
नईदुनिया प्रतिनिधि, बालाघाट। एमबीबीएस की फर्जी डिग्री मामले में बिरसा तहसील के तत्कालीन ब्लाक मेडिकल आफिसर (बीएमओ) डाॅ. सुनील सिंह के खिलाफ बिरसा थाने में शनिवार शाम एफआइआर दर्ज की गई है। 2008 में संविदा चिकित्सक के रूप में सेवा शुरू की थी।
प्रभारी बीएमओ डाॅ. नरेश मारन की शिकायत पर पुलिस ने सुनील सिंह के खिलाफ बीएनएस की धारा 318(4), 340(2) और 336(3) के तहत अपराध पंजीबद्ध किया है।
सीएमएचओ डाॅ. शत्रुघ्न दाहिया ने बताया कि शुक्रवार को स्वास्थ्य सेवा मप्र शासन, भोपाल से डाॅ. सुनील पर प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश मिले थे। प्रभारी बीएमओ डाॅ. मारन को इसके लिए निर्देशित किया गया।
पांच महीने चली विभागीय जांच के बाद सुनील सिंह की एमबीबीएस की डिग्री फर्जी पाई गई है। सुनील ने कूटरचित अभिलेखों के आधार पर शासकीय सेवा प्राप्त की थी और बालाघाट में सेवाएं दे रहा था। पांच माह पहले डिग्री पर सवाल उठने के बाद से मामला जांच में था।
सुनील सिंह की डिग्री अप्रैल 2026 में तब सवालों के घेरे में आई, जब उसी नाम के दो व्यक्ति बिरसा और देवास में सेवाएं दे रहे थे। दोनों चिकित्सकों की डिग्री में एक-जैसा नाम, पिता का एक-जैसा नाम, जन्मतिथि, डिग्री वर्ष और काॅलेज का एक-समान नाम दर्ज है।
आरोप लगे कि एक ही एमबीबीएस की डिग्री पर दोनों चिकित्सक वर्षाें से सेवाएं दे रहे हैं। तत्कालीन सीएमएचओ डा. परेश उपलप ने इसे लेकर मप्र मेडिकल काउंसिल और विभाग के आयुक्त को जांच के लिए पत्र लिखा था।
जांच के बाद अब स्पष्ट हो चुका है कि बिरसा बीएमओ के रूप में वर्षाें से सेवाएं दे रहे डा. सुनील सिंह ने एमबीबीएस की फर्जी डिग्री से शासकीय नौकरी प्राप्त की थी। गौरतलब है कि आरोपी सुनील सिंह ने बालाघाट में 2008 में संविदा चिकित्सक के रूप में सेवा शुरू की थी।
2012 से वह बिरसा में पदस्थ के खिलाफ 2017-18 में पहली बार शिकायत हुई थी। उन्हें बिरसा से हटाने के आदेश हो गए थे, लेकिन न्यायालय से राहत मिल गई। वह लगभग चार साल बिरसा बीएमओ रहे।
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