
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति को अनिवार्य कर दिया गया है, लेकिन विभाग की सुस्ती के चलते करीब छह हजार नए प्राथमिक शिक्षकों की यूनिक आईडी और एम्प्लॉई कोड अभी तक जनरेट नहीं हो पाए हैं।
जुलाई माह में भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद शिक्षकों को विभिन्न स्कूल आवंटित कर दिए गए थे। विभाग के तय शेड्यूल के मुताबिक अगस्त तक सभी नए शिक्षकों की आईडी बन जानी चाहिए थी, लेकिन तीन महीने बीत जाने के बाद भी लगभग छह हजार मामले लंबित पड़े हैं।
प्रदेश भर में कुल 11,398 प्राथमिक शिक्षकों को नियुक्त किया गया था। इनमें से अब तक केवल पांच हजार शिक्षकों की ही आईडी बन पाई है, जिसके कारण हजारों नवनियुक्त शिक्षक मानसिक रूप से परेशान हैं। दीपावली का त्योहार नजदीक है और आईडी न होने के कारण इन शिक्षकों का वेतन भी जारी नहीं हो पा रहा है। ग्वालियर संभाग सहित कई अन्य जिलों में आईडी निर्माण का कार्य बेहद धीमी गति से चल रहा है, जहां केवल 40 प्रतिशत काम ही पूरा हो सका है। फिलहाल ये शिक्षक स्कूलों में रजिस्टर पर ही अपनी उपस्थिति दर्ज कर रहे हैं।
शिक्षकों के लिए 'हमारे शिक्षक ऐप' पर ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराने के लिए यूनिक आईडी का होना अनिवार्य है। यह आईडी न केवल शिक्षकों के विभागीय रिकॉर्ड से जुड़ती है, बल्कि उनकी दैनिक ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था का मुख्य आधार भी है। इसके बिना न तो एम्प्लॉई कोड जनरेट हो पा रहा है और न ही ट्रेजरी कोड बन रहा है, जिस वजह से इन शिक्षकों का वेतन भुगतान भी पूरी तरह से अटक गया है।
प्रदेश के विभिन्न जिलों में यूनिक आईडी बनाने की प्रगति रिपोर्ट काफी असमान है। कुछ जिलों में काम तेजी से हुआ है, तो कई जिले अभी भी काफी पीछे हैं। सबसे कम प्रगति वाले जिले: भिंड, टीकमगढ़, बैतूल और धार जिलों में नए शिक्षकों की यूनिक आईडी बनाने का काम सबसे कम हुआ है। अधिक लंबित मामलों वाले प्रमुख जिले: शिवपुरी में 658, छतरपुर में 654 और भिंड में 334 शिक्षकों की आईडी अभी भी लंबित हैं।
संभागवार स्थिति: भोपाल संभाग में 20 प्रतिशत शिक्षकों की आईडी नहीं बनी है। इसके विपरीत, इंदौर में 60 प्रतिशत, जबलपुर में 55 प्रतिशत, डिंडोरी में 94 प्रतिशत और मंदसौर में सबसे बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए 96 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। झाबुआ और बड़वानी में भी 88 प्रतिशत से अधिक कार्य संपन्न हो चुका है, जबकि ग्वालियर संभाग में पेंडेंसी अधिक है।
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प्रदेशभर में शिक्षकों की यूनिक आईडी बनाने का काम तेजी से चल रहा है। करीब एक से डेढ़ हजार शिक्षकों की आईडी लंबित है। दीपावली तक पूरा कर लिया जाएगा। - अभिषेक सिंह, आयुक्त, लोक शिक्षण