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बालाघाट में सरेंडर माओवादी सुरेंद्र बोला-टारगेट महेंद्र कर्मा थे; योजना में कांग्रेसि‍यों की हत्या नहीं थी वो निर्दोष थे

फायरिंग रुकने के बाद महेंद्र को हमने जिंदा पकड़ा था, फिर हमारे समूह ने उनकी हत्या की थी। दूसरे समूह ने कांग्रेस के बड़े नेताओं की हत्या कर दी। अन्य सा...और पढ़ें

By Yogesh Kumar GautamEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
Publish Date: Fri, 18 Sep 2026 08:20:04 PM (IST)Updated Date: Fri, 18 Sep 2026 08:20:04 PM (IST)
बालाघाट में सरेंडर माओवादी सुरेंद्र बोला-टारगेट महेंद्र कर्मा थे; योजना में कांग्रेसि‍यों की हत्या नहीं थी वो निर्दोष थे
2016 से बालाघाट में सक्रिय और कान्हा भाेरमदेव डिवीजन का प्रमुख रहा सोमा सोडी उर्फ सुरेंद्र उर्फ कबीर।

HighLights

  1. तीन घंटे चली फायरिंग के बाद महेंद्र को जिंदा पकड़ा था, फिर की थी हत्या
  2. हत्याकांड में 77 लाख का इनामी सोमा सोडी उर्फ सुरेंद्र उर्फ कबीर भी शामिल था
  3. झीरम हत्याकांड की योजना दलम के 20 बड़े माओवादियों ने बनाई थी

योगेश कुमार गौतम, नईदुनिया, बालाघाट। छत्तीसगढ़ की झीरम घाटी में कांग्रेस के बड़े नेताओं सहित 29 लोगों के नरसंहार के 13 साल बाद एनआइए कोर्ट ने दस माओवादियों को फांसी की सजा सुनाई है। इसके बाद ये मामला फिर चर्चाओं में है।

बालाघाट पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया था

हत्याकांड में 77 लाख का इनामी सोमा सोडी उर्फ सुरेंद्र उर्फ कबीर भी शामिल था, जिसने दिसंबर 2025 को बालाघाट पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया था। झीरम कांड में आए फैसले पर ‘नईदुनिया’ ने सुरेंद्र से बातचीत की।

महेंद्र को दरभा डिवीजन ने खत्म करने की कई बार कोशिश की थी

सुरेंद्र ने नरसंहार की पूरी कहानी बताई और खुलासा किया कि छत्तीसगढ़ में माओवाद के खिलाफ ‘सलवा जुडूम’ (शांति यात्रा) शुरू करने वाले कांग्रेस नेता महेंद्र कर्मा उनके टारगेट में थे। महेंद्र को दरभा डिवीजन ने खत्म करने की कई बार कोशिश की थी।


झीरम हत्याकांड की योजना दलम के 20 बड़े माओवादियों ने बनाई थी

आरनपुर घाटी, बीजापुर-दंतेवाड़ा के बीच घने जंगलों में हमने कई बार ब्लास्ट किए, लेकिन हर बार महेंद्र बच निकले। झीरम हत्याकांड की योजना दलम के 20 बड़े माओवादियों ने बनाई थी। घटना में करीब 250 माओवादी थे।

टारगेट में महेंद्र कर्मा और सलवा जुडूम से जुड़े लोग थे

सभी अलग-अलग समूह में घाटी के चारों तरफ फैल गए थे। मैं जिस समूह में था, उसके टारगेट में महेंद्र कर्मा और सलवा जुडूम से जुड़े लोग थे। कांग्रेस नेताओं की हत्या की कोई योजना नहीं थी, वो निर्दोष थे। उनकी हत्या का मुझे दुख है।

हमने पहले से माइंस बिछा रखी थी

सुरेंद्र ने आगे बताया- झीरम घाटी में लगभग तीन घंटे तक फायरिंग चली। हमने पहले से जगह-जगह माइंस बिछाकर रखी थी, इसलिए घटना स्थल तक फोर्स नहीं पहुंच सकी। हमें कवर देने के लिए हमारे साथी घाटी को चारों तरफ से घेरे हुए थे।

महेंद्र कर्मा को टारगेट कर मारा गया

फायरिंग रुकने के बाद महेंद्र को हमने जिंदा पकड़ा था, फिर हमारे समूह ने उनकी हत्या की थी। दूसरे समूह ने कांग्रेस के बड़े नेताओं की हत्या कर दी। अन्य साथियों ने कांग्रेसियों को क्यों मारा, मुझे इसकी जानकारी नहीं थी। मैं उस जगह से लगभग एक किमी दूर था, जहां महेंद्र कर्मा को टारगेट कर मारा गया।

फैसला एकतरफा है, जनता को न्याय मिलना चाहिए

सुरेंद्र ने एनआइए के फैसले को एकतरफा बताते हुए कहा- वर्ष 2005 में छग में शुरू हुए सलवा जुडूम की आड़ में बस्तर और दंतेवाड़ा में ग्रामीणों का दमन हुआ था। उन पर अत्याचार हुए। कई परिवार बर्बाद हो गए। इसी वजह से वहां का युवा हथियार उठाना चाहता था।

सरकार को पीड़ित परिवारों को मुआवजा देना था

सरकार को कर्मा परिवार की संपत्ति की जांच करनी चाहिए। सरकार को पीड़ित परिवारों को मुआवजा देना था। सुरेंद्र ने बताया कि झीरम घाटी मामले में शामिल अधिकतर माओवादी एनकाउंटर में मारे जा चुके हैं, तो कइयों ने सरेंडर कर दिया। झीरम में घटना के बाद हमने फोर्स के हथियार ले लिए थे।

1995 में दरभा डिवीजन में आया था सुरेंद्र

45 वर्षीय सोमा सोडी उर्फ सुरेंद्र ने 1995 में महज 14 वर्ष की उम्र में हथियार उठा लिया था। वह सालों तक दरभा डिवीजन में सदस्य के रूप में सक्रिय रहा और कई बड़ी माओवादी घटनाओं को अंजाम दिया। वह कुख्यात और शीर्ष माओवादी कमांडर रहा।

कान्हा भाेरमदेव डिवीजन का प्रमुख व सक्रिय रहा

2016 से वह बालाघाट में सक्रिय रहा और कान्हा भाेरमदेव डिवीजन का प्रमुख रहा। वह मप्र, छग और महाराष्ट्र राज्याें में मोस्ट वांटेड था। उस पर तीनों राज्यों की पुलिस ने कुल 77 लाख का इनाम घोषित किया था। छह दिसंबर 2025 को उसने एके-47 और अपने नौ साथियों के साथ बालाघाट में आत्मसमर्पण किया था।

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