
नईदुनिया प्रतिनिधि, बालाघाट। लगभग 11 करोड़ रुपये के चावल की हेराफेरी से जुड़े इस मामले में कुमार की भोपाल से गिरफ्तारी और कुछ ही घंटों बाद जेल भेजे जाने ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
गौर करने वाली बात है कि किरनापुर में 15 सितंबर का प्रदर्शन की आड़ में हुए उपद्रव के बाद पुलिस ने चावल कांड की जांच में तेजी दिखाई है। करीब ढाई माह से फरार चल रहे कुमार तक पुलिस पहुंच ही गई, जिसे अहम कड़ी माना जा रहा था।
बड़े भाई की गिरफ्तारी अब छोटे भाई रामकिशोर कावरे के लिए सिर्फ पारिवारिक संकट नहीं, बल्कि राजनीतिक चुनौती भी बन गई है।
चर्चा है कि गिरफ्तारी टालने के लिए भोपाल से दिल्ली तक प्रयास हुए, लेकिन जांच की आंच आखिरकार कुमार तक पहुंच गई।घटनाक्रम का असर रामकिशोर कावरे की राजनीतिक साख और भाजपा जिलाध्यक्ष पद पर पड़ना तय माना जा रहा है।
परसवाड़ा सीट से दो बार विधायक और एक बार राज्य मंत्री रहे रामकिशोर कावरे तथा उनके परिवार के लिए वर्ष 2026 काल बनकर आया है। 15-16 जनवरी को कुमार कावरे के आंवलाझरी स्थित कंस्ट्रक्शन कंपनी के कार्यालय पर पहले जीएसटी का छापा पड़ा, जहां 70 लाख रुपये के टैक्स में अनियमितता सामने आई।
फिर 20 दिन बाद फरवरी में कुमार की ही टेकाड़ी स्थित हर्ष राइस इंडस्ट्री में एनजीटी ने धावा बोल दिया। पर्यावरणीय क्षति के साथ अतिक्रमण और पेड़ों की अवैध कटाई के आरोप लगे। साल की शुरुआत में ही इन दोनों मामलों ने रामकिशोर कावरे की किरकिरी करा दी।
फिर चार महीनों की शांति के बाद जून में चावल कांड का भयंकर विस्फोट हुआ। इस महाघोटाले ने कावरे परिवार की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी। एसआइटी को सुबूत मिले कि एफसीआइ गोदाम से छिंदवाड़ा के एवीजे एथनाल प्लांट जाने वाले सरकारी चावल को हर्ष राइस इंडस्ट्री में खपाया गया था।
कावरे परिवार के बेहद खास विनोद शर्मा, रामकिशोर व कुमार के भतीजे अविनाश कावरे और गोपाल ठाकुर को सलाखों के पीछे जाना पड़ा। तीनों आरोपित कुमार कावरे के बिजनेस पार्टनर हैं। अब कुमार कावरे भी उसी जेल में हैं, जहां उनके भतीजे और बिजनेस पार्टनर कैद हैं।
रामकिशोर कावरे के राजनीतिक जीवन में ऐसा पहली बार हुआ है, जब उनकी सियासी साख पर संकट आया है। अब ये चर्चा भी तेज हो गई है कि कावरे का जिलाध्यक्ष पद जल्द छिन सकता है। हालांकि, ये कयास चावल कांड में हर्ष राइस इंडस्ट्री का नाम जुड़ने के बाद से लग रहे हैं।
इस पूरे घटनाक्रम ने पार्टी के अंदर भी हलचल पैदा कर दी है। कावरे के खेमे के कार्यकर्ता व पदाधिकारी मायूस हैं, तो विरोधी खुश हैं। लोग ये सुझाव भी दे रहे हैं कि रामकिशोर को नैतिकता के आधार पर स्वयं ही अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।
मामले में एसआइटी ने 20वें आरोपी के रूप में कुमार कावरे को गिरफ्तार किया है। पूर्व में ट्रक चालक दुर्गेश शेंडे, एथनाल प्लांट प्रतिनिधि राहुल प्रताप, सुपरवाइजर राकेश श्रीवास्तव, ट्रांसपोर्टर उबेद खान, राइस मिलर सुरेंद्र राणा, कुंजबिहारी पटले, मुनीम अतुल बिसेन, गोंदिया के मिलर किशनलाल खंडेलवाल, जुगलकिशोर खंडेलवाल, हर्ष राइस मिल के पार्टनर विनोद शर्मा, संचेती राइस मिल के वित्तीय प्रबंधक राजेश संचेती, अविनाश कावरे, गोपाल ठाकुर, एफसीआई कर्मचारी सुरेंद्र सूर्यवंशी, नंदगोपाल इंडस्ट्रीज सिवनी के संचालक सोनू जैन, गोंदिया के ट्रेडर जय कुमार अग्रवाल और मिलर आदित्य अग्रवाल, विराज राइस मिल संचालक को भी गिरफ्तार किया है।
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