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MP में सौ साल पुराने मकान में मिले दुर्लभ सफेद उल्लू के चार बच्चे, वन विभाग ने किया रेस्क्यू

बालाघाट जिले के वारासिवनी नगर में रविवार को एक अनोखी घटना सामने आई, जब नगर जगदम्बा वार्ड क्रमांक 12 में स्थित एक सौ साल पुराने मकान को तोड़ने के दौरान...और पढ़ें

By Guneshwar SahareEdited By: Akash Sharma
Publish Date: Sun, 11 Jan 2026 06:09:41 PM (IST)Updated Date: Sun, 11 Jan 2026 06:15:22 PM (IST)
MP में सौ साल पुराने मकान में मिले दुर्लभ सफेद उल्लू के चार बच्चे, वन विभाग ने किया रेस्क्यू
वारासिवनी नगर में मकान की छत में मिले टायटो अल्बा प्रजाति के चार सफेद उल्लू के बच्चे।

HighLights

  1. टायटो अल्बा प्रजाति के दुर्लभ खलिहानी उल्लू
  2. वन विभाग ने किया त्वरित रेस्क्यू और स्वास्थ्य परीक्षण
  3. किसानों के लिए उपयोगी होते हैं खलिहानी उल्लू

नईदुनिया प्रतिनिधि, बालाघाट/वारासिवनी: वारासिवनी नगर के जगदम्बा वार्ड क्रमांक 12 में रविवार को उस समय कौतूहल का माहौल बन गया, जब एक सौ साल पुराने मकान को तोड़ने के दौरान छत में चार सफेद उल्लू के बच्चे मिले। ये उल्लू टायटो अल्बा प्रजाति के हैं, जिन्हें खलिहानी उल्लू के नाम से भी जाना जाता है। बताया जा रहा है कि इनकी उम्र करीब दो से तीन माह है।

मकान तोड़ते समय हुआ खुलासा

मकान मालिक उपेंद्र बांगरे ने बताया कि उनका मकान काफी पुराना हो चुका था और कवेलू की छत वाला था। जर्जर स्थिति के कारण मकान का नव निर्माण किया जाना था। इसी प्रक्रिया में जब छत हटाई जा रही थी, तभी उसमें चार उल्लू के बच्चे दिखाई दिए। इस अप्रत्याशित घटना की सूचना तुरंत वन विभाग को दी गई।


वन विभाग ने किया त्वरित बचाव

सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और चारों उल्लू के बच्चों को सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू कर वन विभाग कार्यालय लाया गया। यहां पशु चिकित्सक द्वारा उनका स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया। फिलहाल उल्लू के बच्चे वन विभाग की निगरानी में सुरक्षित रखे गए हैं और उनके भोजन व देखभाल की उचित व्यवस्था की जा रही है।

लोगों में दिखा उल्लुओं को देखने का उत्साह

पुराने मकान में सफेद उल्लू के बच्चे मिलने की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में लोग उन्हें देखने के लिए जमा हो गए। यह दृश्य लोगों के लिए बेहद दुर्लभ और आकर्षण का केंद्र बना रहा।

खलिहानी उल्लू किसानों के मित्र

वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट अभय कोचर ने बताया कि टायटो अल्बा प्रजाति के उल्लू को सफेद या खलिहानी उल्लू कहा जाता है। इनके चेहरे का आकार दिल जैसा होता है, जबकि चोंच और आंखें अपेक्षाकृत छोटी होती हैं। ये बड़ी संख्या में चूहों का शिकार करते हैं, जिससे किसानों की फसलों को नुकसान से बचाया जा सकता है।

संरक्षण की आवश्यकता

अभय कोचर ने चिंता जताते हुए बताया कि देश में उल्लुओं का उपयोग जादूटोना के लिए किए जाने और उनके प्राकृतिक आवास नष्ट होने के कारण सभी प्रजातियों के उल्लू संकट में हैं। ऐसे में इनका संरक्षण बेहद जरूरी है।

वन विभाग की निगरानी में उल्लू

वन परिक्षेत्र अधिकारी क्षत्रपाल सिंह जादौन ने बताया कि चारों सफेद उल्लू फिलहाल वन विभाग की निगरानी में हैं। डीएफओ नित्यानंदम एल के मार्गदर्शन में उनकी देखरेख की जा रही है। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशानुसार दो से चार दिनों के भीतर इन्हें भोपाल या अन्य उपयुक्त स्थान पर भेजने की तैयारी की जा रही है।

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