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एमपी में एक हफ्ते में 9 गांव हुए नशा मुक्त, 19 हजार से अधिक आबादी में लौटीं खुशियां, परिवार में कम हुए कलह व विवाद

गांवों को नशा मुक्त बनाने की मुहिम में ग्रामीण खुद पुलिस को बुलाकर जन चौपाल लगाने का आग्रह कर रहे हैं। इसका असर यह है कि पिछले एक सप्ताह में नौ गांवों...और पढ़ें

By Guneshwar SahareEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Sun, 04 Oct 2026 04:57:07 PM (IST)Updated Date: Sun, 04 Oct 2026 04:57:07 PM (IST)
एमपी में एक हफ्ते में 9 गांव हुए नशा मुक्त, 19 हजार से अधिक आबादी में लौटीं खुशियां, परिवार में कम हुए कलह व विवाद
बालाघाट के कटंगी में नशामुक्त गांवों की अनोखी पहल।

HighLights

  1. बालाघाट के कटंगी में नशामुक्त गांवों की अनोखी पहल
  2. कटंगी तहसील के 9 गांवों में नशा मुक्ति का शंखनाद
  3. जन चौपालों से 19 हजार से अधिक आबादी में खुशियां

नईदुनिया प्रतिनिधि, बालाघाट/कटंगी। बालाघाट जिले की कटंगी तहसील में नशे के खिलाफ अब पुलिस के साथ ग्रामीण भी मोर्चे पर उतर आए हैं। गांवों को नशा मुक्त बनाने की मुहिम में ग्रामीण खुद पुलिस को बुलाकर जन चौपाल लगाने का आग्रह कर रहे हैं। इसका असर यह है कि पिछले एक सप्ताह में नौ गांवों को नशा मुक्त किया गया है।

सिरपुर, नहलेसरा, चिकमारा, लोहमारा, कोड़मी, मुंदीवाड़ा, अतरी, लखनवाड़ा और टेकाड़ी में महिलाओं और पुरुषों ने मिलकर जागरूकता रैलियां निकालीं और नशे के खिलाफ माहौल तैयार किया। ये गांव नशा मुक्त होने से 9904 मकानों की 19 हजार 430 से अधिक की आबादी में खुशियां लौट आई हैं।


रात में जन चौपाल और समितियों का गठन

ग्रामीण अंचलों में अधिकांश लोग खेती-किसानी और मजदूरी करने वाले लोग रहते हैं। पुलिस भी इसलिए रात्रि के समय गांवों में पहुंचकर सामुदायिक भवन, मंदिर परिसर में चौपाल के जरिए नशे के दुष्प्रभाव और इसे छोड़ने के फायदे बता रही है।

बच्चों और युवाओं को सही शिक्षा व संस्कार देने तथा गांव का वातावरण साफ-सुथरा रखने के लिए ग्रामीणों को समझाइश देने का काम किया जा रहा है। सरपंचों के नेतृत्व में महिला और पुरुष समितियां गठित की जा रही हैं। कटंगी पुलिस ने सिरपुर और जमुनिया में अस्थायी कैंप भी शुरू किए हैं, जहां ग्रामीणों को लगातार जागरूक करने के साथ वाहन चेकिंग की जा रही है।

इसका असर ऐसा होने लगा है कि गांवों से लोग पुलिस को खुद फोन कर बुलाकर अपने गांव को नशा मुक्त बनाने तैयार हो रहे हैं। पुलिस भी ग्रामीणों के लिए चौबीस घंटे सेवाएं देने तैयार है। इन नौ गांवों में पहले शराब बिक्री होने से युवा पीढ़ी नशे की चपेट में आने लगी थी। नशे की वजह से परिवार में वाद-विवाद बढ़ने लगे थे।

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इतनी है गांवों की जनसंख्या

  • क्षेत्र के सिरपुर में 1800 मकानों में 3600 लोग निवास करते हैं, जबकि नहलेसरा में 1000 मकानों पर 2200 लोग हैं।
  • चिकमारा में 1200 मकानों में 2100 लोग, लोहमारा में 965 मकानों में 1665 लोग, कोड़मी में 771 मकानों में 1400 लोग, और मुंदीवाड़ा में 900 मकानों में 1800 लोग रहते हैं।
  • अतरी में 1200 मकानों में 2200 लोग, लखनवाड़ा में 1000 मकानों में 2100 लोग, तथा टेकाड़ी में 1068 मकानों में 2365 लोग निवास करते हैं।

पंचायत में नशा मुक्त समिति का गठन किया गया है। जिसमें महिलाएं व पुरूष भी शामिल है। पुलिस रात्रि में आकर ग्रामीणों की चौपाल लेकर नशा नहीं करने के लिए समझाइश दे रही है। इसका असर यह हुआ कि गांव नशा मुक्त हो गया है। नशा मुक्त गांव होने से अपराध पर भी अंकुश लगेगा।- अनिता गेड़ाम, सरपंच, ग्रापं, चिकमारा।

पहले गांव में कुछ लोग शराब बेचते थे, इससे युवा पीढ़ी नशे की चपेट में आने लगी थीं। सभी लोग गांव को नशा मुक्त बनाने तैयार हुए। जिसके बाद पुलिस को बुलाकर चौपाल के जरिए शराब से होने वाले नुकसान के बारे में बताया गया। नशा मुक्त गांव होने से अब शांति का माहौल है।- विवेकानंद हरदे, सरपंच, ग्रापं कोड़मी।

थाना क्षेत्र के 23 गांवों में चौपाल लगाए है, जिसमें से नौ गांवों में पूरी तरह से मुक्त हो गए है। सिरपुर और जमुनिया में अस्थायी कैंप लगाकर ग्रामीणों को शराब से होने वाले दुष्परिणाम के बारे में बताया गया। कुछ गांव में ग्रामीण भी नशा मुक्ति समिति बनाकर नशे से दूर रहना चाहते है। ग्रामीणों को हमारी ओर से चौबीस घंटे सेवा प्रदान की जा रही है।- धर्मेंद्र कुशराम, थाना प्रभारी, कटंगी।