• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
  • मेरी खबरें
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • गणेशोत्‍सव 2026
  • हनुमान अंश
  • Mutual Funds मास्टरी
  • AI बूटकैंप
  • मध्‍य प्रदेश की खबरें
  • राशि परिवर्तन
  • मानसून
  • स्वच्छ जल
  • होम
  • मध्य प्रदेश
  • बालाघाट

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 09, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

'रक्षाबंधन पर आती है आपकी बहुत याद, लेकिन...', पाकिस्तान की जेल में बंद भाई के नाम बहन का भावुक खत

एमपी के बालाघाट का एक शख्स 6 साल से पाकिस्तान की जेल में बंद है। अब रक्षाबंधन पर बहन ने अपने भाई के नाम एक पत्र लिखा और सरकार से इस पत्र को उसके भाई त...और पढ़ें

By Dheeraj BelwalEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Sat, 09 Aug 2025 06:25:20 PM (IST)Updated Date: Sat, 09 Aug 2025 06:25:20 PM (IST)
'रक्षाबंधन पर आती है आपकी बहुत याद, लेकिन...', पाकिस्तान की जेल में बंद भाई के नाम बहन का भावुक खत
अपने घर पर भाई के नाम चिट्ठी लिखती बहन संघमित्रा खोब्रागड़े।

HighLights

  1. पाकिस्तान की जेल में बंद भाई को बहन ने भेजा बेहद भावुक खत
  2. 6 साल से लाहौर की सेंट्रल जेल में कैद है तिरोड़ी का प्रसन्नजीत
  3. बहन ने भारत सरकार से लगाई भाई तक राखी पहुंचाने की गुहार

नईदुनिया प्रतिनिधि, बालाघाट। देशभर में शनिवार को मनाया गया रक्षाबंधन का पर्व इस साल भी तिरोड़ी के महकेपार में रहने वाली संघमित्रा खोब्रागड़े के लिए नाउम्मीदी भरा रहा। दरअसल संघमित्रा का छोटा भाई प्रसन्नजीत रंगारी पिछले छह साल से पाकिस्तान की कोट लखपत सेंट्रल जेल में बंद है।

वर्षों से संघमित्रा अपने भाई की कलाई पर राखी नहीं बांध पाई है। शनिवार को संघमित्रा ने पहली बार भाई प्रसन्नजीत के लिए भावुक चिट्ठी लिखकर लिफाफे में राखी तो भेज दी, लेकिन पहलगाम हमले के बाद से पाकिस्तान में चिट्ठी अथवा कूरियर सेवा बंद होने के कारण संघमित्रा का ये अरमान अधूरा रह गया।


प्यार से भेजी राखी भारत सरकार कुबूल करे

खत में संघमित्रा ने भारत सरकार से राखी स्वीकार करने और इसे पाकिस्तान तक पहुंचाने का निवेदन किया है। संघमित्रा ने लिखा-भाई, रक्षाबंधन पर बहुत याद करती हूं। मैं तुम्हें राखी भेजना चाहती हूं, लेकिन तू भारत से बहुत दूर है। प्यार से भेजी राखी भारत सरकार कुबूल करे और पाकिस्तान के लाहौर कोट लखपत जेल भेजकर बहन का भाई को राखी बांधने का अरमान पूरा करें।

इसके अलावा उन्होंने लिखा, 'हर बहन अपने भाई को राखी बांधती है, लेकिन मैं बदनसीब अपने भाई को राखी नहीं बांध सकती। मां तुम्हें बहुत याद करती है और तेरा इंतजार करती है। तुम्हारी भांजियां भी तुम्हें याद करती हैं और देखना चाहती हैं।’

प्रसन्नजीत को वापस लाने के हर प्रयास विफल

प्रसन्नजीत के पिता स्व. लोपचंद रंगारी ने कर्ज लेकर बेटे को जबलपुर के गुरु रामदास खालसा इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलॉजी से बी-फार्मा की पढ़ाई कराई। पढ़ाई होते ही वर्ष 2011 में एमपी स्टेट फार्मेसी काउंसिल में पंजीयन भी कराया, लेकिन प्रसन्नजीत की मानसिक स्थिति बिगड़ने पर वह घर लौट आया।

ये भी पढ़ें- ग्वालियर में पुलिसकर्मी की बेकाबू कार का तांडव, नशे में आधा दर्जन से ज्यादा लोगों को कुचला

बार-बार घर से भटकने के बाद एक दिन वह भटकते हुए पाकिस्तान पहुंच गया। उसे वहां गिरफ्तार कर कोट लखपत सेंट्रल जेल में बंद कर दिया गया। उसे छुड़ाने और भारत लाने के लिए प्रसन्नजीत का परिवार कई जतन कर चुका है, लेकिन अब तक उनके प्रयासों का सफलता नहीं मिली है।

भाई को राखी बांधने की ली सौगंध

संघमित्रा ने कहा कि मेरा भाई जिंदा है, इसलिए मैं किसी और को राखी नहीं बांधूंगी। उन्होंने सौगंध ली है कि वह तब तक किसी को राखी नहीं बांधेंगी, जब तक वह अपने भाई को पाकिस्तान की जेल से छुड़वाकर न ले आएं। संघमित्रा ने बताया कि सितंबर 2021 में पाकिस्तान से 25 वर्ष बाद रिहा हुए जम्मू-कश्मीर के कटवा निवासी कुलदीप सिंह ने ही उनके परिवार को प्रसन्नजीत के जेल में बंद होने की जानकारी दी थी। तब से संघमित्रा अपने भाई को छुड़वाने के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रही है।