
नईदुनिया प्रतिनिधि, बालाघाट। जिले के बैहर-बिरसा क्षेत्र में मलेरिया और मौसमी बीमारियों का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। ग्राम अतरिया आरामटोला निवासी गजेंद्र पिता विशाल मरकाम साढ़े 10 वर्ष मरकाम की गुरुवार की रात करीब 10 बजे ग्राम लूद के मसीहाटोला में मौत हो गई। बच्चे को मलेरिया होने पर उकवा के एक निजी क्लीनिक में झोलाछाप चिकित्सक से इलाज कराया गया, जिससे बालक ने दम तोड़ दिया।
जानकारी के अनुसार, गजेंद्र मरकाम अतरिया पंचायत के आरामटोला का निवासी था। वह तीन भाइयों में से छोटा था और पिछले कुछ महीनों से अपने माता-पिता के साथ मसीहाटोला में अपने मौसा के घर रह रहा था। पिछले कुछ दिनों से उसकी तबीयत खराब थी।
स्वजनों ने मंगलवार को उसका निजी तौर पर उपचार कराया गया था। गुरुवार को अचानक स्वास्थ्य बिगड़ने पर रात करीब 10 बजे उसने दम तोड़ दिया। बच्चे की मौत की सूचना मिलते ही उकवा पुलिस मौके पर पहुंची। शुक्रवार को शव का पोस्टमार्टम प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र उकवा में शाम करीब चार बजे पोस्टमार्टम के बाद शव स्वजनों को सौंपा।
पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। मृतक के उपचार को लेकर कथित झोलाछाप चिकित्सक का नाम भी सामने आ रहा है। बताया जा रहा है बालक की मौत के बाद झोलाछाप चिकित्सक फरार हो गया। बता दें कि क्षेत्र में अब तक पांच झोलाछाप चिकित्सकों के खिलाफ मामले दर्ज किए जा चुके हैं।
बैहर-बिरसा अंचल में बच्चों की मौतों के आंकड़ों को लेकर भी अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। गजेंद्र की मौत ने दुर्गम आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं, समय पर उपचार और बीमारी नियंत्रण की व्यवस्था पर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।
लूद के मसीहाटोला में एक बालक को मलेरिया होने पर उसके स्वजनों ने झोलाछाप चिकित्सक से इलाज कराया। जिससे बालक की मौत हो गई। इस मामले में जांच कर झोलाछाप चिकित्सक पर एफआइआर दर्ज की जाएगी।
कुमार सत्यम, कलेक्टर, बालाघाट।
यह भी पढ़ें- टीकाकरण में जबलपुर प्रदेश में 15वें पायदान पर, ग्रामीण क्षेत्र में प्रतिशत अधिक