
योगेश कुमार गौतम, नईदुनिया, बालाघाट। दशकों तक माओवादी हिंसा से प्रभावित रहे बैहर, बिरसा और परसवाड़ा में लंबे समय से डाक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी है, लेकिन ये कमी अब दूर होने वाली है।
इन तीनों विकासखंडों में मलेरिया, खसरा, कुपोषण सहित अन्य बीमारियों से हुईं 32 बैगा बच्चों की मौत के बाद सरकार ने जिले में 67 अनुबंधित मेडिकल आफिसरों की नियुक्ति की है।
इससे न सिर्फ डाॅक्टरों की कमी दूर होगी, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं को भी ताकत मिलेगी। 67 में से 60 अनुबंधित मेडिकल अफसरों ने सीएमएचओ कार्यालय में ज्वानिंग दे दी है। ज्वाइनिंग नहीं देने वाले सात मेडिकल अफसरों को नोटिस थमाया गया है। उन पर अनुबंध के तहत राशि की वसूली सहित अन्य विभागीय कार्रवाई की जाएगी। 60 नवपदस्थ मेडिकल अफसर एक साल तक अलग-अलग विकासखंड में सेवाएं देंगे।
बैहर में पांच और बिरसा व परसवाड़ा में विशेषज्ञ चिकित्सकों के तीन-तीन पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्षों से ये रिक्त पड़े हैं। इसके अलावा मेडिकल आफिसर और नर्सिंग आफिसर (स्टाफ नर्स) के भी पद बड़े पैमाने पर खाली हैं।
बैहर, बिरसा और परसवाड़ा में मेडिकल आफिसर के 29 पद स्वीकृत हैं, जिसमें छह पद खाली हैं। इसी तरह नर्सिंग आफिसर के 47 में से चार पद खाली हैं। मैदानी स्तर पर स्वास्थ्य केंद्रों की कमान संभालने वाले पैरामेडिकल स्टाफ का भी सूखा है।
64 स्वीकृत पदों में मात्र 17 पदों पर ये सेवाएं दे रहे हैं, जबकि 47 खाली हैं। मप्र शासन ने महामारी से निपटने और जिले की स्वास्थ्य सेवाओं को संजीवनी देने अनुबंधित मेडिकल आफिसर को एक वर्ष के लिए बालाघाट सहित प्रभावित ब्लाकों में तैनात किया है।
जिले में 67 बांडेड मेडिकल आफिसर भेजे गए हैं। इनमें से 60 ने ज्वानिंग दे दी है। शेष सात मेडिकल आफिसर्स को नोटिस दिया गया है। नवीन पदस्थापना से प्रभावित क्षेत्रों में न केवल डाक्टरों की कमी दूर होगी, बल्कि हाल ही में बीमारी से बनी विपरित परिस्थितियों से निपटने में भी मदद मिलेगी।
डाॅ. शत्रुघ्न दाहिया, सीएमएचओ-बालाघाट।
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