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राज न खुल जाए इसलिए बालाघाट परिवार लेकर नहीं आया आरोपी सुनील सिंह, फर्जी डिग्री का दमोह-भोपाल कनेक्शन

उसकी गिरफ्तारी के बाद संभावना है कि उसे संरक्षण देने वालों के चेहरे उजागर होंगे। इसके अलावा, टीकाकरण सहित अन्य स्वास्थ्य कार्यक्रमों में आंकड़ों का खु...और पढ़ें

By Yogesh Kumar GautamEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
Publish Date: Fri, 16 Oct 2026 07:52:18 PM (IST)Updated Date: Fri, 16 Oct 2026 07:52:18 PM (IST)
राज न खुल जाए इसलिए बालाघाट परिवार लेकर नहीं आया आरोपी सुनील सिंह, फर्जी डिग्री का दमोह-भोपाल कनेक्शन
बालाघाट के एसएनसीयू में नवजात का उपचार करतीं विशेषज्ञ व नर्सिंग स्टाफ। फाइल फोटो 

HighLights

  1. बीएमओ रहते हुए वह अपनी निजी क्लीनिक भी संचालित करता था
  2. सुनील सिंह के नाम से ही फर्जी 10वीं-12वीं की मार्कशीट बनवाई थी
  3. दमोह जिले में भी इसी तरह का फर्जीवाड़ा सामने आ चुका है

नईदुनिया प्रतिनिधि, बालाघाट। देवास के डाॅ. सुनील सिंह के नाम से रीवा के बड़ागांव का शिवकुमार पिता रामलखन पांडेय वर्ष 2008 में संविदा में आया और 2012 से बिरसा में पदस्थ रहा। उसने सुनील सिंह के नाम से ही फर्जी 10वीं-12वीं की मार्कशीट बनवाई थी।

पुलिस जांच का सबसे बड़ा बिंदु है

ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि उसने एमबीबीएस की फर्जी डिग्री कहां से बनवाई? ये पुलिस जांच का सबसे बड़ा बिंदु है। इससे पहले दमोह जिले में भी इसी तरह का फर्जीवाड़ा सामने आ चुका है, जिसमें आरोपियों ने भोपाल से फर्जी डिग्री बनवाई थी।


दमोह में इलाज के बाद सात मरीजों की मौत हो गई थी

दमोह में ऐसे दो मामले आए जिनमें फर्जीवाड़ा सामने आया था। पिछले साल दमोह के मिशन हाॅस्पिटल में फर्जी डाॅ. नरेंद्र यादव उर्फ एन. जान केम कार्डियोलाॅजिस्ट (हृदय रोग विशेषज्ञ) के रूप में काम करते मिला। इस फर्जी डाॅक्टर के इलाज के बाद सात मरीजों की मौत हो गई थी।

जिले के संजीवनी क्लीनिकों में बड़ा फर्जीवाड़ा

इस साल दमोह जिले के संजीवनी क्लीनिकों में बड़ा फर्जीवाड़ा हुआ और तीन संविदा चिकित्सक फर्जी डिग्री के सहारे मरीजों की जान से खिलवाड़ करते मिले। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) की जांच में मप्र प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से नौ फर्जी डाक्टर पकड़े गए थे।

पुलिस को चकमा दे रहा सुनील सिंह

बालाघाट पुलिस की गिरफ्त से बिरसा का फर्जी डाक्टर शिवकुमार पांडेय उर्फ सुनील सिंह चकमा दे रहा है। बिरसा पुलिस रीवा सहित अन्य संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है, लेकिन सुनील बचता जा रहा है। हालांकि, पुलिस का कहना है कि आरोपित जल्द गिरफ्त में होगा।

साथ देने वालों के इर्द-गिर्द रहेगी पुलिस की जांच

पुलिस की जांच उससे फर्जी दस्तावेज बनाने और इसमें उसका साथ देने वालों के इर्द-गिर्द रहेगी। शुक्रवार को पत्रकारों से चर्चा में नवागत कलेक्टर आदित्य सिंह ने कहा कि इस मामले में प्रशासनिक स्तर पर जो भी दोषी होगा, उसके विरुद्ध विधिवत कार्रवाई होगी।

शुरू से बालाघाट में अकेले ही रहा

आरोपी सुनील सिंह शुरू से बालाघाट में अकेले ही रहा। वह जब तक बालाघाट में रहा, तब तक उसने परिवार को बालाघाट नहीं लाया, ताकि उसकी पहचान उजागर न हो। बिरसा में बीएमओ रहते हुए वह अपनी निजी क्लीनिक भी संचालित करता था।

छह-आठ महीने में जाता रहा रीवा

सुनील सिंह छह-आठ महीने में रीवा के बड़ागांव स्थित घर जाता था, जहां वह अपने परिवार से मिलता था। सूत्रों की मानें, तो बालाघाट में उसे संरक्षण देने वाले स्वास्थ्य अधिकारी उसके रिश्तेदार हैं। हालांकि, इसकी अधिकृत पुष्टि नहीं हो सकी है।

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