
नईदुनिया प्रतिनिधि, बालाघाट। वनांचल क्षेत्र में मलेरिया, कुपोषण के साथ एस्पिरेशन (श्वासनली में दूध, पानी या अनाज फंसना) से मासूम बच्चों की मौत के मामले बढ़ रहे हैं। सोमवार को बिरसा की घुम्मुर पंचायत के खैरटोला (चिखाली) में डेढ़ साल की परदेसी पिता समारू मेरावी की मौत हो गई।
समारू ने स्वास्थ्य अधिकारियों को बताया कि रविवार रात बेटी को हल्की खांसी आई थी। सोमवार सुबह सात बजे मां उसे दूध पिला रही थी, तभी लगभग एक घंटे तक उसे लगातार खांसी आई और लगभग नौ बजे उसने दम तोड़ दिया।
सीएमएचओ डॉ. शत्रुघ्न सिंह दाहिया ने बताया कि चिकित्सा दल ने मृतका परदेसी की 23 और 24 अक्टूबर को जांच की थी। जांच में वह चिकित्सकीय रूप से स्वस्थ पाई गई, उसे बुखार, खांसी, जुकाम या त्वचा पर चकत्ते नहीं थे। टीकाकरण रिकॉर्ड के अनुसार भी बच्ची को पेंटावैलेंट टीके और खसरा-रूबेला टीके लगाए गए थे। डॉ. दाहिया ने बताया कि दूध पीते समय खांसी होने की जानकारी के आधार पर, दूध पीते समय एस्पिरेशन को एक संभावित कारण माना जा सकता है।
सोमवार को पोस्टमार्टम के बाद शव स्वजन को सौंप दिया गया। मौत के वास्तविक कारणों की जांच की जा रही है। बता दें कि 23 अक्टूबर को खैरटोला में ही तीन वर्षीय रेखा की मौत हो गई थी। फिलहाल, उसकी मौत का कारण अब अज्ञात है।
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