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मध्य प्रदेश के बैगा अंचल बालाघाट में विशेषज्ञ और स्टाफ की कमी से फैली महामारी

Epidemic in Balaghat: स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, बालाघाट जिले के बैहर और बिरसा विकासखंड में विशेषज्ञ चिकित्सकों के कुल आठ पद स्वीकृत हैं। हैरानी की बा...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Prashant Pandey
Publish Date: Sat, 10 Oct 2026 08:03:22 AM (IST)Updated Date: Sat, 10 Oct 2026 08:11:54 AM (IST)
मध्य प्रदेश के बैगा अंचल बालाघाट में विशेषज्ञ और स्टाफ की कमी से फैली महामारी
बीमारी से प्रभावित बैगा परिवार जिनके बच्चों को जिला अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती कराया गया था। - फाइल फोटो

HighLights

  1. एनजेओआरटी की रिपार्ट में खामियां उजागर
  2. सीएमएचओ ने कहा- अनुशंसा पर प्रभावित क्षेत्रों में कर रहे काम
  3. जून-जुलाई के माह में तेजी से फैली थी महामारी

नईदुनिया प्रतिनिधि, बालाघाट। बालाघाट जिले के बैहर व बिरसा अंचल में मलेरिया, खसरा सहित अन्य संक्रामक बीमारियों के चलते 32 बच्चों की मौत के मामले में केंद्र सरकार की नेशनल ज्वाइंट आउटब्रेक रिस्पांस टीम (एनजेओआरटी) की रिपार्ट ने प्रभावित क्षेत्रों में महामारी विशेषज्ञ सहित मेडिकल स्टाफ की कमी को उजागर किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, बालाघाट में बीमारी की निगरानी करने वाली रोग निगरानी प्रणाली पूरी तरह विफल साबित हुई है।

जून-जुलाई के माह में जब प्रभावित क्षेत्रों में महामारी अपने चरम पर थी, तब इसकी निगरानी के लिए कोई विशेषज्ञ नहीं था। इसके अलावा रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जिले में जनस्वास्थ्य प्रयोगशाला ही नहीं है, जहां संक्रामक बीमारी के फैलने, उसके प्रभाव का पता लगाया जा सके। एनजेओआरटी ने अगस्त 2026 में प्रभावित क्षेत्रों का मुआयना किया था और 16 सितंबर को कलेक्टर बालाघाट से अपनी रिपोर्ट साझा की थी।


सीएमएचओ ने कहा-महामारी नियंत्रक हैं पदस्थ

सीएमएचओ डॉ. शत्रुघ्न दाहिया ने बताया कि एनजेओआरटी की टीम अगस्त में बालाघाट आई थी। टीम ने विभाग को जो सुझाव अथवा अनुशंसा की थी, उसके अनुसार कार्य किए जा रहे हैं। इसमें घर-घर जाकर सर्वे करने, संदिग्ध बच्चों की जांच, उपचार सहित अन्य उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने कहा गया था।

सीएमएचओ डॉ. दाहिया के अनुसार, हर जिले में एक महामारी विशेषज्ञ होता है, लेकिन बालाघाट में नहीं है, लेकिन जिले में महामारी नियंत्रक व सर्विलांस अधिकारी के रूप में डा. प्रदीप गेडाम कार्य कर रहे हैं। सीएमएचओ ने बताया कि बालाघाट में महामारी विशेषज्ञ यानी एपिडेमियोलाजिस्ट के पद पर अल्का दुबे ने प्रभार संभाला था, लेकिन बाद में उन्हें भोपाल अटैच कर दिया गया।

विशेषज्ञ चिकित्सक के स्वीकृत सभी पद खाली

विडंबना है कि बालाघाट के दूरस्थ व वनांचल क्षेत्र में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी बनी हुई है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, बैहर और बिरसा विकासखंड में विशेषज्ञ चिकित्सकों के कुल आठ पद स्वीकृत हैं। हैरानी की बात है कि सभी आठ पद अब भी रिक्त हैं। इसके अलावा मेडिकल ऑफिसर और पैरामेडिकल स्टाफ के भी कई पद अब भी रिक्त हैं।

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सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला, केंद्र और राज्यों को नोटिस

बालाघाट जिले के बैहर-बिरसा क्षेत्र में बैगा आदिवासी बहुल गांवों में बच्चों की मौत का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। बच्चों की मौत, कुपोषण और संक्रामक बीमारियों से बचाव के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका पर शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जायमाल्या बागची व न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने केंद्र सरकार सहित संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा।

सुनवाई के दौरान पीठ ने मामले को गंभीर बताते हुए बच्चों की मौत पर चिंता जताई। याचिका बालाघाट निवासी अजब लाल लिल्हारे ने दायर की है। बता दें कि मामला हाई कोर्ट में भी लंबित है।

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