
नईदुनिया प्रतिनिधि, बालाघाट। मोहन भागवत ने कहा - जहां प्रत्यक्ष कार्य हो रहा हो, वहां ज्यादा बोलने की जरूरत नहीं होती है। भाषण महत्वपूर्ण नहीं होता कार्य महत्वपूर्ण होता है।

आगे बोले- बालासाहेब देवरस और भाऊराव देवरस का संपूर्ण जीवन राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित रहा। भारत की मिट्टी की संस्कृति का ही गुण है कि स्मित मछार ने चाकू का घाव लगने के बाद भी विमान के सभी यात्री सुरक्षित रहे, इसलिए उन्होंने अपने प्राण की परवाह किए बगैर उनको बचाया। ये गुण लोगों को जीवन की अंधाधुन दौड़ में याद नहीं रहता है।
.jpeg)
संघ प्रमुख मोहन भागवत दोपहर 12 बजे लांजी के कारंजा पहुंचे। माधव नेत्रालय नेत्र संस्थान में विश्राम करके 2.30 बजे लोकार्पण कार्यक्रम में उपस्थित हुए।

लोकार्पण समारोह में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने बालासाहेब देवरस और भाऊराव देवरस के छायाचित्र पर माल्यार्पण किया।

संघ लोगों की गुणवत्ता बढ़ाता है संघ लोगों में संगठन कुशलता बढ़ता है लोगों को मातृभूमि भक्ति की प्रेरणा देता है। संघ सबको अपना मानकर सबकी सेवा करने की आदत लगाता है। यही काम बालासाहेब देवरस और भाऊराव देवरस ने जीवनभर किया।
संघ जिन लोगों को तैयार करता है, वो स्वायत्त होकर काम करते हैं, लेकिन संघ इसका श्रेय नहीं लेता। स्वयंसेवक यानी जो स्वयं होकर सेवा करे। स्वयंसेवक, सेवा करके मेवा नहीं खाते। शिव भाव से जीव की सेवा करते हैं। ऐसे ही लोग संघ में तैयार होते हैं।यह भी पढ़ें- जबलपुर के नया मोहल्ला में भरभराकर गिरा कच्चा मकान, मलबे में फंसे 15 लोग; गूंजती रही चीख