण, मलेरिया नियंत्रण कार्यक्रम, दवा वितरण सहित अन्य स्वास्थ्य सेवाओं के क्रियान्वयन में अनियमितता व मनमानी की थी।
बिरसा थाना प्रभारी विजय केन ने बताया कि आरोपी फरार है, जिसकी तलाश में टीम जगह-जगह दबिश दे रही है। लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा के आदेश पर 10 अक्टूबर को सुनील सिंह के विरुद्ध धारा 318(4), 340(2) और 336(3) के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है।
राज्य स्तरीय जांच समिति की पांच महीनों तक चली जांच में ये सिद्ध हुआ है कि आरोपी सुनील ने देवास के डाॅ. सुनील सिंह के नाम पर कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर एमबीबीएस की डिग्री बनवाई और शासकीय सेवा प्राप्त की थी। 10वीं व 12वीं की मार्कशीट भी डाॅ. सुनील सिंह के नाम पर बनवाई थी। तत्कालीन सीएमएचओ डाॅ. परेश उपलप ने अप्रैल 2026 में मप्र मेडिकल काउंसिल और विभाग के आयुक्त को जांच के लिए पत्र लिखा था।
सुनील सिंह की फर्जी डिग्री का मुद्दा 2024 में भी गरमाया था। तब जांच के बाद उसकी एमबीबीएस डिग्री और मार्कशीट सही बताई गई थी। जानकारी के अनुसार, दो वर्ष पहले श्याम शाह मेडिकल काॅलेज और अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय, रीवा से शैक्षणिक दस्तावेजों की जांच कराई गई थी।
एमबीबीएस में प्रवेश और इंटर्नशिप पूरी करने का उल्लेख था। विश्वविद्यालय से फाइनल परीक्षा के रोल नंबर और प्रैक्टिकल नंबर की जानकारी मिली थी। इसी आधार पर डिग्री और मार्कशीट सही बताई गई थी।
सुनील सिंह की पहचान को लेकर भी कई सवाल खड़े हाे रहे हैं। जांच में पता चला है कि सुनील सिंह का वास्तविक नाम शिवकुमार पिता रामलखन पांडेय है, जो रीवा का रहने वाला है। बिरसा पुलिस जब रीवा के बड़ागांव पहुंची, तो स्वजन, ग्रामीणों, पड़ोसियों से पूछताछ में नाम में भी फर्जीवाड़ा सामने आया।
सुनील की फोटो देखकर लोगों ने उसे शिवकुमार पांडेय बताया। बताया गया कि आरोपी की बड़ागांव में जमीन व मकान है। हालांकि, पुलिस को सुनील नहीं मिला। बैहर एसडीओपी चंद्रशेखर पांडेय के अनुसार, आरोपी के नाम को लेकर भी विवेचना जारी है। जल्द ही हम खुलासा करेंगे।