
मुरारी सोनी, नईदुनिया, ओझर/बड़वानी। आखिरकार क्षेत्र के ग्रामीणों व राहगीरों को बायपास सड़क मिलने का रास्ता साफ होता नजर आ रहा है। अनुपूरक बजट में मंजूरी मिलने के बाद लोक निर्माण विभाग ने बायपास के प्रस्ताव को वित्तीय स्वीकृति के लिए प्रदेश की एसएससी (स्टैंडिंग फाइनेंस कमेटी) को भेज दिया है।
समिति से स्वीकृति मिलते ही जल्द ही टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इस बायपास सड़क की कनेक्टिविटी सीधे तौर पर खरगोन जिले के गांवों के साथ नागलवाड़ी से नेशनल हाइवे तक हो जाएगी। इसके बनने से ओझर गवाघाटी के संकरे रास्ते और आए दिन लगने वाले जाम की परेशानियों से क्षेत्रवासियों को मुक्ति मिलने की उम्मीद जगी है।
लगभग 20 वर्षों से गांव का रहवासी क्षेत्र आए दिन जाम की समस्या से जूझ रहा है। यहां की ढलानयुक्त संकरी सड़क पर कई बड़ी दुर्घटनाएं भी हो चुकी हैं, जिनमें लोगों की संपत्तियों को नुकसान पहुंचा है। यद्यपि हादसों में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन कई लोग चोटिल जरूर हुए हैं।
जाम की समस्या व नागरिकों द्वारा की जा रही बायपास की मांग को नईदुनिया वर्षों से प्रमुखता से उठाता रहा है। सांसद गजेंद्र सिंह पटेल की पहल पर दो मार्च को जुलवानिया भोंगर्या मेले में आए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यहां बायपास निर्माण की घोषणा की थी।
बायपास बनने से प्रसिद्ध तीर्थ स्थल शिखरधाम नागलवाड़ी आने वाले श्रद्धालुओं को आवागमन में बड़ी सुविधा मिलेगी। साथ ही नागलवाड़ी सब्जी हब का ट्रैफिक भी बिना गांव में प्रवेश किए सीधे बायपास से सुरक्षित निकल सकेगा।
लोनिवि राजपुर कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार अनुपूरक बजट में स्वीकृति के बाद वित्तीय मंजूरी के लिए प्रस्ताव वित्त विभाग के अंतर्गत आने वाली एसएससी को भेजा गया है। प्रस्तावित बायपास को गवाघाटी हाइवे से नवोदय विद्यालय के पीछे से बनाने की योजना है।
इस मार्ग में कोल्याखोदरी नाले पर पुलिया के निर्माण के साथ ही ओझर की डेब नदी पर भड़कला के पास और देवनली नदी पर दो बड़े पुलों का निर्माण किया जाएगा। इसके अलावा आवश्यकता अनुसार मार्ग में अन्य छोटी पुलियाएं भी बनाई जाएंगी।
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नेशनल हाइवे गवाघाटी से बनने वाले लगभग सात किलोमीटर लंबे व सात मीटर चौड़े इस नए रास्ते के बनने से क्षेत्र को हाइवे से जोड़ने वाली एकमात्र ओझर गवाघाटी सड़क का यातायात दबाव काफी कम हो जाएगा।
वर्तमान में उपयोग की जा रही यह सड़क मात्र तीन मीटर चौड़ी है, जिस पर दिन-रात भारी वाहनों का अत्यधिक दबाव रहता है। रास्ता संकरा होने से सामने से आते बड़े लोडिंग ट्रकों को साइड देने के लिए छोटे वाहनों, बाइक व कार को जान का जोखिम उठाकर मजबूरी में कच्चे रास्ते पर उतरना पड़ता है। इस समस्या को नईदुनिया लगातार उजागर करता रहा है।
स्वीकृति होते ही टेंडर होंगे
एसएससी कमेटी को प्रस्ताव स्वीकृति के लिए भेजा गया है। वित्तीय स्वीकृति प्राप्त होते ही टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।- अमित भूरिया, एसडीओ, लोनिवि, राजपुर।