
नईदुनिया प्रतिनिधि, वारासिवनी। जनपद पंचायत वारासिवनी के नवीन कार्यालय भवन के भूमिपूजन कार्यक्रम में सोमवार को उस समय विचित्र स्थिति निर्मित हो गई, जब क्षेत्रीय विधायक विवेक 'विक्की' पटेल प्रोटोकॉल के उल्लंघन से नाराज होकर मंच के बजाय जनता के बीच जाकर बैठ गए। अधिकारियों की भारी चूक और आमंत्रण पत्र में स्थानीय जनप्रतिनिधियों के नाम गायब होने पर विधायक का यह मौन विरोध कार्यक्रम स्थल पर चर्चा का विषय बना रहा।
विवाद की मुख्य जड़ प्रशासन द्वारा छपवाया गया वह आमंत्रण पत्र था, जिसमें प्रोटोकॉल की धज्जियां उड़ाई गई थीं। कार्ड में मुख्य अतिथि के रूप में केवल मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल का नाम दर्ज था। ताज्जुब की बात यह थी कि इसमें न तो क्षेत्रीय विधायक का नाम था, न सांसद का और न ही जनपद व जिला पंचायत अध्यक्ष का। यहां तक कि कार्यक्रम की अध्यक्षता के लिए भी किसी का नाम नहीं दिया गया था। अपने और अन्य जनप्रतिनिधियों के इस अपमान से क्षुब्ध होकर विधायक पटेल ने भूमिपूजन कार्यक्रम से दूरी बना ली और सीधे पंडाल में आम जनता के बीच कुर्सी लगाकर बैठ गए।
विधायक को जनता के बीच बैठा देख अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए। उन्हें मनाने की कोशिशें नाकाम रहीं, जिसके बाद मंच पर मौजूद मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने खुद मोर्चा संभाला। मंत्री ने सार्वजनिक रूप से मंच से विधायक को आमंत्रित किया। पहले तो उन्होंने इनकार किया, लेकिन जब मंत्री ने दोबारा आग्रह किया, तो वह मंच पर पहुंचे। मंच पर पहुंचकर विधायक ने मंत्री से अधिकारियों की कार्यशैली और प्रोटोकॉल के उल्लंघन की सीधे शिकायत की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वे केवल मंत्री जी का सम्मान रखने के लिए कार्यक्रम में उपस्थित हुए हैं।
कार्यक्रम के दौरान अव्यवस्था का आलम यहीं नहीं थमा। मंच पर सांसद भारती पारधी, कटंगी विधायक गौरव सिंह पारधी, पूर्व मंत्री प्रदीप जायसवाल और जिला पंचायत अध्यक्ष सम्राट सिंह सरसवार जैसे दिग्गज मौजूद थे, लेकिन उद्बोधन का अवसर सीमित रखा गया। हैरानी की बात यह रही कि जिस जनपद पंचायत के भवन का भूमिपूजन था, उसकी अध्यक्ष माया उइके को भी बोलने का मौका नहीं दिया गया। पूरे कार्यक्रम में केवल विधायक विवेक पटेल, सांसद भारती पारधी और अंत में मुख्य अतिथि मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल का ही संबोधन हुआ।
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वारासिवनी जनपद के इस महत्वपूर्ण सरकारी कार्यक्रम में जिस तरह से जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा की गई, उसने प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। कार्यक्रम का समापन जिला पंचायत अध्यक्ष द्वारा आभार प्रदर्शन के साथ हुआ, लेकिन अधिकारियों की इस 'चूक' ने सरकार और जनप्रतिनिधियों के बीच के समन्वय की कमी को सार्वजनिक रूप से उजागर कर दिया।