
योगेश कुमार गौतम, नईदुनिया बालाघाट। छत्तीसगढ़ की झीरम घाटी में 13 वर्ष पहले कांग्रेस नेताओं का नरसंहार करने वाले 250 माओवादियों में बालाघाट में आत्मसमर्पण करने वाला 77 लाख का इनामी माओवादी सोमा सोडी उर्फ सुरेंद्र उर्फ कबीर भी था।
हत्याकांड के 13 साल बाद भी सुरेंद्र को वो मंजर याद है, लेकिन अब वह सामान्य जीवन बसर करना चाहता है। उसने मध्य प्रदेश की नक्सल आत्मसमर्पण पुनर्वास सह राहत नीति 2023 से नया जीवन शुरू करने की इच्छा जताई है।
‘नईदुनिया’ से चर्चा में सुरेंद्र ने बताया कि वह अब मुख्यधारा में लौटकर अच्छी जिंदगी जीना चाहता है। वह अपनी उस बेटी के सपनों को पंख देना चाहता है, जिसकी सिर से दो वर्ष पहले मां का साया उठ गया था। दरअसल, सुरेंद्र की पत्नी साजंती उर्फ क्रांति भी माओवादी थी, जो एक अप्रैल 2024 को लांजी के पितकोना-केराझेरी के जंगल में हुई मुठभेड़ में मारी गई थी।
कभी सुरेंद्र का भी परिवार था, लेकिन जल, जंगल और जमीन की लड़ाई ने सुरेंद्र और उसकी पत्नी साजंती को नफरत और हिंसा की राह पर ला दिया। इसका खामियाजा उनकी बेटी शांति को भुगतना पड़ा। सुरेंद्र और पत्नी साजंती छत्तीसगढ, महाराष्ट्र और बालाघाट के जंगलों में दर-दर भटकते रहे और बेटी शांति की परवरिश रिश्तेदारों के जिम्मे आ गई।
जब शांति नवमीं कक्षा में थी तभी उसके सिर से मां (साजंती) का साया छिन गया, लेकिन शांति की मजबूत इच्छाशक्ति ने ही दो वर्ष पहले मां के गुजर जाने के बाद भी उसे पढ़ाई से अलग नहीं किया। वर्तमान में शांति कक्षा 11वीं में पढ़ रही है और अपने रिश्तेदारों के साथ सुकमा छग के सुकमा जिले के गुल्लापल्ली गांव में रहती है।
पिछले वर्ष नवंबर-दिसंबर में बालाघाट में अलग-अलग दलम के 13 माओवादियों ने बालाघाट पुलिस के सामने हथियार डालकर हिंसा का रास्ता छोड़ा था। इनमें से दो माओवादियों को बालाघाट पुलिस ने उनके गृह राज्य की पुलिस को सौंप चुकी है। सुरेंद्र भी अब घर लौटना चाहता है।
सुरेंद्र ने बताया कि मप्र की नक्सली आत्मसमर्पण पुनर्वास सह राहत नीति पर पूरा भरोसा है। उस पर घोषित इनाम सहित नीति के अलग-अलग प्राविधानों के तहत मिलने वाली राशि से वह नया जीवन शुरू करना चाहता है। बता दें कि सुरेंद्र का छोटा भार्ठ सूडी भी छग में माओवादी के रूप में सक्रिय था, लेकिन उसने हथियार त्यागकर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया था। सूडी वर्तमान में छग के डीआरजी में पदस्थ है।
जानकारी के अनुसार, बालाघाट में सरेंडर करने वाले शेष माओवादियों के बैंक खाते, आधार कार्ड सहित अन्य दस्तावेजों के निर्माण की प्रक्रिया हो चुकी है। सभी माओवादी अब अपने घर लौटना चाहते हैं। बालाघाट पुलिस भी कानूनी प्रक्रिया के आधार पर माओवादियों को उनके गृह राज्य भेजने की तैयारी कर रही है। गौरतलब है कि इस महीने राकेश होड़ी को महाराष्ट्र पुलिस और लाल सिंह मरावी को छत्तीसगढ़ पुलिस काे सौंपा गया था।