
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। मध्य प्रदेश में पॉक्सो (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण) अधिनियम के तहत बढ़ते मामलों और हाई कोर्ट में लंबित 14 हजार से अधिक आपराधिक अपीलों पर हाई कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। मुख्य न्यायाधीश अल्पेश यशवंत कोगजे और न्यायमूर्ति विवेक रूसिया की युगलपीठ ने पॉक्सो कानून के प्रभावी क्रियान्वयन, जनजागरूकता और मामलों के समयबद्ध निराकरण की निगरानी के लिए हाई कोर्ट की कमेटी नंबर 30 को जिम्मेदारी सौंपी है।
हाई कोर्ट द्वारा दर्ज आंकड़ों के अनुसार जबलपुर, इंदौर और ग्वालियर पीठ में पॉक्सो अधिनियम से संबंधित कुल 14,531 आपराधिक अपीलें लंबित हैं। सुनवाई के दौरान कोर्ट के समक्ष यह तथ्य सामने आया कि बड़ी संख्या में मामलों में पीड़ितों की उम्र 16 से 18 वर्ष तथा आरोपितों की उम्र 19 से 22 वर्ष के बीच है। कोर्ट ने इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए कहा कि कानून की जानकारी के अभाव में किशोर और युवा गंभीर आपराधिक मामलों में फंस रहे हैं और उन्हें जेल जाना पड़ रहा है।
कोर्ट ने इस बात पर चिंता जताई कि किशोरों और युवाओं को पॉक्सो अधिनियम के कड़े प्रविधानों की पर्याप्त जानकारी नहीं है। प्रेम प्रसंग या दोस्ती के चलते घर से चले जाने जैसी परिस्थितियों में भी ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जिनमें पॉक्सो सहित गंभीर आपराधिक प्रविधान लागू हो जाते हैं। कोर्ट ने कहा कि कानून के प्रविधानों के संबंध में व्यापक जागरूकता जरूरी है, ताकि नाबालिगों और उनके संपर्क में रहने वाले युवाओं को कानूनी परिणामों की जानकारी हो।
हाई कोर्ट ने आदेश में पॉक्सो अधिनियम की धारा 43 का उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्र और राज्य सरकार का दायित्व है कि कानून के प्रविधानों के संबंध में विभिन्न माध्यमों से व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। मामले में HC द्वारा स्वतः संज्ञान लेकर शुरू की गई जनहित याचिका के साथ चिन्मय मिश्रा और अधिवक्ता अमिताभ गुप्ता की जनहित याचिकाओं को भी जोड़ा गया था। सुनवाई के दौरान अधिवक्ता अमिताभ गुप्ता को न्यायमित्र नियुक्त किया गया। अगली सुनवाई आठ सप्ताह बाद निर्धारित की गई है।
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