
नईदुनिया प्रतिनिधि, बालाघाट। भ्रष्टाचार कर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने वालों पर जबलपुर ईओडब्ल्यू की कार्रवाई लगातार जारी है। लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन यंत्री के बाद अब ईओडब्ल्यू ने लांजी तहसील के नीमटोला में सहकारी समिति मनेरी के प्रबंधक के घर पर छापा मारा। गुरुवार सुबह से शुरू हुई इस कार्रवाई में प्रबंधक के पास आय से चार गुना अधिक संपत्ति मिली है। टीम ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
दस सदस्यीय टीम का नेतृत्व कर रहे डीएसपी मंजीत सिंह ने बताया कि सहकारी समिति मनेरी के प्रबंधक विलास चौरे के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति की शिकायत मिली थी। शिकायत की जांच के बाद कोर्ट से सर्च वारंट लेकर टीम बालाघाट पहुंची और नीमटोला स्थित उसके आवास पर दबिश दी। सुबह से देर शाम तक चली कार्रवाई में जो खुलासा हुआ, उसने सभी को चौंका दिया।
जांच में पता चला कि विलास चौरे ने अपनी पत्नी पदमा चौरे के नाम पर ट्रैवल्स का व्यवसाय शुरू कर रखा है। उसके पास से चार 50 सीटर बड़ी लग्जरी बसें, एक ट्रैवलर वाहन, चार लग्जरी कारें, चार दोपहिया वाहन और दो ट्रैक्टर मिले हैं। ट्रैक्टरों से किराए पर कृषि कार्य कराया जाता था। इन सभी वाहनों की कीमत करीब दो करोड़ रुपये आंकी गई है।
ईओडब्ल्यू टीम को तलाशी के दौरान बैंक ऑफ महाराष्ट्र, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और जिला सहकारी बैंक में तीन खाते मिले हैं, जिन्हें सीज कर लेनदेन की जांच की जा रही है। इसके अलावा चार एलआईसी पॉलिसी और एक निजी कंपनी की पॉलिसी के बांड मिले हैं, जिनकी भी जांच की जा रही है। टीम को पता चला कि पांच लाख रुपये में खरीदी गई जमीन पर करीब 50 लाख रुपये की लागत से आलीशान मकान बनाया गया है।
इसके अलावा 10 लाख रुपये की कृषि भूमि भी खरीदी गई है। घर परिसर में ही एक निजी जिम बनाया जा रहा है, जिसके लिए करीब 10 लाख रुपये के उपकरण खरीदे गए हैं। घर से जमीन, मकान और निवेश से जुड़े कई दस्तावेज भी मिले हैं। साथ ही पांच लाख का गोल्ड भी मिला है।
डीएसपी मंजीत सिंह ने बताया कि विलास चौरे मूल रूप से वारासिवनी क्षेत्र का रहने वाला है। उसकी नौकरी सहकारी समिति में दैनिक वेतनभोगी के रूप में शुरू हुई थी और धीरे-धीरे वह प्रबंधक के पद तक पहुंच गया। सेवा अवधि के हिसाब से उसकी कुल वैध आय 20 से 22 लाख रुपये के आसपास होनी चाहिए, लेकिन उसके पास मिली संपत्ति इससे चार गुना अधिक है।
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प्रारंभिक जांच में स्पष्ट हुआ है कि समिति में रहते हुए उसने पद का दुरुपयोग कर अवैध रूप से संपत्ति अर्जित की। ईओडब्ल्यू ने मामला दर्ज कर सभी दस्तावेज, बैंक खाते और वाहनों की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। जल्द ही उसकी अन्य चल-अचल संपत्तियों का भी पता लगाया जाएगा।